चाचा भतीजा बीएफ

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तो मैंने भी मुठ्ठ मार कर अपने लण्ड को हल्का कर लिया और आगे और भी ज़्यादा मज़ेदार चुदाई देखने के लिए बैठ गया।एक बार झड़ने के बाद बृजेश वैशाली को पलंग पर लेटा कर उसके पास ही लेट गया।वो दोनों एक-दूसरे के हाथ पकड़ कर एक-दूसरे के होंठ. जो अब्बू के लिए मख़सूस थी। वे एक हाथ में अख़बार पकड़े चाय के आखिरी आखिरी घूँट पी रहे थे।हमारे सामने टेबल की दूसरी तरफ अम्मी.

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और मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया।मुनिया मेरे लौड़े की मुरीद हो गई थी वो मेरा लण्ड चूम कर बोली- जानू तुम मुझे रोज चोदा करो।रास्ते में मैं यह सोच रहा था कि कहीं वो प्रेग्नेंट ना हो ज़ाए।घर पहुँचते ही मैंने पाया कि मेरे लण्ड पर छाले पड़ गए थे।मैंने अपना लण्ड धोया और खाना खाकर सो गया।आपके ईमेल की प्रतीक्षा में आपका नितिन[emailprotected]. तू तो मेरी ‘उसको’ चौड़ी ही कर देगा। चौड़ी हो गई तो तुम्हारे मौसा को पता लग जाएगा, मैं कहीं की नहीं रहूंगी।‘किसको चौड़ी कर दिया मौसी?’‘हटो भी. ’ आपी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रखा और कहा- यहाँ आराम नहीं मिल रहा मुझे.

उसे बिल्कुल खूँखार कुत्ते की तरह भकाभक चोदते ही जा रहा था।वो बहुत चिल्ला रही थी और मज़े भी ले रही थी- हाँ चोद मुझे और ज़ोर से चोद. झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। इस बीच वो झड़ चुकी थी।वो फरियाद करने लगी- छोड़ो मुझे. जो मेरे कंधे को हिला रहा था।कुछ मज़ीद सेकेंड के बाद मेरी आँखें सही तरह खुल पाईं और मेरे कानों में दबी-दबी सी आवाज़ आई- अब उठ भी जाओ ना.

उनका कोई बच्चा नहीं था।उनके पति बिजली विभाग में कार्यरत थे।मेरी उनसे बात हमेशा होती रहती थी या ये कहा जाए कि मेरे पूरे टाइम पास के लिए एक वह ही थीं। जैसा कि आप सभी जानते है गांव में बहुत बोर लगने लगता है.

तभी एक अनजाने हाथ को अपनी गाण्ड का जायजा लेते महसूस कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए।नशे के कारण मेरे अन्दर की लड़की जाग गई।मैं थोड़ी देर आँखें बंद किए लेटा रहा. ’ कर उठीं, बोलीं- संतोष जी आज आपने मस्त कर दिया।यह थी मेरी रस भरी कहानी. फिर मैंने उसके होंठ पर होंठ रख रख दिए और पागलों की तरह उसे किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी।हम तो भूल ही गए थे कि वो बेबी हमारे बीच में है।जब वो रोने लगा.

’ यही सोचते हुए मैं वहाँ से गाउन पहनकर गेट खोलने के लिए जाने लगी।मैंने दरवाजा खोला तो सामने रोहन था और उसका चेहरा उतरा हुआ लग रहा था।दरवाज़ा खोलते ही वो मुझसे आकर लिपट गया। मैंने भी उसके बालों में हाथ फेरा और उससे पूछा- क्या हुआ?तो वो बोला- आज मेरे सिर में बहुत दर्द हो रहा था. कुछ देर के बाद बुआ जी के मूली लंड महाराज ने उनको शांत कर ही दिया और इधर मेरे लंड महाराज ने भी अपना गुस्सा थूक दिया, जो ज़मीन पर गिरा पड़ा था. सो हम दोनों ही पता नहीं कितनी देर तक वैसे ही पड़े रहे।फिर मैं उठ कर बाथरूम गया.

मैं उन्हें इस हालत में देखने में इतना खो गया कि ना जाने कब मेरा हाथ मेरे लंड पर चला गया और मैं मुठ मारने लगा.

इस बीच मैं आपसे मिल लूँगी।मैंने कहा- ओन्ली मिलना है?वो बोली- क्यों क्या इरादा है?मैंने कहा- इरादा तो नेक है. बुआ ज़ोर ज़ोर से गालियाँ दे रही थीं- चोद साले चोद… जितनी गांड में दम है ना, पूरी लगा कर चोद.

चाचा भतीजा बीएफ लेकिन मेरा हुआ नहीं था तो मैंने उनको नीचे किया। अब मैं ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था।दस मिनट बाद मैं भी हाँफते हुए छूट गया।उसके बाद मैं और चाची अपने कपड़े ठीक करके सो गए।आपको मेरी कहानी कैसी लगी? मुझे आपके मेल का इंतजार रहेगा।[emailprotected]. मुझे बहुत ज़ोर का दर्द हुआ, मेरी जान निकल गई और मैं उसे रोकने लगी- आहऽऽ राजू.

चाचा भतीजा बीएफ ’वो जल्दी से चोदने को बोलने लगी।मैंने अपना लण्ड सैट किया और अभी टोपा ही अन्दर डाला था कि दर्द के कारण वो बाहर निकालने का बोलने लगी।मुझे पता था कि एक बार निकाल दिया तो दोबारा नहीं डलवाएगी, मैं ऊपर से ही धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा।थोड़ी देर बाद वो भी बोलने लगी- तेज-तेज करो. पर मैं तो बेबी के रोने का इन्तजार कर रहा था और वो रो ही नहीं रहा था।फ़िर मैंने जानबूझ कर बेबी को रुला दिया और आंटी को पकड़ा दिया। अब आंटी मेरे बिल्कुल साथ बैठी थीं और आंटी ने रोज की तरह अपने ब्लाउज के दो हुक खोल कर अपना दूध बेबी के मुँह में दे दिया और आंटी सीरियल देखने लगीं।फ़िर बेबी ने आंटी के मम्मों को जोर से दबा दिया और आंटी ने ‘आउच.

तो मैंने पूछा- क्या हुआ?वो बोलीं- बहुत ज़ोर की गुदगुदी हो रही है।मैंने कहा- सुबह बोल रही थीं कि दर्द हो रहा है?तो उन्होंने कहा- सुबह जब तुम मेरी चूचियों को मसल रहे थे.

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सब बहुत खुश थे।ऐसे में मैं और मेरे सहपाठी इसी खुशी में आम के बग़ीचे में घूमने निकले।क्या मीठे आम लटक रहे थे।तभी मेरी नज़र दूर खड़ी एक सांवली, नखरे वाली. वो चिहुंक गई और उसने अपनी पैरों को सिकोड़ लिया।मैंने उससे पूछा- कैसा लग रहा है?उसने बोला- मैं पागल हो रही हूँ. इसलिए मैं तुमसे सेक्स करना चाहती हूँ।मैं तो उसकी बात सुन कर बहुत मस्त हो गया और उसको अपनी ओर खींच कर उसके होंठ पर किस करने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी और उसकी सांस तेज चलने लगी।मैंने भी देर न करते हुए उसको अपनी गोद में उठाकर उसके बेडरूम में ले गया। वो केवल एक नाईटी में थी। मैंने उसकी नाईटी उतार कर जब उसको नंगा देखा तो क्या फिगर था.

इसलिए मैं तुमसे सेक्स करना चाहती हूँ।मैं तो उसकी बात सुन कर बहुत मस्त हो गया और उसको अपनी ओर खींच कर उसके होंठ पर किस करने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी और उसकी सांस तेज चलने लगी।मैंने भी देर न करते हुए उसको अपनी गोद में उठाकर उसके बेडरूम में ले गया। वो केवल एक नाईटी में थी। मैंने उसकी नाईटी उतार कर जब उसको नंगा देखा तो क्या फिगर था. जल्दी कर लो।मैंने कुछ देर और उसकी चूत को चोदा और पानी निकाल दिया।कुछ देर मैंने उसे जाने दिया।रात में मैंने फोन करके पूछा- कैसी लगी चुदाई?अंजलि ने कहा- बहुत मस्त. जहाँ वो सबसे मोटा होता है।दो मिनट बाद जो धक्का मारा तो पूरा लण्ड चूत के अन्दर था।फिर उसकी हालत को देखते हुए मैं भी थोड़ी देर बिना हिले-डुले लेटा रहा। कुछ देर बाद उसने खुद नीचे से अपनी चूत को लण्ड पर दे मारा।मैंने उसको देखा तो हम दोनों मुस्करा दिए.

मेरे चूचों को खा जाओ… जोर से चूसो इन्हें… और और रगड़ कर पेलो… मेरे जानू इसे कहते हैं असली चुदाई… चूत के राजा.

’ मैंने हँसते-हँसते हुए कहा- जब आप अपने जज़्बात से तंग आकर अपनी टाँगों के बीच वाली जगह को थप्पड़ों से नवाज रही थीं. अगर आप बुरा ना माने तो मैं उनको घुमा देता हूँ। आखिर भाभी के लिए अपना भी तो कोई फर्ज बनता है।भाई बाले- अरे ये तो बहुत बढि़या है। तुम इस महीने, अगर तुम्हें टाइम मिले तो कुछ जगह तुम घुमा देना. वो मेरे लिए ‘J’ लिखा हुआ छोटा सा की-चैन लाई थी।‘इसे आप अपनी कार में रखना ताकि मेरी याद आए।’उसकी आँखों में आँसू थे, वो बोली- पता नहीं हम फिर कभी मिलेंगे या नहीं.

तुम अपनी सेहत का भी कुछ ख़याल करो।ये कह कर आपी ने हाथ में पकड़े गंदे टिश्यूस को कंप्यूटर टेबल के नीचे पड़े डस्टबिन में फेंका और पैकेट में से 5-6 टिश्यू और निकाले और फिर से मेरे लण्ड और मेरी जाँघों पर लगी मेरी गाढ़ी सफ़ेद मनी को साफ करने लगीं।मैं पानी का गिलास हाथ में पकड़े आपी को देखने लगा. मुझे उतना ही आनन्द आता।हर 3-4 झटकों के बाद स्केल से उसके चूतड़ पर मारता रहा. जिससे टोपा चूत से बाहर निकल गया।दीदी फिर वैसे ही गाण्ड को पीछे करके सो गईं.

अब जाने कब इन्हें देखने और दबाने का मौका मिले।तो वो मेरे गाउन में से ही मेरे मम्मों को बाहर निकाल कर उन्हें चूसने और मसलने लगा।थोड़ी देर बाद वो उठा और मुझे एक चुम्मी देकर जाने लगा। मैंने अपने मम्मों को वापस गाउन में डाला और उसे दरवाजे तक छोड़ने गई और फिर वो चला गया।थोड़ी देर बाद रोहन भी स्कूल जाने लगा तो मैंने उसे लंच बॉक्स लाकर दिया. और ये दुनिया थम सी जाए।थोड़ी देर में मेरा वीर्य भाभी की योनि में दौड़ रहा था!भाभी भी निढाल सी होकर लेट गईं।फिर भाभी ने कहा- बुझी आपकी प्यास?मैंने कहा- अभी तो बुझ गई.

उसके स्तन क्या लग रहे थे। ऐसा लग रहा था कि इतने टाईट कपड़ों में से उछल कर मेरे हाथ में आ जाएंगे।‘क्या मैं आपको बच्चा लगता हूँ?’ मैं बोला।वो बोली- क्या मैं तुझे आंटी लगती हूँ?और हम दोनों हँसने लगे।फिर वो कहने लगी- मैंने तो कब से फिटनेस क्लब ज्वाइन किया हुआ है. अब आगे से ऐसा कभी नहीं करूँगा।उसका लण्ड अभी तक खड़ा था और अभी तक पैंट से बाहर निकला हुआ था, मैंने उससे उसके कपड़ों को ठीक करने का बोला।एकाएक उसकी नज़र उसके लण्ड पर गई. जिससे उनकी पूरी आवाज़ दब गई।कुछ पलों के बाद ही वो उछल-उछल कर चुदाई के मजे लेने लगीं।अजीब-अजीब सी आवाजें भी निकालने लगीं- आह्ह.

रायपुर से आपके लिए एक मस्त सेक्सी कहानी लेकर आया हूँ।अन्तर्वासना का मैं आभारी हूँ कि मुझे यहाँ अपनी कहानी लिखने का मौका मिला। मैं अन्तर्वासना पर कामुकता भरी हिन्दी सेक्स स्टोरी का पिछले सात सालों से नियमित पाठक हूँ।आज मैं पहली बार अपनी कहानी पोस्ट कर रहा हूँ, यह मेरे जीवन में घटी सच्ची घटना है।अब आपकी मुलाकात इस कहानी की नायिका से करवाता हूँ।नाम नेहा, उम्र 26 साल.

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’ वो उत्तेजना से कांपने लगी।कभी मैं उसके निप्पल पर अपनी जीभ घुमाता तो कभी उसको काट लेता।‘आउच आह राहुल.

और रात का इंतज़ार करने लगा।उस रात के लिए अपने रूम मेट को एक दोस्त के कमरे पर भेज दिया।भाभी के साथ चुदाई की सोच कर मैंने एक बार उनके नाम पर मुट्ठ भी मार ली।रात 11 बजे बड़े भाई आ गए और 12 बजे तक उनके घर में अँधेरा हो गया मतलब सब लोग सो चुके थे।छोटी भाभी अकेली थी. तुम्हारे अंकल का तो छोटा सा है।अब मेर लण्ड दुबारा खड़ा हो गया।आंटी के मम्मे अभी भी दिख रहे थे।आंटी ने मुझसे कहा- तुम्हारा तो फ़िर खड़ा हो गया।मैंने आंटी के मम्मों की तरफ़ इशारा किया।आंटी ने कहा- अच्छा तो यह बात है. उन्हें सब वहाँ आंटी कह कर बुलाते थे।वो दिखने में 42 साल की नहीं लगती थीं.

सच-सच बताओ कब से चल रहा है ये सब?मैं- दीदी कुछ दिनों से देख रहा हूँ।दीदी फिर खड़ी हुईं और कमरे के बाहर जाने लगीं. तो उनके बालों की मोटी सी चोटी किसी साँप की तरह बल खाते हुए नीचे आई और इधर-उधर झूलने के बाद उनके कूल्हों के दरमियान रुक गई।आपी ने गहरे गुलाबी रंग की ब्रा पहन रखी थी. बीएफ भोजपुरी वीडियो हिंदीजिसकी मुझे हमेशा से तलाश रहती है, आप लोग तो समझ ही गए होंगे।खैर नए दोस्तों के लिए बताना चाहूँगी कि उस अजीब से यंत्र का नाम है लण्ड.

मगर वो 30 सेकंड मेरे तड़पते हुए गुजरे।अंकल ने माल छोड़ते हुए मेरा चेहरा पूरी तरह से अपने लण्ड पर दबा रखा था उनका सारा माल सीधे मेरे पेट में उतर गया।मैं बेबस सा उनकी गोद में पड़ा हुआ था।अब अंकल का लण्ड धीरे-धीरे सिकुड़ रहा था।मैंने आज पहली बार किसी दूसरे का लण्ड सिकुड़ते हुए महसूस किया था. वो भी एकदम माल लगती थीं। कोई उनको देख कर यह नहीं कह सकता कि उनकी एक 19 साल की बेटी भी है। मुझे छत पर आता देख आंटी ने मुझसे बात करने लगीं।आंटी- अरे बेटे तुम छत पर क्या कर रहे हो?मैं- आंटी मैं तो रोज छत पर टहलने आता हूँ.

जैसे हम काफी पुराने दोस्त हों।मैंने एक बात और नोट की कि वो काफी खुले विचारों की लड़की थी और उसे ऐसी बातें करने में दिलचस्पी भी थी।तभी मैंने फिर कहा- यार इसके अलावा आप और हम जैसे लोग खुल कर सेक्स जैसे टॉपिक पर बातें करने में विश्वास रखते हैं और ज़िन्दगी का मज़ा भी लेते हैं।अर्श- सर. तो देर ना करते हुए मैंने उसकी पैन्टी भी उतार दी।उसकी एकदम चिकनी क्लीन शेव. तभी भाभी ने करवट बदली और वो मेरे बिल्कुल पास आ गईं।अब तो मुझमे भी थोड़ी सी हिम्मत आ गई.

वो देखता ही रह गया। सिमरन मेरे सामने एक पिंक कलर की एक पारदर्शी शॉर्ट नाईटी पहने खड़ी थी।क्या बताऊँ, वो क्या लग रही थी जैसे कोई परी जन्नत से उतर कर मेरे सामने खड़ी हो गई हो।मुझे उसकी एक अदा बहुत अच्छी लगती थी। वो यह कि जब भी वो मुझे देखती थी. उनके मम्मों को दबाया।उनसे रहा नहीं जा रहा था और उन्होंने कहा- प्लीज़ अब अन्दर कर दो।मैंने उठ कर अपने लण्ड उनके चूत पर रखा और थोड़ा झटका दिया। पहली बार में मेरा लण्ड फिसल गया।उन्होंने कहा- धत पागल. मेरी बहन का कुंवारापन मेरे लण्ड की वहशत से खत्म हो।मैंने आपी की बात सुन कर मुस्कुरा कर उन्हें देखा और कहा- अच्छा जी.

दोस्तो, मेरा नाम गौरव है। मेरी उम्र 19 साल है दिखने में अच्छा हूँ और काफ़ी फ्रेंड्ली हूँ।बात उन दिनों की है जब मेरी 12 वीं कक्षा की परीक्षा हुई थी और मैं घर पर परीक्षा के रिज़ल्ट का इन्तजार कर रहा था.

पर वरुण का HIV पोजिटिव निकला और उसकी वजह से नेहा को हो गया था।आप मुझे अपनी राय मेरी ईमेल पर भेज सकते हैं।[emailprotected]. उस वक़्त मेरा जेहन कुछ सोचने-समझने के क़ाबिल ही नहीं रहा था।ऐसी भी क्या बेहोशी यार.

उसका उस पर मर-मिटने को मन हो जाए।उस लेडी से हमारी कभी-कभी बात हो जाती थी।बात उस समय की है. जिसने मेरे कपड़ों के साथ साथ भाभी की भी पैन्टी को भी गीला कर दिया और तभी अलार्म घड़ी बजने लगी।आह. मेरी ज़ुबान उनके मुँह में और उनकी मेरे मुँह में थी।मैंने एक उंगली को उनकी गीली चूत में अन्दर-बाहर करना शुरू किया और भाभी भी मेरे लण्ड को हिलाने लगीं।कुछ ही देर बाद मैं फिर से तैयार हो गया और मैंने भाभी को बिस्तर पर लिटाकर उसकी दोनों जाँघों को फैला दिया और अपने शेर को गुफा में घुसने के लिए रास्ता दिया।भाभी की चूत पर अपने लण्ड को रखकर एक ज़ोर के धक्के से अपने लण्ड को अन्दर घुसाया ही था.

लेकिन इतनी उम्र होने के बाद भी वो बहुत ही कसी हुई गदराई औरत हैं। उसका कारण ये है कि चाचा रोज शराब पी कर आते थे और आते ही सो जाते थे तो चाची की चुदाई बहुत कम होती थी।मैं अकसर उनकी ब्रा या पैंटी चुरा के उसमें मुट्ठ मार दिया करता था।मैं हमेशा से ही उनको जम कर चोदना चाहता था. नेहा ने अपना हाथ मेरे अंडरवियर में हाथ डाल दिया और मेरे लण्ड को निकाल लिया, वो मेरे लण्ड को आगे-पीछे करने लगी।मैंने अब नेहा की पजामी को भी नीचे कर दिया। नीचे देखा तो भाभी ने लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी उनकी गाण्ड एकदम गोरी-चिट्टी थी।मैंने नेहा भाभी का चेहरा देखा तो नेहा मुझे देख कर शर्मा रही थी। मैं कामातुर होकर उसके होंठों को कभी-कभी काट लेता. तो रात में मैं भी वहीं बैठने लगा।मैं उनके पीछे से चूची दबाता रहता था। इससे ज्यादा कुछ नहीं हो पाता था।वो भी बहुत चाहती थीं.

चाचा भतीजा बीएफ तो मैंने उसे पसंद किया और वो मुझे एक कमरे में ले गया जहाँ उनका मसाज का काम चलता था।वहाँ सी. वो आदमी भी मुझे देखते हुए कि मैं उसका लंड देख रहा हूँ, अपने लौड़े को हिलाए जा रहा था, उसके चेहरे पर हवस का नशा मैं साफ देख सकता था!ना उससे बर्दाश्त हो रहा था और ना मुझसे, लेकिन मैं घबराहट की वजह कुछ बोल नहीं रहा था, क्योंकि कभी ऐसा किया नहीं था.

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’ करने लगी।उसकी पैन्टी में मैंने हाथ डाला, वह गीली हो चुकी थी।मैंने अपना खड़ा लंड निकाला और कहा- लो डार्लिंग चूसो. लेकिन उसने एक बार झूठ भी ‘ना’ नहीं कहा।मैं उसे अपनी बाइक पर लेकर कमरे पर आया।राकेश को पहले ही रिक्वेस्ट करके मैंने उसके कमरे से शराब की बोतलें और सिगरेट के बट्स हटा दिए थे।भावना ने कमरे में बैठते हुए मुझे पूछा- तुम्हारी तो दिल्ली में काफी लड़कियों से सैटिंग होगी?मैंने हँस कर कहा- नहीं. मैंने खुद भी आँखें बंद कर लीं।मेरी गहरी नींद टूटी और मैंने ज़बरदस्ती आँखें खोल कर देखा.

सम्पादक जूजामैंने आपी को यकीन दिलाया कि मैं सिर्फ़ उनकी रानों के बीच में ही रगडूंगा।आपी ने मेरे लण्ड को अपनी रानों में दबा लिया और मैंन लण्ड को आपी की रानों में ही फ़िराने लगा कि आपी ने कहा- एक मिनट रूको यहीं. लेकिन आप की वजह से देखना तो दूर की बात मैंने मम्मों को चूस भी लिया और चूत को भी चाट लिया. बीएफ सपना चौधरी काइसलिए जब उनका बदन मेरे जिस्म से टकराया तो मैं खुद को संभाल ना पाया और लड़खड़ाता हुआ पीछे की जानिब गिरा और आपी ने भी मुझ पर चढ़ते हुए मेरे साथ ही नीचे आ गिरीं।लेकिन फर्श पर नरम कार्पेट होने की वजह से मुझे चोट नहीं लगी थी लेकिन आपी को तो जैसे कोई परवाह ही नहीं थी कि मैं मरूं या जीऊँ।आपी मेरे ऊपर छा सी गईं।मैं झटके से ज़मीन पर गिरा.

तो मेरा ड्रेस गीला हो गया।मैंने उसे सुलाया और कपबोर्ड में ड्रेस देखने लगी, मुझे नितिन की वाइफ की बहुत साड़ी और ब्लाउज मिले। उसकी और मेरी फिटिंग लगभग एक सी थी। मैंने सोचा कि ड्रेस सूखने पर वापस चेंज कर लूँगी।नितिन को आने में अभी टाइम था.

तमाम पॉज़िटिव और नेगेटिव इश्यूस को ज़ेरे-ए-बहस लाने के बाद हमने ये ही फ़ैसला क्या कि खुदा को याद करके काम शुरू कर देते हैं।मैं अब्बू के पास से उठ कर कमरे में आया. कि उसकी गोरी-गोरी गाण्ड को देख कर और भी जोश आ रहा था।मेरा पूरा लण्ड नेहा की प्यारी चूत में था और उसकी गाण्ड भी बहुत चमक रही थी, मेरा उसकी गाण्ड मारने का मन हो आया।मैंने अपनी स्पीड थोड़ी तेज कर दी और जोर-जोर से नेहा की चुदाई करने लगा।नेहा की चुदाई की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं- ऊऊह.

आखिर ये माल उन्हीं ने मेरे लिए पटाया था।मैंने उससे कहा- देखो भाभी आपको मुझे अपने बगल में रूम दिलाना पड़ेगा। ऐसे तो हम पकड़े जाएंगे। ये तो मेरी गाँव की भाभी हैं. तो वो सो रही थी। मैंने धीरे से कमरे का दरवाज़ा बंद किया और बाहर से लॉक कर दिया।आपी को वापस आकर मैंने कहा- हनी सो रही है और फरहान की कोई बात नहीं. बस थोड़ी सी सांवली थी। उसका नाम मंजू (बदला हुआ नाम) था।मैं यहाँ बता देना चाहता हूँ कि इस उम्र की औरतें चुदाई में सबसे पागल कर देने वाले दौर में होती हैं। अनुभवी, अपने मर्दों से थकी हुईं.

ऊओह माय गॉड… एक अल्हड़ सी कमनीय कंचन सी पंजाबी कन्या मेरे नीचे थी… मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था।पायल जिसकी याद में मैं रोज़ मुठ मारा करता था.

तो तुम्हारे आने से उसका भी मन लगा रहेगा।यही तो हम दोनों चाहते थे, अब आने- जाने का रास्ता भी साफ हो गया था।अगले दिन ही मैं सुबह की ड्यूटी करके सीधा उनके रूम में चला गया।भाभी ने गले लगाकर मेरा स्वागत किया, मैंने भी जोर से उनके दोनों चूचे दबाकर उन्हें जोर की झप्पी मारी।भाभी- बड़े उतावले लग रहे हो देवर जी. इसलिए मेरी भी जांघें नंगी ही थीं। जब मेरी जाँघों से भाभी की नर्म मुलायम जाँघों का स्पर्श हो रहा था. तो बाहर आ जाओ।यह नोट लिख कर मैंने तस्वीर में देखा तो वो मेरे मोबाइल को देख रही थी कि मैं क्या लिख रहा हूँ।फिर मैं धीरे से सोफे से उठा और अपना मोबाइल सोफे पर ही रख दिया और बाहर बाथरूम में चला गया।मैं मन ही मन खुश हो रहा था कि आज मुझे जन्नत मिलने वाली है।मेरा लौड़ा पूरा कड़क हो चुका था.

नंगी बीएफ पिक्चर फिल्मऔर उन्होंने अपने हाथ मेरे हाथों पर रखे और सिर को पीछे झुका कर मेरे कंधे से टिका दिया और अपनी गाण्ड पीछे की तरफ दबा दी।मैं अपना लण्ड आपी के कूल्हों की दरार में रगड़ने के साथ-साथ ही उनकी गर्दन को भी चूमता और चाटता जा रहा था, अपने हाथों से कभी आपी के सीने के उभार दबाने लगता कभी उनके निप्पलों को चुटकियों में दबा कर मसलता।फरहान आपी की चूत को ऐसे चाट रहा था. लेकिन मुझे नहीं हो रहा।मैं- क्यों किसमें प्रॉब्लम है?भारती भाभी- मैंने चोरी छिपे चेकअप करवाया.

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जब मैं कानपुर में जॉब करता था और मेरी गर्लफ्रेण्ड दिल्ली में रहती थी, वो कभी-कभी मेरे पास आ जाती थी और हम मज़े करते थे।लेकिन अचानक मुझे पता चला कि वो किसी और से प्यार करती है. पर भाभी के खूबसूरत बदन को अपनी बाँहों में भरके प्यार करना है।पर कभी ठीक मौका नहीं मिला और न ही कभी आगे बढ़ कर उनका हाथ थामकर उन्हें बाँहों में भरने की हिम्मत हुई।आख़िर वो दिन आ ही गया. लेकिन फिर धीरे-धीरे स्वाद आने लगा। बहुत नमकीन-नमकीन लग रहा था।मैं अपने आप मुँह खोल कर उनके अगले भरे चम्म्च का स्वागत करने लगी। फिर बाबा जी ने मेरा सर थोड़ा ऊपर उठाया और कप मेरे मुँह को लगा दिया और हल्का सा टेड़ा करके मुझे पिलाया।‘बड़ा घूँट पीयो जग्गो.

वो झट से पीछे मुड़ीं और परदा को साइड से हटाते हुए कमरे से बाहर चली गईं।उस दिन फ्लोर का झाड़ू लगाना अधूरा ही रह गया। मैं उस दिन बहुत शर्मिंदा था. मैं बरबस उन पर आकर्षित होकर उसे चूमने लगा।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !माधुरी- राहुल आहह. और जोर-जोर से उसके मुँह की चुदाई करने लगा। कुछ देर ऐसे ही नेहा के चूसने के बाद मैंने माल सारा उसके मुँह में निकाल दिया।वो मुझसे छूटने का प्रयास करने लगी, मैंने कहा- बेबी नेहा जान.

अगर आपको कोई एतराज़ ना हो। अगर आपको बुरा लगेगा तो मैं नेक्स्ट टाइम से आपको डिस्टर्ब नहीं करूँगा।उसने देखा कि मैंने सब कुछ सच-सच बताया है. तेरे मौसा तो शाम को चले गए थे और तूने क्या किया।तभी कुछ औरतें आ गईं और मौसी भी उनके साथ अन्दर चली गईं।मैंने बाजार से सामान और उनकी दवाइयां लाकर उनको दे दीं, उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर दबा दिया।मैं भी अब समझ गया था कि मौसी चुदने के पूरे मूड में हैं।पूरा दिन मेहमानों का आना-जाना लगा रहा।शाम को सबने खाना खाया और मैं उसी कमरे में जाकर लेट गया। तभी मौसी मेरे पास आकर बोलीं- मेरा बिस्तर भी यहीं लगा देना. ’आपी ने अपनी गाण्ड को मज़ीद ऊपर की तरफ झटका दिया और फरहान के सिर को ज़ोर से नीचे की तरफ अपनी गाण्ड के सुराख पर दबाया।दो-तीन ज़ोरदार झटके मारने के बाद आपी ने अपना सिर पीछे बिस्तर पर पटका और गर्दन घुमा कर मेरी तरफ देखा।कहानी जारी है, आप अपने ख्यालात कहानी के आखिर में जरूर लिखें।[emailprotected].

सम्पादक जूजामैं आपी की बात सुन कर उनकी चूत के दाने को अपने लबों में दबा कर चूसने लगा।मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे आपी की चूत के दाने से मीठे रस का चश्मा उबल रहा है. अभी तुम ये दूध पियो।मैंने जग को मुँह से लगाया और एक घूँट भरा, फिर आपी से कहा- आपी कमजोर तो आप भी हो जाओगी.

उसके चेहरे पर एक शरारत से भरी मुस्कान थी। उसने मेरे लण्ड को हाथ में पकड़ा और उस पर हाथ फेरने लगी।मैंने कई बार अपने हाथ से अपना लण्ड पकड़ा था.

’ करने लगी।उसकी पैन्टी में मैंने हाथ डाला, वह गीली हो चुकी थी।मैंने अपना खड़ा लंड निकाला और कहा- लो डार्लिंग चूसो. बीएफ पिक्चर दे दीजिएतू सिर्फ मेरा है और इस गांड पर सिर्फ मेरा हक़ है।यह कहकर उन्होंने मेरी गांड में उंगली डाल दी. हिंदी बीएफ पिक्चर्सतब मुझे लग रहा था जैसे कोई गुदाज चीज़ मखमल की तरह मेरे ऊपर गिर रही हो।कुछ देर यह चलता रहा. और वो धीरे-धीरे शर्म वाली हँसी हंस रही थी, मानो उसे गुदगुदी हो रही हो।वो अपने हाथों से मेरा लण्ड हिला रही थी। अब मैं जानता था कि आयशा से पूछना बेकार है.

सचमुच का विलेन ही लग रहा था, वो वहाँ आ गया और आंटी को कुछ कहने लगा।आंटी बहुत घबड़ाई सी होकर अन्दर चली गई, शायद आंटी उसे बहुत डरती हों।थोड़ी ही देर में विलेन की नजरें मुझ पर पड़ीं और मुझे वो घूरने लगा।मैंने भी सोचा कि यहाँ से कट लूँ।उसके बाद मैं वापस अपने कमरे में आ गया.

आज से तुम्हारे मौसा की जगह तुम हो। उस साले भड़वे का तो ढंग से खड़ा भी नहीं होता है उसका लण्ड नहीं लुल्ली है. जो उनके कुंवारेपन को चैलेन्ज कर सके, जबकि लड़कियाँ अगर अपना कुंवारापन खो दें. रंग गोरा है।मैं कानपुर से हूँ पर पिछले 4 साल से दिल्ली में रह रहा हूँ!मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ, मैंने अन्तर्वासना पर कई सेक्स कहानियाँ पढ़ी हैं.

मैंने कभी भी नहीं किया है और तुम्हारा बहुत बड़ा है बहुत दर्द होगा।मैं- पायल मैंने भी कभी नहीं किया है. मैंने उसके मुँह पर अपना हाथ लगा रखा था।मेरा आधा लंड उसके चूत के अन्दर हो गया था।मैं एक-एक इंच का मज़ा ले रहा था।कुछ देर तक मैं अपने आधे लंड ही उसे पेलता रहा।अब वो भी मेरा पूरा लंड अन्दर लेने को रेडी थी। मैंने पूरा लण्ड उसकी चूत के अन्दर ठोक दिया। ‘उफ़फ्फ़. और जोर से और प्यार से इस निगोड़ी को खूब चूसो।तब तक वे अपने ब्लाउज के पूरे बटन खोल चुकी थीं। मैंने भी अपने दोनों हाथ उनके मोटे-मोटे मम्मों पर जमाए और रसीली फांकों को चूसने लगा।वे अपने हाथ पैर इधर-उधर फेंकने लगीं।मेरे लण्ड देवता भी इस क्रिया के दौरान गीले हो चुके थे और राकेट की शक्ल ले चुके थे।जब मैंने अपनी जुबान चूत के छेद में डाली.

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मैं भैया का बिना कोई विरोध किए शान्त होकर पड़ी रही। मेरा दिमाग तो कह रहा था कि ये सब गलत हो रहा है. कभी घूमने के बहाने लाकर अपने रूम में जमकर चुदाई की।दूसरे महीने भाई की नाइट ड्यूटी के कारण कम टाइम मिला, पर मौका निकाल कर हम दोनों अपनी हवस शान्त कर ही लेते थे।रात में उनके साथ सोने को उनके पड़ोस की भाभी आती थीं. उल्टे मुझसे पूछ लेतीं- क्या-क्या देखा है?मैं शर्मा कर वहाँ से चला आता।मैं रोज शाम को जाता और देर रात को आता। कई बार तो देर रात तक उनके यहाँ ही बैठता था।चाचीजी मुझे बहुत मानती थीं।एक बार मैं शाम को भाभी के यहाँ गया.

मेरा जेहन बहुत उलझा हुआ था।आपी के रोने की वजह से दिल पर अजीब सा बोझ था और उन्हीं सोचों से लड़ते-झगड़ते जाने कब मुझे नींद आ गई।अपनी गर्दन पर शदीद तक़लीफ़ के अहसास से मेरे मुँह से एक सिसकी निकली.

क्या रात-दिन मुझे ही देखता रहता है? और तेरी ये वासना भरी नजरें तो हमेशा मेरे स्तनों पर ही रहती हैं? तब शर्म नहीं आती तुझे?मैं भौंचक्का सा उनकी तरफ देख रहा था एक बार तो मन में आया कि सब खेल खत्म हो गया।पर आगे क्या होने वाला था ये कौन जानता था.

उसकी तबीयत ठीक नहीं है और मैं और रामा मेरे कमरे में आ गए। कमरे में आते ही मैंने रामा को अपने गले लगा लिया और उसकी चूचियाँ कुर्ते के ऊपर से ही दबाने लगा।उसने अपना सर मेरी छाती पर रख लिया और सिसकारियाँ लेने लगी- ओफ. तो बृजेश का लण्ड लेने से इन्कार करने की संभावना ही नहीं थी।जैसे ही वो नहा कर आई. नया वाला हिंदी बीएफयह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !घर से निकलते ही भारती भाभी ने मुझसे पूछा- क्यों देवर जी कोई लड़की पटाई है या नहीं?मैं- नहीं भाभी.

और चारों तरफ से लकीर की शकल में बह कर नीचे जाते हुए जड़ में ज़मीन पर एक सर्कल की सूरत में जमा हो गया हो।मुझे बाद में आपी ने बताया था कि तुमने यह जुमला इतना ठहर-ठहर के और खोए हुए कहा था कि फरहान और मैं दोनों ही तुम्हें हैरत से देखने लगे थे। तुम उस वक्त किसी और ही दुनिया में थे. उसने काँप कर मुझको कस कर पकड़ कर मेरे सीने पर सर रख दिया, उसने एक तरह से समर्पण कर दिया था।अब मुझे अहसास हो गया कि वो भी दिल से दिमाग से अपने पहले सम्भोग के लिए राजी है, मैंने उसको गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया।पायल- राहुल लाइट बंद कर दो. मुझसे रहा नहीं जा रहा है।मैं ऐसे ही कुछ देर तक उन्हें तड़पाता रहा, बाद में मैंने धीरे से सुपारा अन्दर डाल दिया।हमने एक-दूसरे को इतना कसकर पकड़ लिया कि पत्थर भी अगर हमारे बीच रखते तो चूर-चूर हो जाता।रजिया चाची की चूत बहुत ही टाइट थी.

तो आपी के सीने के बड़े-बड़े उभारों और खड़े पिंक निप्पल्स पर मेरी नज़र पड़ी. तो हमने बात को यहीं ख़त्म कर दिया और उन लोगों का बाहर से लाया हुआ नाश्ता था.

पर फिर उन्होंने कहा- समीर, ऊपर से नहीं अन्दर हाथ डालकर इन्हे मसल दो.

अपनी ही मस्ती में रहता है।आंटी अब अपने घर जाने लगीं और मुझसे कहा- कभी आ जाया करो. उससे दोस्ती बढ़ाई और एक दिन अपना विज़िटिंग कार्ड देते हुए उसको कॉल करने के लिए कहा।बाद में उसने कॉल किया. अभी तो इसे शांत कर दो।वो नीचे आया और मेरी पैंटी उतार दी। उत्तेजना के कारण मेरी चूत से पानी आने लगा था और पैंटी पूरी गीली हो गई थी।हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए, वो मेरे नीचे था और मैं उसके ऊपर थी।अब वो मेरी चूत चाट रहा था और अपनी जीभ से उसे कुरेद रहा था। मैं किसी आइसक्रीम की तरह उसके लंड को चूस रही थी।थोड़ी देर बाद जैसे ही उसे लगा कि मैं झड़ने वाली हूँ.

बीएफ सेक्सी हिंदी में गाना क्या तुम रोहणी नाम की जगह जानते हो?मैं- हाँ क्यों?पायल की माँ- बेटा पायल के एग्जाम का सेंटर है वहाँ. आशा है इस बार भी भाभियां आंटियां और चिकनी चूत वाली लौंडियाँ मुझे ईमेल करके बहुत सारा प्यार देंगी।[emailprotected].

पर मैंने चादर हटा कर उसको बाँहों में उठा लिया।आज ऊपरी तौर पर मैंने पायल के साथ सब कुछ कर लिया था और वो मेरे साथ सब कुछ अपनी ख़ुशी से कर रही थी।अब देखना यह था कि कि वो मुझसे चुदती कब है।मेरे साथ अन्तर्वासना से जुड़े रहिये. तुम्हें लाने से ले जाने तक का!मैंने एक बार सोचा और फिर ‘हाँ’ करने में ज़्यादा देर नहीं लगाई।प्रोग्राम बना. लेकिन मैं इसके लिए अभी तैयार नहीं हूँ।मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या कहूँ.

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वो मुझे देखते ही गर्म हो गया जो कि उसका खड़ा हो चुका लौड़ा बता रहा था।मैं उसके पास जाकर बैठ गई और ऐसे ही इधर-उधर की बात करनी शुरू कर दी, मैंने उससे पूछा- तेरी गर्लफ्रेण्ड है?उसने मना कर दिया. तो मैंने स्पीड और जोर से बढ़ा दी। तभी मेरे लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी… और उसकी चूत को लबालब भर दी।मैं उसके ऊपर लेट गया।कुछ मिनट बाद वो बोली- बेबी थकान उतरी?मैंने कहा- ह्म्म्म्म. जो आज कुछ ज्यादा ही तने हुए महसूस हो रहे थे।उसी वक़्त मुझ पर ये वज़या हुआ कि आपी बिल्कुल नंगी हैं.

आपी ने नीचे पैन्टी भी नहीं पहनी हुई थी।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!मैंने आपी की टाँगों को खोला और अपने मुँह को चूत पर रख कर ज़ुबान फेरने लगा। मेरी ज़ुबान आपी की चूत के साथ लगी ही थी कि आपी ने सिसकारी भरी।‘ऊऊऊहह ऊओह. पहले तो मैंने बचा लिया था।मैंने आपी की टाँगों के बीच रखे अपने हाथ को सलवार के ऊपर से ही उनकी चूत के दाने पर रगड़ते हुए कहा।आपी ने मचलना बंद कर दिया था.

ऊपर से कहाँ से आ रही हो?आपी बोलीं- वो मैं ऊपर धुले हुए कपड़े लटकाने गई थी.

पर वो गर्म होने का नाम नहीं ले रही थी।तब मैंने अपनी ट्रिक लगाई और अपने लौड़े को उसकी चूत में टिकाया और अपने दोनों हाथों में उसके बोबों को पकड़ लिया और एक लंबी साँस ली और शॉट लगाने शुरू कर दिए तो वो तड़पने लग गई लेकिन मैंने उस पर कोई रहम नहीं किया क्योंकि मैं जानता था कि अब आगे शायद ही मौका मिले।फिर मैंने दूसरी साँस भरी और अनगिनत शॉट लगा कर मैं उसके ऊपर गिर गया।वो बोली- मेरी चूत बहुत दु:ख रही है. बाकी के दो साल कैसे निकालोगी?‘मैं अभी कमसिन हूँ, कोई रंडी नहीं हूँ जो कि एक साथ चार-चार मेरे ऊपर पिले पड़े हो. चलो मेरे मुँह में ही झड़ जाओ।मेरी साँसें तेज़ हो रही थीं और मैं हाँफ़ने लगा। फ़िर थोड़ी देर बाद मैं उसके मुँह में झड़ने को हो गया।मैं- लो मेरी जान.

तुमको भी अब अच्छा लगेगा।अब पायल ने चुदास की अतिरेकता के चलते मेरे साथ चुदाई का मन बना सा लिया था और मैं भी उसके अन्दर पहली चुदाई से होने वाले दर्द को लेकर उसको समझा रहा था. अब मेरा लण्ड भी जवाब देने लगा, मुझसे बस अब और नहीं हो रहा था, फिर भी मैंने कुछ और धक्के मारे. कहकर उसने लंड मेरे गले में उतार दिया।मेरी आंखें बाहर आ गईं… मैंने उसके हाथ सिर पर से हटाते हुए उससे दूर हटने लगा.

वैसा मैंने कभी महसूस नहीं किया है, ऐसा लग रहा था कि मैं सातवें आसमान में उड़ रही थी।जब पायल अपनी बात बता रही थी.

चाचा भतीजा बीएफ: आज बहुत दिन हो गए हैं मैंने तुम लोगों को ये करते नहीं देखा।मैंने आपी की बात सुनी तो वहीं खड़ा हो गया और मुस्कुरा कर आपी को देखते हुए कहा ‘वो’ क्या आपी. आखिर वो मेरी पत्नी की बहन है।अगर जबरदस्ती करूँगा तो इज्जत की माँ चुद जाती। यही सोच कर सोफे के पास गया तो देखा कि जहाँ मैं मोबाइल रख कर गया था.

मैंने उसके गले पर किस किया और फिर उसके होंठों को अपने होंठ का स्पर्श किया।मैं कुछ आगे करता. तो मेरे पूरे शरीर में सिरहन दौड़ गई।मैंने कहा- जीजू बड़ा अजीब फील हो रहा है।जीजू बोले- होगा ही. प्रिय अन्तर्वासना पाठकोअगस्त महीने में प्रकाशित कहानियों में से पाठकों की पसंद की पांच कहानियाँ आपके समक्ष प्रस्तुत हैं…पूरी कहानी यहाँ पढ़िए…पूरी कहानी यहाँ पढ़िए…पूरी कहानी यहाँ पढ़िए…पूरी कहानी यहाँ पढ़िए…पूरी कहानी यहाँ पढ़िए….

लेकिन उत्तेजना भी ज़्यादा थी।उसके बताए पते पर पहुँच कर मैंने उसे कॉल किया, करीब 2 मिनट बाद वो आई।ये 2 मिनट मेरी लाइफ से सबसे लंबे 2 मिनट थे।जैसे ही उसने दरवाजा खोला.

बल्कि मजे का अहसास था।उन्होंने आहिस्तगी से अपना सिर वापस ज़मीन पर टिका दिया. तो वह खड़ा था। मैंने अभी अण्डरवियर भी नहीं पहनी थी, सिर्फ़ तौलिया लपेटा हुआ था।वह अपनी सलवार सिलने के लिए आई थी। उस समय मेरा कोई मन नहीं था. मैंने अपनी उंगलियों को सख्त रखते हुए फरहान को इशारा किया कि वो आपी का हाथ अपने लण्ड पर रखवाए और उनके सीने के उभार चूसे.