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अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा सादर प्रणाम।मेरा नाम राजवीर सिंह है और लोग प्यार से मुझे लकी भी कहते हैं। मैं मध्य-प्रदेश के ग्वालियर शहर से हूँ और अन्तर्वासना का गत 5 वर्षों से नियमित पाठक हूँ.जब मैं वहाँ पहुंचा तो तकरीबन सभी नाश्ता करके जा चुके थे, सिर्फ निम्मी और मैरी बैठी थी एक टेबल पर और दूसरे टेबल पर शानू और बानो विराजमान थी, दोनों आपस में बड़ी तन्मयता से बातें कर रही थी.

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फिर क्यों एक ही सवाल बार-बार पूछ रहा है।मैं नाराज़ होकर वापस अपने कमरे में आ गया।तो मॉम कुछ देर बाद मेरे कमरे में आईं और ‘सॉरी’ बोल कर मुझे हग करके रोने लगीं।मैंने उनसे फिर वही सवाल पूछा तो वो बोलीं- तुम्हारे डैड यहाँ नहीं हैं ना. सुबह 4 बजे हमने बाथरूम में जाकर शावर के नीचे नंगे ही एक बार फिर से चुदाई कर ली।इसके बाद मैं भाभी को बार-बार चोदता रहा। अब भाभी के पास मेरा 2 साल का बच्चा है. वो तो मेरा दोस्त है और बस किसी बहाने उसके घर तक जा। मैं उस कुत्ते की आँखों में डर देखना चाहता हूँ और वो डर तब पैदा होगा.

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’ की आवाजें निकाल रही थी। फिर मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली डाली और अन्दर-बाहर करने लगा।उसे बहुत मज़ा आ रहा था.

अचानक भाई ने मेरे सर को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से झटके देने शुरू कर दिए।कुछ ही देर में उनके लंड से तेज वीर्य की पिचकारी मेरे गले में उतरने लगी।ना चाहते हुए भी मैं उनका सारा माल पी गई।पुरु- आह्ह.

’ निकला।अब मैंने भाभी के गले पर अपना होंठ रख दिया जिससे भाभी और गर्म होने लगी।मैंने भाभी का हाथ अपनी जाँघ पर अपने लंड के करीब रख दिया।अब मैं भाभी की जाँघ को सहला रहा था और उनके गले पर चुम्मी कर रहा था। फिर धीरे-धीरे मैं भाभी के होंठ की ओर बढ़ रहा था।आहह. ? वो क्या कहेगी उसको?यह सोच कर वो वापस लेट गई और सोने की कोशिश करने लगी। मगर उसकी चूत से गिरता पानी उसको बेचैन कर रहा था।पायल- ओह. तो मैं भी उसके बिस्तर पर लेट कर सोने का इन्तजार करने लगी।क़रीब 5 मिनट की बाद मैं उठी और बाथरूम के रास्ते जाकर अन्दर झाँकने लगी.

उसका तौलिया बिस्तर पर ही रह गया और नंगी ही सूर्या के गले लग गई।सूर्या देखता ही रह गया।दोस्तो, मेरी यह कहानी आपको वासना के उस गहरे दरिया में डुबो देगी जो आपने हो सकता है कभी अपने हसीन सपनों में देखा हो. और एक लम्हे के लिए उसकी मुठ्ठी में उसका लंड आ भी गया।जाहिरा- भाई यह तो बहुत गरम हो रहा है और सख़्त भी. अब वो मेरे सामने सिर्फ पैन्टी में खड़ी थी।मैं उसकी पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा और बिस्तर पर लेटा कर उसकी पैंटी को उतार दिया, उसके बिना बाल वाले चिकने छेद को देखकर मैं बेकाबू हो गया।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !मैंने लपक कर उसकी चूत पर मुँह रख दिया और अपने हाथों से उसकी चूत को फैला कर उसके छेद में अपनी जीभ डाल कर उसकी चूत जीभ से चोदने लगा।वो सिसक रही थी- ऊऊ.

तो आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।[emailprotected].

वैसे मै दिल ही दिल मैं बहुत खुश था कि कल रात दो की जगह चार लड़कियों की चुदाई कर दी थी मैंने। लेकिन मैंने अपना रुख कठोर बनाये रखा. और एक लम्हे के लिए उसकी मुठ्ठी में उसका लंड आ भी गया।जाहिरा- भाई यह तो बहुत गरम हो रहा है और सख़्त भी. भाभी की चुदाई की रसभरी कहानी आप सभी को मजा दे रही होगी। मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि मेरा उत्साह बढ़ाने के लिए मुझे ईमेल जरूर कीजिएगा।कहानी जारी है।[emailprotected][emailprotected].

उसने उसी वक्त उसको फोन कर दिया- तेरी जॉब लग गई है और तेरे जीजा जी ने अपने ऑफिस में तुझे रख लिया है और बढ़िया सैलरी पर रखा है।आशू बहुत खुश हुई और बोली- जीजा जी से बात करवा तो. उसके बाद तो तेरी फैन हो गई हूँ मैं।ऐसे ही बातें करते-करते उसकी सहेली का कमरा आ गया।मैंने बाइक साइड में लगाई और उसने कमरे को खोला. तब भी तुम्हारी ज़बरदस्ती में मुझे मजा तो आया। अब सुबहा टट्टी करते वक़्त जो हाल होगा उसका क्या होगा?और हम दोनों हंस दिए।‘तुम सच्ची में किसी भी औरत की रेल बना सकते हो।’फिर हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने।दोस्तो, कहानी मेरी सच्ची है.

तो मैंने कुछ नहीं कहा और मुस्कुरा कर दुबारा लंड उसके मुँह में डाल दिया।पिन्की ने धीरे-धीरे लंड के टोपे की खाल को खींच कर पीछे किया और बड़े प्यार से अपने लाल-लाल होंठों को खोल कर लंड के टोपे को मुँह के अन्दर ले कर चूसने लगी और अपनी जीभ से लंड की नोक वाले भाग को सहलाने लगी।उसकी जीभ का खुरदरापन पाकर मेरा लंड और भी कड़ा होने लगा और मुझे लगा.

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तो मैं भी फ़ौरन ही बाहर को देखने लगी।जाहिरा पहले ही फैजान के लिए नाश्ता टेबल पर लगा चुकी थी। फैजान वहीं बैठ गया और फिर रसोई से जाहिरा उसकी लिए चाय लेकर आ गई और उसके पास ही बैठ गई।अब टेबल पर बैठ हुए वो दोनों मेरे सामने दिख रहे थे।फैजान- आओ तुम भी नाश्ता कर लो.

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मगर वो मज़ा नहीं आता था।मैंने उसको बोला- मैं कुछ मदद करूँ।वो हँस पड़ी और उसने बात टाल दी।वो मुझसे बहुत ही ज्यादा बात करती थीं और उनकी चुदास बढ़ती जा रही थी जो मुझे उनकी नजरों में मेरा लवड़ा देख कर समझ में आ जाती थी।यह सब समझ कर अब जब भी मैं उनके घर जाता तो उसके बेटे को कह देता था कि जा. मैंने देखा कि उसका लौड़ा घुसने के लिए अभी तो और बाकी रह गया है।इतने में उसने मेरे दोनों हाथ पकड़े और एक झटका और मार दिया। अब मेरी चूत फट गई थी और मैं बहुत तेज़ चिल्लाई. तब मैंने मुँह से थूक निकाला और उसकी गाण्ड के छेद तथा मेरे सुपारे पर मल लिया। अब फिर से लौड़े को छेद पर टिका कर दबाव डाला.

वो 3 कौन हैं और दूसरों को कैसे चुनते हैं?विवेक- मेरी जान तूने संजय खन्ना का नाम तो सुना होगा? उसका बेटा पुनीत ये पार्टी देता है. अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा और वो सिसकियाँ भरने लगी।थोड़ी देर इसी तरह चोदने के बाद हमने पोजीशन बदल ली. उसके फोटो पर हस्तमैथुन करके और उससे चुहलबाजी और द्विअर्थी मजाक करके ही काम चला रहा था।फिर एक दिन मेरी किस्मत ने मेरा साथ दिया और मेरी बीवी की नानी की तबियत बहुत ख़राब हो गई और मेरी बीवी और उसके माँ-पिताजी को उनके ननिहाल चले गए और मेरी ससुराल में बस साला-सलहज और उनकी फुलटाइम बाई रह गई।फिर एक दिन मैं दोपहर के समय जब मेरा साला दफ्तर में होता है.

तो मैं जानबूझ कर मॉम के गले से लग कर सो गया और मैंने अपना हाथ मॉम के मम्मों के ऊपर रख दिया।थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि मेरी मॉम मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख कर अपनी मम्मों को दबवा रही थीं।तभी मुझे लगा कि मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया है।फिर मैंने सोने की एक्टिंग की और कुछ और अधिक होने का इन्तजार किया.

पर वो मुझसे वजन में इतना भारी था कि मैं उसको हिला भी नहीं पाई और छटपटा कर रह गई।मैंने उससे विनती की- मुझे छोड़ दे. माँ की बुर पर बाल महसूस हो रहे थे।चूँकि मेरे लंड पर भी झांटें थीं तो मैं समझ गया कि ये माँ की झांटें हैं। इतनी हरकत के बाद भी माँ कुछ नहीं कर रही थीं. बस छेद होता है।माँ अब काफ़ी खुल कर बातें करने लगी थीं, तो मैंने जानबूझ कर अंजान बनते हुए माँ की जांघों के ऊपर से नाईटी का बटन खोल कर हटा दिया जिससे उनके कमर के नीचे का हिस्सा नंगा हो गया और उनकी बुर को हाथों से छूते हुए कहा- अरे हाँ.

इंटरवल खत्म हो चुका है और फिल्म भी शुरू हो चुकी है।मैंने नावेद से पूछा- तुम्हारे दोस्त कहाँ बैठे हैं?वो मुस्कुरा कर बोला- भाभी मेरे तो कोई भी दोस्त नहीं हैं। मैं तो अकेला ही फिल्म देखने आया हूँ. आज उसी लाज और शर्म को मेरे मन ने बाहर फेंक दिया और इच्छाओं का दरवाज़ा खोल दिया।पति की नाकामयाबी मेरे साथ एक धोखा सा था. जाहिरा की चूत के पानी से गीली हो रही हुई अपनी उंगली को मैंने जाहिरा के होंठों पर रगड़ा और फिर अपनी उंगली उसकी मुँह के अन्दर डाल दी, उसे अपनी ही चूत का पानी चटवा दिया।मैं थोड़ा सा घूम कर इस तरह जाहिरा के ऊपर आई.

इससे पहले कि वो चेंज करने के लिए वापिस जाती।फैजान ने पिज़्जा का बॉक्स खोला और बोला- चलो आ जाओ जल्दी से ले लो. समझे! बहुत बोलती थी कि तुम जैसे नामर्द से लड़की होना अच्छा है, अब साली रोएगी जब उसको अपनी मर्दानगी दिखाएँगे.

तो रोहन भी अपने कपड़े उतारने लगा।कुछ ही पलों में रोहन सिर्फ अंडरवियर में था और उसका मोटा लण्ड साफ नजर आ रहा था। फिर रोहन ने मेरी ब्रा और पैन्टी भी उतार दी. तो मैं भैया के साथ-साथ ही था। हम एकदम पानी में चले गए और म्यूज़िक के साथ डान्स करने लगे।तभी भैया का लंड मेरी गाण्ड से टच हुआ और मुझे मजा आ गया। फिर तो मैं जानबूझ कर भैया की तरफ़ गाण्ड करके डान्स करने लगा।भैया भी शायद समझ गए और उन्होंने पानी के अन्दर अपना लंड बाहर निकाल लिया और मुझसे बोले- आरूष पानी मे पूरा नीचे तक जा. ऐसे!’ चूत पर हुए अचानक हमले से मेरी पत्नी रोआंसी सी हो आई, लेकिन राजू ने खुद को सँभालते हुए धीरे धक्कों के साथ चुदाई जारी रखते हुए स्थिति को संभाल लिया।अब वो बिना जल्दी किए धीरे-2 अपने दोस्त की बीवी की नर्म-गुलाबी चूत को चोदने लगा और मेरी भार्या अकल्पनीय सुख के सागर में गोते लगाने लगी, उसके मुख से तेज सिसकारियाँ निकलने लगी और उसकी मुख-मुद्रा बता रही थी कि उसके सुख की कोई सीमा नहीं थी!‘ओ ओ ओ.

चूस कर चाट कर शान्त की और निढाल हो कर एक-दूसरे से चिपक कर लेट गए।जब हम दोनों पूरे खुश हो गए तब माँ जी मेरी तरफ देखने लगीं कि मेरी क्या प्रतिक्रिया है।लेकिन आज मुझे दुनिया का एक अलग सा मज़ा मेरी सासू माँ ने मुझे दिया था.

ताकि जाहिरा को भी मालूम हो सके कि कैसे सेक्स करते हैं।मेरी एक टाँग जाहिरा के जिस्म से भी टच कर रही थी।मैं अब कोई भी कोशिश नहीं कर रही थी कि जाहिरा को पता ना चले क्योंकि मुझे तो पहले से ही पता था कि जाहिरा जाग रही है. इतना कहकर वो मेरी बड़े मोटे लंड को अपने मुँह में लेकर पागलों की तरह चूसने लगी। मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया। उसके कोमल होंठ मेरे लंड को इस तरह चूस रहे थे मानो कि प्यासे को रेगिस्तान में पानी मिल गया हो।अब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसे बिस्तर पर नीचे लिटाकर उसकी अंडरवियर उतार दी और उसकी चूत में उंगली डाल दी. पर वो नहीं माना और मुझे चूमने लगा और मेरे निप्पलों को चूसने लगा। करीब 5-10 मिनट के बाद उसने धीरे-धीरे अपने लौड़े को मेरी चूत में अन्दर-बाहर करना शुरू किया।फिर मुझे आनन्द की अनुभूति होने लगी और मैं भी उसको सहयोग देने लगी।फिर तो मेरी आवाजें पूरे कमरे में गूंजने लगीं। लगभग 10 मिनट तक हमारी चुदाई चली। उसके बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।मैं उसकी बांहों में ही थोड़ी देर लेटी रही.

उसके जिस्म में एक सर्द लहर दौड़ गई आग की तरह तपता हुआ लौड़ा उसके नाज़ुक हाथ की उंगली से टच हो रहा था। मगर उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वो उसको पकड़ सके और तुरन्त उसने अपना हाथ बाहर निकाल लिया।दोस्तो, उम्मीद है कि आपको कहानी पसंद आ रही होगी. पर अब तक कोई बच्चा नहीं हुआ था।उसके बाद 19 साल का भाई था व सबसे छोटी लड़की की उम्र 18 साल थी।कहानी तीसरे भाई की बीवी से शुरू होती है। उसका नाम गीता था.

फैजान का बाज़ू मेरे ऊपर आ गया। मैंने अपनी आँखें थोड़ी सी खोलीं तो देखा कि फैजान आहिस्ता-आहिस्ता जाहिरा के कन्धों पर हाथ फेर रहा था।मैं मन्द मन्द मुस्करा दी और उसकी हरकतों को देखने लगी, नींद तो मेरी फ़ौरन ही गायब हो गई।फैजान का हाथ आहिस्ता आहिस्ता फिसलता हुआ जाहिरा के कंधे से नीचे को आने लगा। जैसे ही फैजान ने जाहिरा की चूची को छुआ. तुम जल्दी से इसको खड़ा करो और मुझे चोदो।इतना सुनते ही मेरा मोशन बनने लगा और लंड में कड़कपन आने लगा। वो भी फिर से लण्ड चूसने लगी और मैं उसकी चूत में उंगली करता रहा। जब मेरा पूरा खड़ा हो गया तो उसने अपना छेद मेरे लौड़े की तरफ किया और मेरे लंड को पकड़ कर उसमें टिका दिया।मैंने जैसे ही जोर लगाया. लेकिन फ़ौरन ही उसने दोबारा से अपनी चेहरे को सपाट कर लिया। अब वो खुद को संम्भालते हुए दोबारा से आँखें बंद करके पड़ी रही।मेरे जिस्म के पास पड़े हुए उसके हाथ में मुझे थोड़ी सी हरकत सी भी फील हुई थी.

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तो मुस्कान ने झट से मेरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। फिर प्रियंका भी धीरे-धीरे मेरा लौड़ा चूसने लगी। दोनों बहनें एक साथ मेरा लंड लॉलीपॉप के जैसे चूस रही थीं।मुझे जन्नत का एहसास हो रहा था क्योंकि मेरा लंड दो-दो गुलाबी मखमली जैसे होंठों में अन्दर-बाहर हो रहा था।मैंने सोचा कि पहले प्रियंका को ठंडा कर दूँ.

पानी तो पिला दीजिए।वो पानी लेने चली गई और जैसे ही पानी लेकर आई मैंने उसका हाथ पकड़कर अपनी गोद में बैठा लिया और उसके गाल चूम लिए और ‘आई लव यू’ कहा पर वो चुप रही।मैं- क्या हुआ भाभी. आप सब इस कहानी के बारे में अपने ख्यालात इस कहानी के सम्पादक की ईमेल तक भेज सकते हैं।अभी वाकिया बदस्तूर है।[emailprotected]. आप बेफिकर होकर कुछ भी करे।तब उसने दरवाज़ा बंद किया और दोनों एकसाथ बैठ गए और मैं उधर कुर्सी पर बैठ गया।वो दोनों आपस में चुम्बन करने लगे.

खुला रखेगा तो घाव जल्दी सूखेगा और आराम भी मिलेगा।‘लेकिन माँ खुला होने की वजह से मेरा लंड पूरा तना जा रहा है. अगर उसे मेरा ख्याल नहीं होता या सोनाली मेरी बहन नहीं होती तो अब तक चोद चुका होता। लेकिन शायद उसे मेरी दोस्ती रोक रही थी।तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और सूर्या भी उधर आँखें फाड़-फाड़ कर देखने लगा।मैंने भी देखा. ब्लू मूवी सेक्सी हिंदी मेंपुनीत भी हँसने लगा और मुनिया भी हँसती हुई वापस अन्दर चली गई, मगर सन्नी वैसे ही खड़ा बस सोचता रहा।लो दोस्तो, अब ये क्या हो रहा है.

फैजान पर बिजलियाँ सी गिरा रहे थे।ुज़ाहिर है कि फैजान की नजरें ज्यादातर अपनी बहन ही को देख रही थीं।मैं भी इस चीज़ को नोट कर रही थी जैसे ही जाहिरा सामने टेबल पर रखे हुए पिज्जा का पीस उठाने के लिए आगे को झुकती. पर मेरे हाथ पीछे लेने की वजह से मेरे बाजू में बैठे नितिन को सब पता चल गया कि मैं क्या कर रहा था। उसने मुझे धीरे से पूछा- क्या कर रहा था बे?तो मुझे मजबूरन उसको सब बताना पड़ा। वो मेरी बातें सुनकर हँसने लगा.

मेरा होने को था।मैंने काफ़ी देर तक चोदता रहा और फिर झड़ गया, मैंने सारा माल लौड़े को बाहर निकाल कर आंटी की गाण्ड पर छोड़ दिया और हाँफने लगा।मैं थक गया था. मैंने अपने होंठों को उसके होंठ पर रख दिए और उसने कोई विरोध नहीं किया।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !बस. मैं सब आराम से देख रही थी।कुछ देर बाद भाई ने अपने बरमूडे को नीचे किया और अपना लंबा लौड़ा बाहर निकाल लिया। जिसे देख कर मेरी और ज़्यादा हालत खराब हो गई.

नहीं आती वो अब दवा लेकर सो गई है।फैजान ने जाहिरा को सीधा किया और उसकी टी-शर्ट को ऊपर करने लगा। टी-शर्ट को ऊपर तक उसकी गले तक ले जाकर उसे निकालने लगा।तो जाहिरा बोली- नहीं भैया. मैंने हर उल्लंघन को तोड़ दिया और पति को अपनी अनछुई जवानी के मर्मांग को खुलकर परोस दिया।पतिदेव ने मेरे उन हर अंग को दबा-दबा कर खूब टटोले और चूमने लगे. इससे पहले कि वो चेंज करने के लिए वापिस जाती।फैजान ने पिज़्जा का बॉक्स खोला और बोला- चलो आ जाओ जल्दी से ले लो.

वहाँ जाएगा तो कम से कम आराम से देख तो सकेगा।मेरी बात सुन कर तो उसको तो मुँह माँगी मुराद मिल गई और जब तक वो वहाँ खड़ा रहा.

तो मैं समझ गया वो रंडी किसी दूसरे कमरे में अपनी प्यास बुझाने गई होगी और ये सोच कर मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैं धीरे से बिस्तर के पास गया और वहाँ का नजारा देख कर मेरी हालत पतली हो गई रे. ये तूने कहाँ से सुना।‘मेरे दोस्त कहते हैं उनमें से कई तो अपने घर में नंगे ही रहते हैं और सब औरतों की बुर देख चुके हैं।’यह सुन कर माँ बोलीं- अच्छा तो ये बात है.

फिर रात को घर वापस आकर खाना आदि खा कर सो गया। आधी रात के करीब जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा सब लोग सो रहे हैं और मेरी साली मेरे पैरों के पास सो रही है।मैंने अपने पैरों से उसको सहलाया. आगे देखते हैं।वो बाइक एक घर के पास जाकर रुकी और टोनी बाइक से उतरा और सीधा उस घर में चला गया। वहाँ कुछ अंधेरा था. तो अभी मेरा आधा सुपारा ही अन्दर गया होगा कि वो बहुत जोर से कराहने लगी।तब मैंने मेरा लंड निकाल कर चूत में ही डाल दिया और उसको पूरी ताकत से ज़ोर-ज़ोर से चोदता हुआ अपने अंतिम पड़ाव पर आ गया। मेरी भांजी झड़ चुकी थी और वो मुझे बस करने की कह रही थी.

अमित भी हाथ से भाभी की चूत को सहलाने लगा।थोड़ी ही देर में भाभी फिर गर्म हो गईं और कहने लगीं- अमित, अब और मत तड़पा. दीप्ति ने ककड़ी छोड़ दी और मुझे उसी हालत में पीठ के बल लेटने को कहा, मैं किसी तरह सहन करके पीठ के बल लेट गया. देखो मना नहीं करना।मैं समझा कि पूजा मजाक कर रही है लेकिन पूजा ने अलमारी से एक मोटी सी कैंडिल निकाली… जिसको देखता ही रह गया। उस कैंडिल की शक्ल बिल्कुल लंड की तरह थी और जिसकी लम्बाई एक फुट की थी। जिसे देख कर मेरी गाण्ड फटने लगी कि यदि इसने सचमुच मेरे गाण्ड में डाल दिया.

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’रेशमा ने अपनी दोनों हथेलियों से पुट्ठे को पकड़ कर अपनी गाण्ड फैलाई और मैंने उसकी गाण्ड में पहले एक उंगली डाली और उसकी गाण्ड फैलाने के लिए उंगली अन्दर-बाहर करता रहा। गाण्ड जब थोड़ा ढीली पड़ी. तुमसे कुछ बात करनी है।आप तो बस जल्दी से मुझे अपनी प्यारी-प्यारी ईमेल लिखो और मुझे बताओ कि आपको मेरी कहानी कैसी लग रही है।कहानी जारी है।[emailprotected]. क्योंकि मैं भाभी को नंगी नहाते हुए देखना चाहता था।कुछ देर तक तो मैं लंड हिलाता रहा, फिर भाभी नहा कर बाहर आईं और कपड़ा फैलाने छत पर गईं।इतनी देर में मैंने दरवाजे में छेद कर दिया। भाभी वापस आकर मेरे पास बैठ गईं। कल की तरह आज भी उनका ध्यान मेरे पैंट के उभार पर ही था।कभी-कभी की-बोर्ड पर मेरा हाथ भाभी के हाथ से छू जाता था.

थोड़ी देर चूसने के बाद मैंने उसके चूचे दबाने शुरू कर दिए और वो भी मेरे बालों में हाथ फिरा रही थी। वो चुदासी सी बोल रही थी- आह. ’ अब मैं भाभी के ऊपर आ गया, भाभी ने अपने दोनों पैर खोल दिए, मैंने अपना लंड भाभी की चूत पर रख दिया और रगड़ने लगा. देसी भाभी ओपनऔर साथ में मेरा क्लीवेज भी देख चुके हो।इतना कहकर नयना ने दुपट्टा हटा दिया। दुपट्टा हटते ही उसके बड़े-बड़े चूचे जो सामने की तरफ़ उभर आए थे.

कभी-कभी हम सब एक-दूसरे को अपने हाथों से ये काम करवाते। मंजन करते और नहलाते और जब मौका मिलता अपनी बुर और लंड एक-दूसरे में घुसाए रहते।तो दोस्तो, यह थी हमारे घर की सच्चाई।इस कहानी के बारे में अपने विचारों से अवगत कराने के लिए मुझे जरूर लिखें।[emailprotected].

मैंने एक हाथ उसके टॉप में नीचे से डाल दिया और उसकी दाईं चूची पर रख कर उसके निप्पलों को धीरे-धीरे रगड़ने लगा।तो उसकी सांसें और जोर-जोर से चलने लगीं. पर चूत चाटने के खुमार में मैं वो दर्द भूल गया।मैं जल्दी से सोफे पर उल्टा लेट कर दीप्ति की चूत चाटने लगा।आआहह… क्या मज़ा आ रहा था.

सोनाली ने अपने जिस्म की नुमाइश करके उसका भरपूर मनोरंजन किया।जब वो लौट रहा था तो उसकी फूली हुई पैंट इस बात का सबूत पेश कर रही थी कि उसे कितना मजा आया।हम लोग चाय पीने लगे।मैं- चल. उसकी उभरी हुई चूचियों को देखा तो कम से कम 34बी साइज़ की तो ज़रूर होगीं।ऐसा लग रहा था… जैसे दो संतरों को बहुत कस कर बांधा गया हो। नीचे सपाट पेट. उसके दाने को लण्ड से छेड़ने लगा। मैंने उसके पैर अच्छी तरह से ऊपर तक मोड़ दिए और चूत के छेद पर लण्ड लगा कर घुसाने लगा.

मगर ना जाने क्या सोच कर उसने वो भी निकाल दी। अब वो एक कोने में खड़ी अपनी टाँगों को भींच कर चूत को छुपाने लगी थी और हाथों से अपने चूचे छुपा रही थी।पुनीत- अरे क्या हुआ जान.

उसने मुझे बिना कोई झिझक के अपना नंबर दे दिया।अब हम अपना समय लगभग साथ में ही व्यतीत करने लगे थे।एक दिन मैंने उससे कहा- तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो।वो- वो क्यों?मैंने कहा- तुम बहुत खूबसूरत हो. ‘लेकिन माँ ज्यादा तनने के कारण मेरे लंड में अब बहुत खुजली हो रही है।’ मैंने लंड माँ की तरफ बढ़ाते हुए कहा।तो माँ बोलीं- ठीक है. मेरा नाम अभय राज है। मैं कलकत्ता का रहने वाला हूँ और अन्तर्वासना का बहुत पुराना पाठक हूँ। मुझे यहाँ बहुत सारी कहानियां सच लगीं और बहुत सी झूठ भी लगीं.

हिंदी बीपी विडियोतो मैंने बाहर निकलते ही कैमरा को मोबाइल से कनेक्ट किया और छत पर जाकर बैठ गया और देखने लगा कि वो क्या कर रही है।मैंने देखा वो अभी डी ड्राइव में ही घूम रही थी कि उसकी नज़र हाइड फाइलों पर पड़ी. पुनीत उस कच्ची कन्या पर टूट पड़ा। उसके नर्म होंठों को चूसने लगा। उसके छोटे-छोटे अनारों को दबाने लगा। कभी वो उसके छोटे से एक निप्पल को चूसता.

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मैंने भी उसे कोई इसरार नहीं किया कि वो मुझे नई ब्रा पहन कर दिखाए।शाम को फैजान घर आया तो आज भी हमेशा की तरह उसकी नज़रें अपनी बहन की चूचियों पर ही थीं. जब तक है जान हम मिलते रहेंगे, चुदाई करते रहेंगे।’ये थी मेरी जीजा साली की चुदाई पर आधारित सेक्स स्टोरी. और दूसरे हाथ से उसकी योनि के दाने को मसलने लगा।अब वह मुँह से आवाजें निकलने लगी। मेरा लण्ड भी उसकी गाण्ड की दरार में फंसा हुआ था.

चुम्मी क्यों कर कर रही है अब?मैं हँसने लगी।फिर गुरूजी ने कहा- शीलू मेरी और रत्ना मैडम की अलग-अलग पोज़िशन में नंगी फ़ोटो निकालो।मेरे बाल बहुत लंबे थे. तो मैं उसकी मदद करने लगा।मदद तो उसको छूने का और उसके अंगों का मजा लेने का बहाना था।उसको सिखाते-सिखाते मैंने उसके पेट पर हाथ फेर दिया और वो सिहर गई। तभी मैंने एक उंगली उसकी गर्दन पर फेर दी और तब तक मेरा लंड खड़ा हो कर तंबू बन गया था जो की उसको साफ़-साफ़ दिख रहा था।तभी एक और स्टेप उससे नहीं हो रहा था तो मैंने उसको बताने के क्रम में उसको पीछे से पकड़ा जिससे मेरा लंड उसके दोनों चूतड़ों के बीच लग गया. जो कि काफी तेज चल रही थीं। मैं कामातुर हो कर उसके होंठों को करीब 10 मिनट तक चूसता रहा।वह भी अपनी जीभ मेरे मुँह में डालकर चाट रही थी। फिर मेरे हाथ उसके सर पर से सरक कर उसकी चूचियों पर आ गए। कुछ देर उसके मस्त उभारों को सहलाने के बाद हाथ को कुरते ले अन्दर ले गया। पहले तो मैंने उसके कुरते के ऊपर से ही उसके मम्मों को सहलाना शुरू कर दिया और फ़िर जैसे ही अन्दर हाथ डाला.

वो माँ जी ने देख लिया और वे मेरे मस्त चूचों पर हाथ घुमाने लगीं।उन्होंने मुझसे कहा- आज तुम्हें इससे मैं मुक्ति दिलाऊँगी।अब माँ जी ने हल्के से मेरा स्लीवलैस ब्लाउज निकाल दिया. 5 लंड खा चुकी थी।सूर्या- क्या?मैं- हाँ उसकी चूत तो पहले से फटी थी गाण्ड मैंने फाड़ दी।सूर्या- इतने लंड खा चुकी है. मेरे कमरे में बैठ जाओ। वैसे भी मेरा दोस्त रात को आएगा। आपको यहाँ कोई परेशानी नहीं होगी। जब आपकी दीदी आएं तब चले जाना।उसने राहत की सांस ली और वह मेरे कमरे में आ गई। उसने टॉप और छोटी सी स्कर्ट पहन रखी थी। इन कपड़ों में वो कयामत लग रही थी.

फिर उन पर जीभ फिराने लगीं।तभी धीरे से उनका हाथ नीचे मेरी चूत पर पहुँच गया और वे उधर अपना हाथ फेरने लगीं. लेकिन 2 मिनट में ही वापस आ गई।थोड़ी देर बाद वो मुझसे वाशरूम से छिपकली को हटाने के लिए बोली।मैंने कहा- चलिए.

छोटी उम्र से ही मेरे चूचे और चूतड़ दोनों ही भारी हैं।अभी वर्तमान में मेरा फिगर 36-34-41 का है, आप मेरे चूतड़ों के नाप का अन्दाजा लगा सकते हैं कि कितनी बड़ी होगी।तो एक साधारण सी बात है.

मुझे भी नहीं पता था कि अब बात कितने आगे जाएगी।मैंने अब तो खुल कर उनकी तारीफ करना शुरू कर दी, शायद वो भी अब बातों में या मुझमें इंटरेस्ट ले रही थीं।भाभी ने पूछा- सच में मैं 28 की लगती हूँ क्या?तो मैंने कहा- हाँ जी. ஆன்ட்டிகளின் செக்ஸ் வீடியோबस अब सोनाली को पटाना बाकी है और अपने हथियार के लिए चूत का जुगाड़ हो जाएगा।मैं तैयार होकर सोनाली को लाने निकल गया और ट्रेन आने से पहले ही स्टेशन पहुँच कर उसका इन्तजार करने लगा।जैसे ही वो ट्रेन से उतरी. बीपी एक्स एक्स एक्स मूवीऔर उसकी बुर को सहलाने लगा।फिर मैंने अपनी पैन्ट निकाली और उसकी चूचियों को मस्ती से दबाने लगा। वो भी जोश में आ गई थी। उसकी चड्डी के ऊपर से मैं उसकी चूत सहलाने लगा। अब हम दोनों चुदास के कारण बेकाबू हो गए थे।मैंने उससे कहा- चल. पर कभी चुदाई की बातें नहीं की हैं।मैंने कहा- अच्छा कितना ओपन हो?माँ मेरे लंड को सहलाते हुए बोलीं- पहले तो सिर्फ़ एमसी के समय पैड लगाने तक.

जो मोटी भी लग रही थी।नयना- क्या तय किया इसने? यह ले, सबसे लंबी वाली लाई हूँ।मैं- मैं मेरी गाण्ड मारने का विकल्प लेने को तैयार हूँ।नयना- ठीक है.

मैं उसको गोद में उठा कर बाथरूम में गया।हम दोनों फ्रेश हुए और कपड़े पहन कर रेडी हो गए तो वो फिर बोली- मुझे गोद में ही ले चलो ना नीचे. तो मैंने थोड़ा रुक कर उसके चूतड़ों को हाथों से फैलाते हुए फिर से लंड अन्दर डालना शुरू किया।पर पता नहीं क्यों मेरे लंड में जलन सी होने लगी. उसकी आँखों में अजीब सा इशारा था। अभी मैं कुछ सोचता कि अचानक ही उसने मुझे आँख मार दी।मैं बस देखता ही रह गया.

जो बिल्कुल चिकनी थी। अब मैं एक उंगली बुर के अन्दर डाल कर हिलाने लगा जिससे भाभी ने मेरे लंड को और कस के पकड़ लिया।मैं भाभी का मम्मा भी पी रहा था और साथ नीचे चूत में उंगली भी कर रहा था।भाभी तो जैसे पागल हो उठी थी. मैं अक्सर उनके नाम की मुठ्ठ भी मार लिया करता था।एक दिन उनकी माँ ने मुझसे कहा- बेटा तुम्हारे पास लैपटॉप तो है ही. मैं अभी ढूँढ कर दे सकता हूँ।भाभी ने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए कहा- मेरी ब्रा-पैन्टी नहीं मिल रही है। मेरे पास दो ही जोड़े थे.

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जैसे कोई गन्ने को चूस रही हो।पुनीत ने मुनिया के सर को पकड़ लिया और लौड़े को ज़ोर-ज़ोर से झटके देने लगा। उसकी नसें फूलने लगी थीं। लौड़ा कभी भी लावा उगल सकता था।मुनिया की साँसें रुकने लगीं. धीरे से मेरा लंड अपने हाथ में लिया और उसे मुँह में ले कर चूसने लगीं।मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया. ये क्या है?वो हंसे मगर बोले कुछ नहीं और मेरा सर पकड़ कर अपने लन्ड पर रगड़ने लगे।मैंने जोर लगाने की कोशिश की.

दोनों आपस में काफी अच्छे दोस्त हैं। शादी के बाद भी मेरे उनसे शारीरिक सम्बन्ध हैं और मेरे मायके आने की बात उन्हें भी मालूम रहती थी।आज उनके लौड़े भी उछाल मार रहे थे। मैं जब भी यहाँ आती तो उनसे चुदने के लिए जरूर मिलती थी, आज भी उन्हीं का फ़ोन था।सुनील- कैसी हो मेरी जान!मैं- ठीक हूँ.

जो सब नहीं जानते थे।सबसे पहले उसने चुंबन लेने प्रारंभ किए। वह उसकी जीभ और ऊपर-नीचे के होंठों को चूसने लगा।वह उसके होंठों को पूरी तरह से जकड़ कर उसकी पूरी साँस अपने फेफड़ों में ले लेता.

ये बाबूजी बता रहे थे कि शहर में काम के बहुत पैसे मिलते हैं।रॉनी और पुनीत ने मुनिया की माँ को भी अपनी बातों में ले लिया।सरिता- बेटा तुम्हारा भला होगा. इसी दौरान मैं उसके साथ कुछ और सनसनीखेज बातें छेड़कर गद्दे के नीचे रखी अश्लील किताबें और कन्डोम उसके सामने निकालती और उसे प्रलोभित करके अपने वश में ले लेती और कामातुर होने पर मजबूर करने लगी थी। शर्म और लाज से वो पूरी तरह मेरे वश में हो गया था। मेरी जवान जिस्म को देख उसकी नीयत तो बदलेगी ही. हिजडा सेकसतब भी तुम्हारी ज़बरदस्ती में मुझे मजा तो आया। अब सुबहा टट्टी करते वक़्त जो हाल होगा उसका क्या होगा?और हम दोनों हंस दिए।‘तुम सच्ची में किसी भी औरत की रेल बना सकते हो।’फिर हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने।दोस्तो, कहानी मेरी सच्ची है.

उसकी कामुक आवाजों से मेरा कमरा गूँज उठा।मैं उसे तड़पा रहा था फिर मैंने उसकी बिना बाल वाली चूत में उंगली करना शुरू कर दिया।वो मजे से कराहने लगी- उउउईए. तो दोनों की रसोई में बातें करने की आवाजें भी मुझे आने लगीं।मैंने देखा कि फैजान जाहिरा को बाज़ू से पकड़ कर अपनी तरफ खींच रहा है लेकिन वो शरमाते हुए खुद को छुड़ा रही है।फैजान- अरे जाहिरा. भान्जे के साथ सेक्स करने से इस पाप को घर के अन्दर तक सीमित रख सकती हूँ। किसी को कुछ पता नहीं लगेगा। वैसे भी मैं सिर्फ़ सेक्स चाहती हूँ.

पर वो ब्रा खोल ही नहीं पा रहा था। मैंने उसकी मदद की और मेरे कबूतर बाहर फुदकने लगे।मतलब अब मेरे मोटे चूचे उसके सामने थे. वो मेरे हम प्याला हम निवाला बचपन के लंगोटिया यार रणविजय सिंह की इकलौती पुत्री है। रणविजय को गाँव में सब लोग राजा कह कर बुलाते हैं।मैं भी उसे राजा कह कर ही बुलाता हूँ।हाँ.

यह देख कर माँमेरे चूतड़ पर थप्पड़ मारते हुए बोलीं- यह क्या कर रहा है?मैं बोला- माँ, यह अपने आप हो गया है.

हमारी नजरें एक-दूसरे से मिल उठीं।उसे यह समझने में ज़रा भी वक्त नहीं लगा कि मैं उसका क्या देख रहा हूँ।वो जल्दी से बात करते-करते ही अन्दर चली गई और उसने दरवाजा बंद कर लिया।मैं भी अपने कमरे में वापस आया और मैंने बाल्कनी का दरवाजा बंद कर लिया।अब उसका क्लीवेज मेरी आँखों के सामने घूमने लगा।उसके टाइट टॉप की वजह से उसके उभार जिस तरह से सामने की ओर तने हुए दिख रहे थे. मेरा लंड आशू की चूत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था, आशू ने चूत को अपने दोनों हाथों से खोल दिया और मैंने धीरे से आशू की चूत में अपना लंबा लंड डालना शुरू कर दिया।काफी दिनों से आशू की चुदाई नहीं हुई थी. मगर उसकी साँसें तेज-तेज चल रही थीं।इधर पुनीत के लौड़े में दर्द होने लगा था क्योंकि वो बहुत टाइट हो गया था और वीर्य की कुछ बूँदें उसके सुपारे पर झलक रही थी। अब बस उसको किसी भी तरह चूत में जाना था.

सेक्सी xxx com मैंने उसको देखा कि साला फोन पर ही लगा हुआ था तो मैं उसके कमरे में गया।मैं- क्या कर रहा है साले?सूर्या- तेरी बहन को फोन पर चोद रहा हूँ अभी नंगी लाइन पर ही है. इसके लिए शुक्रिया।आप लोगों ने मेरी कहानी को सराहा और कई दोस्तों ने अपनी हालत को अपने खड़े लौड़े की फोटो के द्वारा व्यक्त भी किया। उसके लिए आप सबका दुबारा से बहुत-बहुत धन्यवाद।चलिए अब हम अपनी चुदैल गाड़ी को चुदाई की पटरी पर लेकर आते हैं और कहानी को आगे बढ़ाते हैं।जैसे कि पुराने भाग में मैंने आपको बताया था कि इन कमीने काले सांडों ने मुझे एक सेकंड के लिए भी अकेले नहीं छोड़ा.

मैं तेरे साथ चलती हूँ।मैंने मना कर दिया- वहाँ सिर्फ़ फ्रेंड्स को ही ले जाया जा सकता है।उसने कहा- किसी को क्या पता कि मैं कौन हूँ।मैं बोला- वहाँ ऐसे सूट में नहीं जाते हैं. मुझे नींद आ गई।जब मैं 2 बजे उठी तो मुझे बाथरूम जाना था।मैं जब बाथरूम जाने लगी तो भाभी के कमरे से मुझे कुछ आवाजें सुनाई दीं. पर फिर मुझे लगा कि सुमन चाची अपने पैरों से मेरे पैर को रगड़ रही हैं। मैंने सोचा कि शायद ये मेरा वहम है और मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया।लेकिन कुछ देर बाद ही चाची की पैर मेरे लंड तक पहुँच गए और उसे हिलाने लगीं। मेरा लंड अब खड़ा होने लगा था.

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दोनों सिसकारियाँ ले रहे थे।मैंने सोचा रंग में भंग डालने का यही सही टाइम है।मैं सामने से घूम कर अन्दर आ गया. मुझे अपने मायके जाने के लिए कुछ नहीं बोलती हैं और मैं यहाँ बहुत खुश हूँ।पति ने कुछ नहीं कहा तो मैंने धीरे से बोला- जी आपकी वजह से मुझे सेक्स की इतनी हवस चढ़ गई है कि हर दो दिन बाद सेक्स किए बिना नहीं रहा जाता है। वो भी आप ही के लण्ड से चुदने में मुझे मजा आता है। मैं बहुत ही ख़ुशनसीब हूँ. मेरे लौड़े के चूत में अन्दर जाते ही हम दोनों तो जैसे जन्नत में पहुँच गए।उसका पति हम दोनों के बाजू से अपनी वाइफ से चिपक गया।वो कामुक निगाहों से अपनी वाईफ को देखने लगा और उसकी वाईफ सिसकारियाँ लेते हुए बोली- दीप देखो ना विजय का लण्ड कैसे मेरी चूत में जा रहा है।तभी दीप बोला- हाँ डार्लिंग.

सोनिया अपने कमरे में कपड़े बदलने चली गई और मैंने भी सूर्या के कपड़े लेकर पहन लिए और उसके कमरे में चला गया।सोनिया- तुम यहाँ क्या कर रहे हो. जिससे वो और गर्म हो गई, अब वो मेरे लण्ड को चूत में लेने के लिए तैयार थी। मैं उसकी चूत की दरार पर अपने सुपारे को रगड़ने लगा और मैंने एक हल्का सा धक्का लगाया।लेकिन लण्ड अन्दर जाने की बजाय बाहर को फिसल गया।फिर मैंने उसकी चूत पर और अपने लण्ड पर थूक लगाया और दरार में फंसा कर लौड़े में एक जोरदार धक्का मारा.

तो उसने साफ़ मना कर दिया और मैंने ज्यादा जिद ना करते हुए उसको सीधा लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया।मैंने लौड़े पर स्ट्रॉबेरी फ्लेवर वाला कण्डोम लगाया और उसकी छोटी सी बेचैन सी फुद्दी पर फेरने लगा.

तो मैंने सोचा इतना अच्छा मौका है तो उसका फ़ायदा तो उठाना ही चाहिए।मैंने उसकी गर्दन कर हल्का सा किस कर दिया और किसी भी लड़की को अगर गर्दन पर किस किया जाए तो वो अन्दर से हिल जाती है. मेरे डैड भुवनेश्वर में एक बैंक में जॉब करते हैं। मेरी छोटी बहन अभी स्कूल में पढ़ रही है और मेरी मॉम एक हाउनवाइफ हैं।मेरी असली मॉम नहीं हैं बस यूँ समझ लीजिये कि इनको मेरी मॉम की जगह लाया गया था. मैं अपने ऑफिस में बैठ कर रोजाना अपना कामकाज किया करता था।मेरे ऑफिस के सामने ही एक दुकान थी और उसमें एक खूबसूरत लड़की काम किया करती थी.

वो बहुत ही कामुक लग रही थी मैंने जाकर सीधे उसको अपनी बाँहों में भर लिया।उसने जल्दी से दरवाजा बन्द कर दिया और एक-दूसरे से लग गए।मैंने उसके कपड़े उतारे. मैं पंजाब का एक जाट हूँ। मुझे हिंदी कम आती है।मैं 6 फुट 1 इंच लम्बाई का अच्छा ख़ासा गबरू जवान हूँ। मेरा 6 इंच का जवान मोटा लण्ड है। मैं थोड़ा पतला हूँ. उसकी गाण्ड से ले तक मैंने उसके हर हिस्से को खूब मसला और उसे चोद-चोद कर अपना माल बना डाला।वो पहली बार की इस चुदाई से कराह रही थी.

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सेक्सी बीएफ ब्लू इंग्लिश: सम्पादक – जूजा जीदोस्तो, यह कहानी पड़ोसी मुल्क से किसी पाठिका ने भेजी है जिसे मैंने सम्पादित किया है। इस कहानी को सीधे उसी पाठिका के माध्यम से आप सबकी नजर कर रहा हूँ. मैं एक अमीर घराने से हूँ और मेरी शादी को चार साल हो चुके हैं। शादी से पहले भी मैं दो-तीन बार चुदाई कर चुकी हूँ.

तभी चुदाई का असली मजा आता है।इसलिए मैंने प्लान बनाया कि क्यों ना किसी प्लेब्वॉय से चुदवाया जाए। मैंने सुना था कि रात के 11 बजे हाइवे पर अक्सर प्लेब्वॉय खड़े रहते हैं। तो एक दिन मैंने घर पर बहाना किया कि मैं अपनी पुरानी फ्रेंड की बर्थडे पार्टी में जा रही हूँ. फिर मैंने उनको डॉगी स्टाइल में आने को बोला और वो कुतिया बन गई। वो इतनी सेक्सी लग रही थी और साली पोज़ भी ऐसे दे रही थी कि जैसे उसकी चूत खुद बोल रही हो कि आ जा अपना लंड मुझमें डाल दो।बस मैंने अपना लंड चूत के छेद पर सैट किया और एक तगड़ा शॉट मारा. इसलिए मैं कभी-कभी उसके नाम की मुठ्ठ मारने लगा।एक दिन उसने जो मुझे बताया मुझे विश्वास नहीं हुआ। उसी के शब्दों में लिख रहा हूँ।वो- मनु तुमसे मुझे एक बात कहनी है।मैं- कहो.

उस दिन हम लोगों ने क्या-क्या किया और किस तरह उन लोगों ने फिर से मुझे सता कर मेरा अपमान किया और कैसे अपनी आग बुझाई.

जब मैंने पहली बार सेक्स किया था, तब मैं पढ़ता था।मेरे घर के पास एक लड़की रहती है जिसका नाम संध्या है। देखने में वो थोड़ी सांवली है. गुड़िया- फ़िर ये डीवीडी तेरी अलमारी में क्या कर रही थी?उसने एक XXX डीवीडी दिखाई।मैं डर गया और अपनी गरदन नीचे झुका ली।फिर वो मेरे पास आई और बोली- अरे तू तो शरमा गया. जिसका अहसास मुनिया के साथ-साथ पुनीत को भी हो गया था। अब उसकी नज़र मुनिया की कच्ची चूत पर टिक गई थी।अरे नहीं नहीं.