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पकौड़े की तरह फूले फांकों के बीच दो-ढाई इंच की दरार थी जो पानी के लहरों के साथ हिलकर अजीब सा रोमांच पैदा कर रही थी। मैंने नितम्बों को पकड़कर अपनी जीभ की नोक बनाकर धीरे से उस दरार में फिराया… उसके नितम्बों में एक कम्पन सी हुई और टांगें और चौड़ी हो गई जैसे निमंत्रण दे रही हों।मैंने जीभ अंदर गुसेड़ा और भग्नासा को कुरेदने लगा… वो चूतड़ों को आगे-पीछे करने लगी. हिंदी में ब्लू फिल्म वीडियो में सेक्सीअब राजू ने छमक छल्लो को चुच्चियों से पकड़ कर ठप्पे पे ठप्पे मारने आरम्भ किये, तो रीटा की ठरक सातवें आसमान पर और मस्ती अंतिम छोर तक पहुँच गई.

मैंने उसके टोपे की चमड़ी को नीचे किया तो उसका गुलाबी सुपारा ऐसे चमकने लगा जैसे कोई मशरूम हो !मैंने झट से उसका सुपारा अपने मुँह में भर लिया, मैं उकड़ू बैठ गई और ज़ोर ज़ोर से उसके लण्ड को चूसने लगी।वो तो आ. बच्चा कैसा पैदा होतामैं उसे लिपस्टिक की तरह होठों पे लगा रही थी।इतने में उसने भी अपने हाथों से मेरी गांड सहलाना शुरू किया… वो अपने दोनों हाथों से मेरी दोनों गोलाईयां सहला रहा था… मुझे इतना मजा नहीं आ रहा था क्यूँकि वो नाईटी के ऊपर से मेरी गांड को सहला रहा था.

ये सब करते करते और गुदगुदे बिस्तर पर नंगी हो लुढ़कियाँ लगाते लगाते रीटा को अपने अंग ही चुभने लगते थे.हिंदी बीएफ मोटी औरत की: कम से कम मैंने अपना सब उसे सौंपा, जिससे मैं प्रेम करती हूँ और जो मुझ से प्रेम करता है.

मुकेश अब मेरी चूत में लौड़ा घुसाने लगा लेकिन लौड़ा अन्दर नहीं जा रहा था, वो बार बार चूत के मुँह पर लौड़ा टिकाता और जोर से धक्का मारने की कोशिश करता लेकिन मेरी चूत छोटी होने के कारण लौड़ा बार बार फिसल जाता.। क्या बताऊँ दोस्तो, उनकी नर्म-नर्म उँगलियाँ ऐसा जादू कर रहीं थी कि मुझे वैसी अनुभूति तब तक कभी भी किसी भी लड़की या औरत से नहीं मिली थी। जब तक मैंने उनके बदन को पौंछ कर सुखाया तब तक वो फिर से पूरी तरह से जोश में आ चुकीं थी….

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बस सबसे पहले तो उसके मोटे मोटे मोमों को दबाने लगा फिर एक एक को मुँह में ले कर बारी बारी से चूसने लगा.’उसके बात सुनते ही मैंने सोचा कि ऐसे लंड का पानी तो चूत की जगह मुंह में लेना चाहिए.

तुम्हारा क्या हाल है ?मैं तो अपनी मुनिया को हरदम टिच्च कर के रखती हूँ, आज ही सुबह साफ़ किये हैं, बिल्कुल चिकनी चकाचक है इस समय ! काश कोई चूस ले !मेरे पास आ जाओ ना ?धत्त. हिंदी बीएफ मोटी औरत की मैंने उसका पूरा नमकीन पानी चाट कर साफ किया तब अमिता कहने लगी- क्यों तड़पा रहे हो? अब मुझे चोद दो!तो मैंने शालू से कहा- इसके मुँह पर अपनी चूत रख दो.

फिर मैंने चित्रा को अपनी बाहों में समेटा और उसे बिस्तर पर लिटा दिया और जीभ से उसकी चूत चाटने लगा वो तो जैसे पागल हो उठी.

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’मेरी बात सुनकर राजू ने अपने कपड़े खोलना चालू कर दिया लेकिन दीपू मेरी चूत का दीवाना हो गया था और चूत छोड़ने के लिए राजी नहीं था. ‘अरे मैंने सोचा तुम्हें लग जायेगी, लगता है अब चूत को बढ़िया पिटाई चाहिये!’ जीजू हंस पड़ा. हफ्तों से लण्ड के लिये तरसी रीटा ने बहादुर को अपनी गोरी गुदाज़ बाहों में लेकर बहादुर के कन्धे पर अपने दांत गड़ा कर खून निकाल दिया तो पीड़ा से बिलबिला कर और तैश में आकर बहादुर ने अपने एक हाथ से रीटा के फूल से दोनों हाथों को जबरदस्ती पकड़ लिया और अपने डण्डे से अकड़े लण्ड से रीटा के चेहरे को फटाक फटाक से पीट कर, रीटा का चेहरा गुलाबी कर दिया.

उसका एक हाथ मेरे सर पर था, वो मुझे ऐसे दबा रही थी कि मानो कह रही हो- मेरी चूत में घुस जाओ!इतनी कामुक लड़की मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखी!मैं कोमल के ऊपर आ गया. अन्तिम समय में बहादुर ने सांस रोक कर गाड़ी फुल स्पीड पर छोड़ दी- छकाछक! छकाछक! फिर चरम सीमा पर पहुँच कर बहादुर का लण्ड और भी फूल गया और भचाक भचाक से गर्म पानी के रेले छोड़ने लगा. ”और कहा,” धीरे धीरे चोदो बेटा, मंहगाई का ज़माना है, इस २ इंच की चूत को जिंदगी भर चलाना है !”कुछ ही देर में चाची ने बाहर निकाल दिया और कहा,”तू नीचे लेट जा….

मैंने धीरे से ज्योति के कमरे का दरवाजा खोल दिया, अंदर का नजारा देख कर मेरे अन्तर्वासना जागृत हो गई क्योंकि ज्योति अपने बिस्तर पर सिर्फ ब्रा-पेंटी में सो रही थी जिसे देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया मगर मैंने अपने ऊपर काबू करते हुए वहाँ से चल दिया और योगी के कमरे में आकर सो गया. वी पर स्टार माक्स पर एक इंग्लिश मूवी आ रही थी उसमें हीरो हिरोइन को चूम रहा था। तभी भाभी आ गई, उनको देख कर मैंने एकदम टी. झांक कर देखा तो मौसी सिर्फ चोली पहने हुई थी, नीचे बिलकुल नंगी टिन के संदूक के ऊपर जांघें फैलाए बैठी थी … वो बार बार एक लकड़ी के डंडे को अपनी योनि में अन्दर-बाहर कर रही थी … वो उस डण्डे को बार बार पास रखे तेल भरे डिब्बे में डुबो रही थी …मैं : मौसी, यह क्या कर रही है ?मौसी बिलकुल पसीने पसीने थी….

मैंने कहा- हाँ, यह ठीक रहेगा !फिर हम काफी देर तक एक दूसरे की गर्दन में बाहें डालकर चिपककर बैठे रहे। तब तक 5 बज चुके थे. मेरी टांगों के नीचे आकर पहले तो उसने आठ दस बार मेरी चूत को चाटा…शीशे में देखते हुये अजीब सा लग रहा था.

हाय राम! इतना मोटा! इतना लम्बा… मैंने उसे पकड़ कर उसका जायजा लिया और झटके से छोड़ दिया.

तभी मुझे उसके हाथ पर एक काला दाग दिखा, मैंने उसका झट से हाथ पकड़ कर पूछा- यह दाग कैसा है?वो उसके बारे में बताने लगी और मैंने उसका हाथ पकड़े रखा, और मैं हल्का हल्का मसल रहा था, बातों-बातों में मैं उसके करीब जा रहा था धीरे धीरे.

?मैं अपना हाथ छुडाने की कोशिश करते हुए बोली- मैं बुरा नहीं मानूंगी… लेकिन मेरा हाथ तो छोड़ो!इस तरह यह पहला वाकया था जब किसी लड़के ने मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश की थी, कोशिश क्या पकड़ ही लिया था…वो: नहीं पहले आप वचन दो कि बुरा नहीं मानोगी…मैंने परेशान होकर कहा- हाँ बाबा, मैं बुरा नहीं मानूंगी, तुम मुझसे जो कहना चाहते हो वो कह सकते हो लेकिन मेरा हाथ छोडो. मेरा इतना बुरा हाल था कि अब मुझसे खड़ा होना भी मुशकिल लग रहा था। मैं वहीं पर लेट गई। हम सभी नंगे ही एक ही बिस्तर में सो गये। फिर अचानक मेरी आँख खुली और मैंने समय देखा तो 3 बजे थे. मैं खुद जीजू से लिपटने लगी, उनकी शर्ट उतारी, फिर उनकी जींस का बटन खोला और नीचे सरका दी.

। ई इ इ ‘ निकल गया।‘क्या हुआ ?’‘ओहो, देखो तुमने मेरी क्या हालत कर दी है अब मुझे उठा कर बाथरूम तक तो ले चलो !’‘ओह हाँ. राजू ने कड़ियल लण्ड को बाहर खींच कर वापिस रीटा की चूत में पूरे वेग से वापिस धकेल दिया. वो बाइक के पीछे बैठी, वो दोनों पैर एक तरफ करके बैठी लेकिन मैंने उसे लड़कों के जैसे बैठने के लिए कहा.

पता नहीं मेरे मन में चोर अपने आप में ही भयभीत हो उठा… कहीं किसी को पता लग गया तो… कहीं अंकल या मम्मी पापा ने देख लिया तो.

थोडी देर तक उसका लंड चूसने के बाद उसने अपना लंड मेरे मुंह में से निकाल लिया और मुझसे बोला. ’मैंने खड़े होते हुए उससे हाथ मिलाया और पुराने वाले से बोली ‘ये तो ठीक है पर तुमने अभी तक अपना नाम तो बताया ही नहीं. मेरा मन खराब हो गया गया… मैं देवर के साथ जबरदस्ती वाले अन्दाज में अपने आप को छुड़ाते हुये चिल्ला चिल्ला कर चुदवाना चाहती थी.

हरामी रीटा मासूमीयत से बोली- बहादुर, मुझे अकेले जाते तो बहुत डर लगता है, तुम साथ आ जाओ नाऽऽऽ!यह सुन कर ठरकी बहादुर के लण्ड की बांछें खिल गई और वह रीटा के पीछे कुते सा दुम हिलाता चल पड़ा. ज्योति बहुत जोर से चिल्ला उठी शायद अनिल का लण्ड मुझसे छोटा था इसलिए ज्योति को ज्यादा दर्द हुआ. तो कविता बोली- तो उसमें क्या है सुहास ! अभी तक तो तूने हम तीनों से ऊपरी-ऊपरी मज़े लिए, अब सच में इस नये खेल का हम आनंद उठाते हैं….

दीदी के बॉस बहुत ज्यादा घबराए हुए थे शायद उन्हे यह नहीं पता था कि यह चुदाई का कार्यक्रम मैं और स्वाति पहले ही खेल चुके हैं.

उसने मुझे अपनी छाती से लगाते हुए कहा- तुमने आज मुझे इतना आनन्द दिया कि मैं तुम्हारा एहसान कभी नहीं भूल सकती, अब मैं तुम्हारी हो चुकी हूँ. उसने मेरे शरीर को नोचना और दबाना चालू कर दिया और और अपने होंठों को मेरे चेहरे पर बुरी तरह रगड़ने लगी.

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हिंदी बीएफ मोटी औरत की शुरुआत में दोनों को एक अजीब सी झिझक होगी। लड़की को खास तौर से काफी संकोच और असमंजस हो सकता है …. मामी, मैं निकलता हूँ! आपने आज मेरा सपना पूरा कर दिया! अब मैं आप से दोबारा कुछ नहीं मांगूंगा!”नयन भले ही तुम मुझे दोबारा कुछ नहीं मांगो, लेकिन तुमने आज जो ख़ुशी मुझे दी है, अब मैं तुमसे रोज तुम्हारा लंड मांगूंगी! तो फिर नयन कल दोपहर को आओगे ना? मैं तुम्हारा इंतजार करुँगी.

नेहा ने अपनी उंगली मेरे लंड की गर्दन पे (जहां सुपाड़ा खत्म होता है और लंड का दंड शुरू होता है) फ़िराना शुरू कर दिया….

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चाचा का उपहार-1तभी चाचा ने दरवाज़ा खटखटाया तो चाची एकदम मुझसे अलग होकर खड़ी हो गई।चाचा आकर हमारे पास बैठ गया और बोला- बेटा राज… हमारे माल पर ही हाथ साफ़ करने का इरादा है क्या…? यह मत भूलो बेटा कि यह तुम्हारी चाची है. थोड़ी देर में जब वो कुछ सामान्य हुई तो मैंने धीरे धक्के लगाने शुरू किये …कुछ ही देर में उसको भी मज़ा आने लगा …. बहुत देर तक रानी की चूत का मजा ले कर मैंने सोचा और रानी को अपने मूसल लंड का मजा भी दे दिया जाये…मैं पलटा और अपने लंड को रानी के मुँह के सामने ले गया… बस फिर क्या था, खूंखार शेरनी की तरह रानी ने फ़ौरन मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी.

कतरा…कतरा… एक मादा के आगोश में… एक ऐसे खुमार में जो उम्र और रिश्तों की हदों से परे था… सिर्फ उनके एक मदमस्त मादा होने का…आप अपनी राय मुझे भेज सकते हैं।[emailprotected]. वो दर्द से पागल हो गई, बोली- निकालो ! बाहर करो ! मैं नहीं सह पाऊँगी !पर अब मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने कविता की कमर से पकड़ कर पूरे जोर से एक धक्का मारा और लंड उसकी चूत की गहराइयों को छू गया……वो दर्द से रोने लगी पर मैं धीरे धक्के लगाने लगा। थोड़ी देर में कविता को भी मजा आने लगा, उसके मुँह से आवाज निकलने लगी थी- चोदो…. हम दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे और चुम्बन प्रगाढ़ होता चला गया। वो मेरी गोद में ही बैठी रही और हम दोनों एक-दूसरे को करीब दस मिनट तक लगातार चूमते-चाटते रहे.

अन्तर्वासना के पाठकों को मेरा नमस्कार और ढेर सारा प्यार! कहानी के बारे में जानने के लिए कहानी के पिछले भाग जरूर पढ़िए, मैं उम्मीद करता हूँ कि आप मित्रों और लड़कियों को मेरी कहानी जरूर पसंद आएगी.

थोड़ी देर में किसी ने मुझे पीछे से आवाज लगाई, मैंने मुड़ कर देखा तो वो चित्रा थी, वो बोली- मैं कैसी लग रही हूँ?चित्रा सिर्फ ब्रा-पेंटी पहने थे और वो किसी परी से कम नहीं लग रही थी. उसने फिर से मेरे बदन को अपनी बांहों में ले लिया… मैं भी उसकी बांहों में सिमट गई… उसका बड़ा सा लण्ड मेरी जांघों के साथ टकरा रहा था जैसे मुझे बुला रहा हो कि आओ मुझे अपने नाजुक होंठों में भर लो…वो मजदूर अपनी टाँगें फैला कर चारपाई पर बैठ गया, मैं उसके सामने अपने घुटनों के बल जमीन पर बैठ गई. इसका कारण ये था कि मेरी माहवारी ख़तम हुए अभी एक ही दिन बीता था और जैसा कि आप सब लोग जानते हैं ऐसे दिनों में चूत की प्यास कितनी बढ़ जाती है.

उसकी चूचियाँ एकदम झक्कस थी…मैं उसकी चूचियों को दबा रहा था, उसकी सेक्स करने की इच्छा बढ़ती जा रही थी क्योंकि वो अपनी उंगली बार बार चूत में डालने की कोशिश कर रही थी. दीदी का बॉस श्यामलाल और कंपनी का मैंनेजर अब्दुल दोनों मेरी बहन को बड़ी बेदर्दी से चोद रहे थे और मैं कुछ नहीं कर पा रहा था. मैंने अंडरवीयर पहना हुआ था जिसमें से मेरा लंड बाहर झांक रहा था, मेरे लंड का टोपा बाहर निकल रहा था।रीना घुटने के बल बैठ गई और मेरे बाहर निकले टोपे को देखने लगी।अचानक ही उसने अपनी जीभ टोपे पर रख दी और मेरा टोपा चाटने लगी.

ऊऊ म्मम्ममवो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसके चुचूकों के साथ खेल रहा था।फिर मैंने उसकी गीली चड्डी देखी तो मैं भी उसकी चड्डी के ऊपर से ही उसको सहलाने और दबाने लगा। फिर वो रुक गई और मैं उसकी चूत को चाटने लगा, कभी-कभी उसकी फाकों को अपने दांतों के बीच लेकर काट भी देता जिससे उसकी सिसकी निकल जाती. बूब्स गोरे से लाल होने चले थे…अब लण्ड को चूत पर पटकते हुए मैंने उसके बाएँ स्तन को मुँह में ले लिया चूसने लगा और दूसरे हाथ से दायाँ स्तन मसलने लगा.

रास्ते में बहादुर ने इशारा करके बताया कि वो उस का घर है, तो रीटा के दिमाग में बिजली सा विचार आया. बहुत ही प्यार से बोली- ये मेरे लिये हैं? सच में ?मैंने कहा- हाँ !फिर मैंने उसका हाथ अपने हाथो में लेकर कहा- एक डांस हो जाए. कमरे में पहुँच कर मुझे अपने ऊपर अफ़सोस हो रहा था क्योंकि भाभी की हाँ के बावजूद मैं उन्हें चोद नहीं पाया.

सुनील- अच्छा बाबा, जैसे तुम ठीक समझो … कम से कम मेरे फ्लॅट में जाने में तो तुमको कोई दिक्कत नहीं है … या वहाँ के लिए भी कोई बहाना सोच कर रखा हुआ है?सोनिया- तुम्हारा फ्लॅट!सुनील- हाँ मेरा फ्लॅट, अब ज्यादा आना-कानी मत करो … चुपचाप चलो अगर नहीं डरती इन चीज़ों से तो ! और अगर डरती हो तो तुम यहीं रहो … पर काम के सिलसिले में जिंदगी में किसी भी तरह की आगे कोई मेरे से मदद की उम्मीद मत करना.

फिर बस धीरे से होठों से छूता हूँ।दो हिस्सों में फटी मांसल स्पंज, जिसके बीच की फाँक को मैं कंधों से उसकी जांघों को फैलाकर चौड़ा करता हूँ, दोनों फूले होंठ, होठों के बीच झिल्ली-सा तना कपड़ा, जिस पर मैं मुँह गड़ा देता हूँ। भीतर से छनकर उसका रस आता है… स्वादहीन सा… तीखा… जीभ नहीं, किसी और इंद्रिय पर बरसता… भीतर सोए जानवर की प्यास बढ़ाता।उफ्फ… उफ्फ… क्या कर रहे हो…. हे भगवान्! मेरे मुँह से तो सिसकारी ही निकल गई, आज से पहले मैंने अनीता दीदी को इतना खूबसूरत नहीं समझा था. तब बहादुर ने रीटा की फड़कती फुदकती और उछलती चूत में एक झटके से अपना लण्ड ठोक दिया तो बेचारी रीटा की अपनी सुधबुध खो बैठी.

अपने सभी छेदों में लंड डलवाने के बाद मैं जल्दी ही अपने चरम पर पहुँच गई और मेरे मुंह से फिर ना जाने क्या क्या निकलने लगा. मैं वो देख ही रहा था कि सोनम ने बीच में ही मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे एक तरफ़ चलने को बोला.

मेरा दिल कर रहा है कि कोई मेरे इस जिस्म को अपनी मज़बूत बाँहों में लेकर इसे खूब ज़ोर से दबाए इसी निचोड़ डाले और मैं अपनी जवानी का मजा उसके जिस्म को दूँ. मैं अपनी पैंटी और ब्रा भी हटाई, मेरी फुद्दी और कांख के बाल देख वो नाराज़ हो गया !उसने तुरंत अपने बार्बर से शेव करवाया … और दो लोग अच्छे से मुझे मालिश कर रहे थे …. फिर आंटी ने कहा- तुम लेट जाओ!आंटी मेरे ऊपर आ गई और मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी और लंड के ऊपर बैठ कर ऊपर-नीचे होने लगी.

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आज मैं आपको एक और जोरदार चुदाई का किस्सा सुनाने जा रही हूँ पहले की तरह ये भी मेरी निजी लाइफ का एक किस्सा है. क्या करूँ? हूँ तो लड़का ही ना सबकी नज़र में!वहाँ बाथरूम में मैंने अपने उतार कर ब्रा और पेंटी पहन ली. क्योंकि अंदर से दरवाजा बंद था इसलिए मुझे किसी का डर नहीं था, मैंने अपनी पैंट की ज़िप खोलते हुए अपना लण्ड प्रिया भाभी की तरफ किया और एक बार चूसने को बोला.

दर असल मेरे साथ पढ़ती थी !’‘फिर?’‘मैंने पढ़ाई छोड़ दी !’‘हम्म !!’‘अब वो मेरे साथ बात नहीं करती !’‘तुम्हारी इस हरकत का उसे पता चल गया तो और भी नाराज़ होगी !’‘उसे कैसे पता चलेगा?’‘क्या तुम्हें उसके नाम लिखी जगह पर सू सू करने में मज़ा आता है?’‘हाँ… ओह. उसके सीधे होते ही उसका लण्ड सीधा खड़ा हुआ, बिल्कुल नंगा, मदमस्त सा, सुन्दर, गुलाबी सा जैसे मुझे चिढ़ा रहा हो, मुझे मजा आ गया. सुंदर लड़कियों की सेक्सीहफ्तों से लण्ड के लिये तरसी रीटा ने बहादुर को अपनी गोरी गुदाज़ बाहों में लेकर बहादुर के कन्धे पर अपने दांत गड़ा कर खून निकाल दिया तो पीड़ा से बिलबिला कर और तैश में आकर बहादुर ने अपने एक हाथ से रीटा के फूल से दोनों हाथों को जबरदस्ती पकड़ लिया और अपने डण्डे से अकड़े लण्ड से रीटा के चेहरे को फटाक फटाक से पीट कर, रीटा का चेहरा गुलाबी कर दिया.

अन्तर्वासना के पाठकों को एक बार फिर से मेरा प्यार और नमस्कार! अपने बारे में ज्यादा ना बताते हुए क्योंकि कहानी के पहले भाग में मैं अपने बारे में बता चुका हूँ, मैं अपनी कहानी आगे बढ़ाता हूँ. ‘हाय रे मेरे राजा… मेरा तो निकाला रे… मैं तो गई… आह्ह्ह्ह्ह्ह’ और सोनू की चूत ने पानी छोड़ दिया.

मैंने सोचा अगर अब कुछ करेंगी तो अबकी पक्का मैं भी नहीं छोड़ूँगा, भूल जाऊँगा कि वो मेरे दोस्त की माँ हैं, अगर इन्हें कुछ शर्म नहीं है तो मैं क्यों करूं. स्तन चूसते चूसते ही मैंने उसकी स्कर्ट का हुक भी खोल दिया और उसकी स्कर्ट उसके जिस्म से अलग कर दी. कक्षा में भी मेरा ध्यान वहीं था वेदांत पर…!!! जाने आज वो क्या कर बैठेगा… कहीं अनिरुद्ध को मार ही ना डाले…!!!छुट्टी के समय मैं कॉलेज़ के द्वार पर खड़ी उसका इंतज़ार कर रही थी… कि तभी छात्रों की निकलती भीड़ में से एक लड़का जोर से भागता हुआ बाहर निकला… वो अनिरुद्ध था….

‘नहीं, कोई बात नहीं… मन की आग थी… निकल गई!’उसने नजर नीची करके कहा- अभी जाना नहीं, मैं चाय बना कर लाती हूँ… मेरे पास कुछ देर बैठना…’वो चाय बनाने चली गई. अन्तर्वासना के पाठकों को एक बार फिर से मेरा प्यार और नमस्कार! काफी मित्रों के ढेरों संदेश मिले, आप लोगों को मेरी जीवन की कहानी इतनी अच्छी लगेगी, मैंने सोचा भी नहीं था. मेरा नाम पुनीत है मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ, उम्र 24 साल है और दिखने में भी अच्छा हूँ। लंबाई 5 फुट 8 इंच है, मेरा लंड 6 इंच लम्बा है और 2.

तो उसने कहा कुछ नहीं मगर प्यार से मुझे पप्पी दे दी……अब क्या था ! हो गई बल्ले बल्ले…….

उसके बाद जब हम केबिन में कपड़े ठीक करने गए तो सब कपड़े निकाल कर मेरे ही सोफे पर बैठ कर मुझसे अपने घोड़े की सैर करवाई … रात भर हुई चुदाई के बाद हम दोनों को इसका चस्का लग गया।अब तो हर देर रात हमारी दिवाली थी. वो मेरे पापा के सामने कम आते थे पर पापा के चले जाने के बाद अंकल एक न एक बार जरूर आते थे.

मन तो कह रहा था प्यारी सी कोमल को चोद डालूँ…ना पापा… ऐसा क्यों सोच रहे हैं आप? नहीं… अब मैं एक सम्पूर्ण औरत हूँ और आप एक सम्पूर्ण मर्द… हम वही कर रहे हैं जो एक मर्द और औरत के बीच में होता है. ”उनकी बातें छोडो, वो तो हैं ही बेवकूफ!” अनीता दीदी ने नेहा की ब्रा खोल दी और नेहा ने भी हाथ बढ़ा कर दीदी की ब्रा का हुक खोल दिया. अनुभवी बहादुर ने नन्ही रीटा की चूत की कसावट को देख कर उसकी चूत पर मुरगी का अण्डा फोड़ कर चूत को अच्छी तरह से चिकनी कर दिया.

वो अंकल की चुदाई का पूरा मजा ले रही थी और अंकल भी इतनी खूबसूरत औरत को जमकर चोदना चाहते थे. उनके हाथ मेरे सर पर थे और वो मेरे सर को दबा कर मेरा मुँह अपनी चूत के और पास ले जाने की कोशिश कर रही थी. मेरे हाथ तो उसके ब्लाउज के बटन खोल रहे थे। उसका हाथ मेरे हाथ पर था। लेकिन कोई हरकत नहीं थी.

हिंदी बीएफ मोटी औरत की विश्रांती- उल्टा पुल्टा ये क्या होता है रे?मैं- क्या विश्रांती! तू मुझसे पूछेगी तो कैसे चलेगा…. दीदी कुछ और बोलती इससे पहले मैंने उसका मुंह बंद करने के लिए अपने होंठ उनके होंठो पर रख दिये और टी-शर्ट के ऊपर से ही उनके चूचे मसलने लगा तो दीदी मचल उठी.

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उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया मगर वो मेरी बुआ की लड़की थी इसलिए मैंने अपने आप को रोक लिया और उससे कपड़े पहन कर आने के लिए कहा. और लंड को गांड से निकाला और एक ही धक्के में चूत के अन्दर डाल दिया फ़िर वैसे ही चूत से बाहर निकला और गांड में एक धक्के में अन्दर पूरा लंड डाल दिया. उसकी सिसकारियाँ मुझे और पागल कर रही थी और कभी कभी मैं उसके निप्पल चबा देता तो उससे उसके शरीर में सिहरन दौड़ जाती थी.

मनीषा ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद किया और मेरे बिस्तर पर आकर बैठ गई और हम दोनों बैठ कर बातें करने लगे. फिर प्यार से देखो… और अपने होंठ लगा कर इसे मदहोश कर दो… यह तुमको प्यार करने के लिए है… तुमको तकलीफ देने के लिए नहीं…मुझे भी इतना बड़ा लौड़ा देखने की इच्छा हो रही थी… मैंने उसके कच्छे को उतार दिया…कहानी जारी रहेगी।आपकी प्यारी सेक्सी कोमल भाभी[emailprotected]2230. प्यार करने की सेक्सीमैंने अपनी पैंट खोली और अपना लंड ले जाकर ज्योति के मुँह के पास ले गया तो ज्योति ने खुद ही उसे पकड़ा और चूसने लगी क्योंकि वो इस खेल में काफी माहिर खिलाड़ी थी तो वो सब कुछ जानती थी और काफी देर तक मेरा लण्ड चूसती रही.

पर उस काली रात को मैं रंगे हाथों मुखियाजी से पकड़ी गई … मुखिया जी के लोग ने मुझे एक अँधेरी काल कोठरी में बंद कर दिया … सुबह सभा बुलाई गई … मुझ पर रंडी होने का इलज़ाम लगाया गया ….

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं कैसे उसे ठीक करूँ…मुझे फिर वही तरकीब याद आ गई…उद्यान में सामने ही काँटों वाला पौधा था, उस पर गुलाबी रंग के फूल लगे थे…मैं फूल तोड़ने गई. खुले गले में से उफनते उरोजों की छोटी छोटी गुलाबी चुचकियाँ बहादुर की आँखों से लुका छिप्पी खेल रही थी.

राजू अब भी बुरी तरह से रीटा के होंटों के चबाये और चूसे जा रहा था और रीटा की चीखें गले में ही घुट कर रह गई थी और वो घूं घूं की आवाजें निकालने लगी. आगे क्या हुआ ???क्या उस दिन मैं पूरी तरह से औरत बन पाई?इसके बाद क्या हुआ जानने के लिए इंतज़ार करें अगले भाग का !!आपकी राय का इंतज़ार है !. फिर धीरे से वो मेरे और करीब आया…उसने अपने दूसरे हाथ की उंगलियों से मेरे होंठों तक आती जुल्फों को मेरे कान के पीछे कर दिया.

अंकल- देख बेटी तेरे ही तो सहपाठी है … एक्टिंग ही तो करनी है और कौन सा असली शो में तेरे कपड़े खुलेंगे.

दोस्तो, मैं उस दिन की हर घटना को सपना समझ रहा था। लेकिन दो दिन बाद ही रागिनी का फ़ोन आया कि आज बच्चे आज अपने मामा के घर गए है और पति भी टूर पर हैं तीन दिन के लिए, इसलिए ऑफिस से सीधे मेरे घर आ जाओ. पहले तो मैं नीचे दबी हुई इसका आनन्द उठाने लगी फिर खूब दब चुकी तो देखा कि उसका वीर्य निकल चुका था. उस दिन जब हम बिग बाज़ार में थे तो अचानक मेरी पत्नी की नज़र एक सुंदर सी औरत पर पड़ी और उसने आवाज़ लगाई- रागिनी!सुन कर उस औरत ने पीछे मुड़ कर देखा और मेरी बीवी को देख कर जोर से चिल्लाई- हाय संगीता.

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वहाँ एक नीग्रो एक गोरी लड़की के चूचे बेरहमी से खा रहा था और उसकी गाण्ड में लण्ड घुसाने की कोशिश कर रहा था. यामिनी कुणाल के जाने के बेड से उठकर अपने कपड़े पहनने लगी। वो मन ही मन में सोचने लगी कि उसने आज एक बड़ी खता की है मगर वो खता उसके लिए एक खूबसूरत खता थी जिसे वो चाहकर भी कभी नहीं भुला पाएगी।. !मेरा लंड जैसे सलामी मारता हुआ उनकी चूत के नीचे जा कर रूक गया। वो हाथों से मेरे लंड को सहलाने लगी और बड़बड़ाने लगी- मादरचोद, इतना मस्त लौड़ा है और तू घोंट-घोंट कर गिरा रहा है !अब मेरे से बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था, मैं आंटी से लिपट गया और अ.

अनीता दीदी को उदास देख कर नेहा ने उनके गालों पर एक चुम्मा लिया और कहा- उदास न हो दीदी, अगर मैं कुछ मदद कर सकूँ तो बोलो. फिर सुनील मेरी सर की तरफ आ गया और मेरी गोरी गोरी गालों और मेरे बालों में हाथ घुमाने लगा. उसने ज़ल्दी से कूपे का दरवाजा अन्दर से लॉक कर लिया और मेरी तरफ़ मुड कर बोला ‘ चिंता मत करो मैडम ये लोग भी अपने दोस्त हैं, अभी तुम्हारी इच्छा चूत में कुछ डलवाने की हो रही थी ना इसलिए इन लोगों को बुलवाया है.

अनीता दीदी के दो बच्चे थे पर कहीं से भी उन्हें देख कर ऐसा नहीं लगता था कि दो-दो बच्चों ने उनकी चूचियों से दूध पिया होगा…खैर, अब नेहा की बारी थी तो दीदी ने उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और साथ ही साथ उसकी पेंटी को भी उसके बदन से नीचे खिसकाने लगी. जिससे उसको आराम लगा तो मौका देख कर दूसरे और तीसरे तेज़ झटके में में पूरा 6 इंच से भी बड़ा लौड़ा उसकी चूत के अंदर कर दिया और उसकी गान्ड की गोलाइयों को मसलते हुवे उसकी जाँघ सहलाने लगा. मैं पहले भी कई बार दीदी के नाम की मुठ मार चुका था मगर मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी मस्त चूत का मैं कभी राजा बनूँगा.

इसके विपरीत गौरी बेशर्मी से मेरे सामने खड़ी हो कर अपनी चूत खोल कर अपनी दो अंगुलियों को चूत में डाल कर अन्दर-बाहर कर रही थी. फिर उन्होंने अपना तन्नाया हुआ लंबा लण्ड माँ की गाण्ड में टिका दिया और उनकी कमर पकड़ कर अपना लण्ड पीछे से अन्दर घुसाने लगे.

??उसकी सवाल करती नज़रें मेरे भीतर सूई सी गड़ी जा रहीं थी…मैंने एक साधारण सा जवाब दिया… ” कोई बात नहीं… होता है.

हम पंद्रह मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे फिर मैंने अपने होंठ फिर से चित्रा के होंठों पर रख दिये. தமிழ் செக்ஸ்ய் தமிழ் செக்ஸ்ய்मेरा लंडा मस्त तन कर खड़ा था। मुझसे रहा नहीं गया और मैं उठ कर टॉयलेट में चला गया और वहाँ मुठ मारने लगा।इस बात का पता भाभी को चल गया तो उसने तुरंत दरवाजे पर दस्तक दी. छत्तीसगढ़िया सेक्सी पिक्चर वीडियोफ़िर मैंने पढ़ाई की तरफ ध्यान देना ठीक समझा क्योंकि मेरा लास्ट सेमेस्टर था और पेपर भी आने वाले थे. जब मैं भाभी के कमरे के पास पहुँचा तो देखा कि भाभी के कमरे की बत्ती जल रही है और भाभी के अलावा किसी और की भी आवाज़ आ रही है मगर आवाज़ साफ़ ना होने कि वजह से मुझे समझ नहीं आया कि भाभी किससे बात कर रही है.

एक तो सीडी दूसरे की और कहीं माँ के हाथ में आ गया तो!मेरी चिन्ता मेरे चेहरे पर साफ नज़र आ रही थी और माँ जिस तरह मुझे घूर रही थी वो देख कर मुझे लग रहा था कि वो सीडी उनके हाथ लग गई है.

लेखिका : श्रेया अहूजाशाम के समय हर रोज मैं श्रेया, पीयू और निशा बायलोजी पढ़ने कालेज कैम्पस में ही सर के घर जाते थे।सर की उम्र करीब 30 साल थी और हमारी रही होगी अठारह उन्नीस … !पीयू सर पर लाइन मारती थी… कहती थी वो सर को प्यार करने लगी है।मैं और निशा उस पर हँसा करती थी. जब तक किसी लड़की की चुदाई नहीं होती, तब तक तो कोई बात नहीं, लेकिन लौड़ा खाने के बाद तो चूत हमेशा चाहती है कि कोई न कोई लौड़ा हमेशा उसमें घुसा रहे. मैंने अपना लंड उसकी गांड की दरार में रख दिया उसे अपने शरीर से चिपका कर उसके चूचे दबाने लगा.

मैंने उस लड़की को कई बार कालोनी में शाम को घूमते देखा था और कई बार उसको याद करके मुठ भी मारी थी. अच्छा चल, मैं बताता हूँ- उल्टा पुल्टा मतलब तू मेरे ऊपर रह कर मेरा लण्ड चूसना और मैं नीचे से तेरी चूत का रसपान करूँगा!विश्रांती- अच्छा तो तू 69 पोज़िशन की बात कर रहा है… अच्छा नाम है उल्टा पुल्टा… चल इसमें तो और भी मजा आएगा…फिर हम एक दूसरे से मज़े लेने लगे… विश्रांती की चूत का स्वाद आते ही मन चंगा तो आया था… विश्रांती की चूत काफी गीली हो गई थी…. उसकी बात सुन कर मुझे भी हंसी आ गई और फिर उसका विचार भी सही था इसलिए मैंने तुरंत हाँ कर दी।मैं भी इस फिराक में था कि लड़कियों के साथ रात में शायद कोई नज़ारा देखने को मिल जाए या फिर कोई जुगाड़ ही हो जाये.

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फिर उसने कहा- जांघों के बीच में खुजली सी हो रही है॥मैंने कहा- रुको, खुजली के लिए लकड़ी आ रही है. तो बोली- दस मिनट में मेरे घर आ जाना !मैं बोला- ठीक है ! आ जाउगा…फिर दस मिनट बाद मैं भाभी के घर पंहुचा और खूब चुदाई की …काफी दिन बाद सेक्स कर रहा था ना इसलिए बहुत शक्ति के साथ चोदा … मुस्कान (भाभी) ने भी अच्छा साथ दिया … मजा आ गया दोस्तो …भाभी ने फ़ोन करके अपनी बहन को बुला लिया …मैं बहुत खुश हुआ…मैंने आते ही उसे गले लगा लिया …. चाहती तो वो भी थी…उन्होंने पहले थोड़ा चाटा जीभ से, फ़िर होटों को खोला और लंड का सुपारा मुँह में लिया… मैंने देखा कि उनके छोटे मुँह में लंड नहीं जा रहा था.

भला कहीं आधे घंटे में कैसे याद होता?नकली गुस्सा दिखाते हुए विनोद ने उसके गाल पर थप्पड़ बढ़ाया क़ि नीना ने अपना चेहरा पीछे खींच लिया और विनोद का जोरदार हाथ नीना की चूचियों से जा टकराया.

मैंने देखा कि चूत पर एक भी बाल नहीं था शायद प्रिया ने अपनी चूत की ताजी-ताजी सफाई की थी.

अब मैंने भी आगे कदम उठाया और अंकिता को अपनी बाहों में जकड़ लिया।मै धीरे धीरे दीदी के गालों को चूमने लगा………. मैंने बोला- ऐसे नहीं ! इसको मुँह में लेकर लॉलीपोप की तरह चूसो, तब इसको अच्छा लगेगा. देसी सेक्सी व्हिडिओजमेरे लंड का फव्वारा मामी की चूत में खाली हो रहा था और मामी भी अपनी चूत के होंट दबा दबा कर मेरा पूरा लंड खाली करवा रही थी.

मेरे हाथ उसके चूचों को दबा रहे थे और मेरा लंड उसकी चूत में पिस्टन की तरह चल रहा था. फिर मैंने सोनम और योगी से पूछा- बाकी सब कहाँ हैं?तो योगी और सोनम ने बताया कि योगी के माता-पिता और योगी की बहनें गाँव चले गए हैं. मैंने कोशिश की लेकिन उसकी चूत इतनी तंग थी कि जा ही नहीं रहा था … 2-3 बार कोशिश करने के बाद भी नहीं गया तो वो बोली- जाओ, रसोई से तेल ले आओ….

इसीलिए मामा को ही बुला लिया। अब तो हम सब गोला बना कर भी एक दूसरे की गांड मार सकते हैं. तभी राज अंकल ने अपना मुँह चूची से हटा कर बाजी के मुँह पर लगा दिया जिससे उसके मुँह का दूध बाजी के मुँह में चला गया और बाजी उसके मुँह को अपने मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी.

वैसे भी श्यामलाल की तान्या के अलावा कोई और औलाद भी नहीं थी इसलिए कानूनी तौर पर उसकी सारी जायदाद पर भी मेरा अधिकार था.

मेरा भाई-भाभी भी जॉब पर चले जाते थे और घर में मैं और चित्रा बचते थे मगर फिर भी मेरी चित्रा से बात करने की हिम्मत नहीं होती थी क्योंकि तब मैं थोड़ा शर्मीला था. आगे मेरी ज़िंदगी में कैसे-कैसे मोड़ आए यह मैं अगली कहानी में बताऊँगा और आप मुझे मेल करके बताइये आपको यहाँ तक की मेरी कहानी कैसी लगी. कोमल ने मेरी वासना को और बाहर निकाला- पापा… मम्मी से दूर रहते हुए कितना समय हो गया…?बेटी, यही करीब 16-17 साल हो चुके हैं!”क्या?? इतना समय… साथ भी नहीं सोये…??”साथ सोये? हाथ भी नहीं लगाया…!”तभी…!”क्या तभी…?” मैंने आश्चर्य से पूछा.

भोजपुरी सेक्सी फोटो भेजो जैसे ही मैंने बाथरूम के दरवाजे को धकेला तो मैं अंदर का नजारा देखता ही रह गया, अंदर मनीषा नहा रही थी और उसने उस वक्त कुछ भी नहीं पहना हुआ था. बातचीत का विषय चलते चलते यहाँ तक आ पहुँचा कि अमित ( अमित अंकल कहना मैं छोड़ चुकी थी ) बोले- जिस दिन तुम्हारी चूत के गुलाबी होठों को खोलकर अपना लंड उस पर रखूँगा, तुम जन्नत में पहुँच जाओगी.

तनहा रीटा अपनी मासूम चूत की ठरक पूरा करने के लिये ना जाने क्या क्या अपनी चूत और गाण्ड में सटका चुकी थी- बैंगन, कमल-ककड़ी, हेयर ब्रश, हेयर ड्रायर, सैंडल, कोका-कोला की बोतल, मोमबत्ती, केला, घीया, खीरा, छल्ली, तौरी, कचालू, टेलीवीज़न रीमोट, टैलीफ़ोन का हैंडसेट, फ़्लॉवरपॉट, पैन और पैंसिल. इतने में दीदी दो बार झड़ गई, मैं भी झड़ने वाला था इसलिए मैंने धक्के मारना तेज़ कर दिया. नेहा ने अपने चूतड़ों के इस तरह आगे-पीछे हिलाना शुरू कर दिया मानो वो मेरी अंगुली नहीं मेरा लंड हो…मैंने सर उठाकर उसके मासूम चेहरे और उत्तेजना से बंद हुई आँखों को देखा….

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एक राठौड़ अंकल, दूसरे शर्मा अंकल, तीसरे सिंह अंकल और चौथे राणा अंकल ! सभी एक्स आर्मी मैन हैं।वो सभी मुझे मिले और सभी ने मुझे गले से लगाया. कई बार अलग अलग …मुझे मेल करके जरुर बताएँ कि आप लोगों को मेरी कहानी कैसी लगी ! मैं इन्तज़ार करुँगा …[emailprotected]. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा कभी करुँगी… मैं सच कह रही हूँ।’‘लेकिन अच्छा लगा ना?’‘हाँ, बहुत अच्छा.

अब मेरे जिस्म पर वो हक़ ज़माने लगा, कभी मेरे चूचे मसलता, कभी मेरे मुँह में हाथ डाल देता. फिर कब मिलोगे?मैंने कहा- तुमने मुझे पहला सेक्स अनुभव कराया है! तुम जब बोलोगी, मैं हाजिर हो जाऊँगा.

‘ये घने काले काले गेसू, ये काली कजरारी आँखें, गोरा रंग, पत्तियों जैसे अधर, सखी री तू तो नाम की नहीं, वास्तव में मोहिनी है!’‘चल मुई! बातें तो तुझसे करवा लो.

गया…क्या?’दीपू ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया और मुझे चोद रहे राजू के कान में आ कर कुछ बोला और कूपे से बाहर निकल गया. लेखिका : श्रेया अहूजाशाम के समय हर रोज मैं श्रेया, पीयू और निशा बायलोजी पढ़ने कालेज कैम्पस में ही सर के घर जाते थे।सर की उम्र करीब 30 साल थी और हमारी रही होगी अठारह उन्नीस … !पीयू सर पर लाइन मारती थी… कहती थी वो सर को प्यार करने लगी है।मैं और निशा उस पर हँसा करती थी. किसमिस का दाना तो मोटा और सुरमई है ?क्या चुसवाती हो ?अब तो यही करना पड़ता है !तुम कौन से आसन में चुदवाना पसंद करती हो ?ओह.

मैंने उसे मस्ती दिलाई।अब देर मत करो… प्लीज़ जल्दी डाल दो… चाट चाट कर गांड में खुजली कर दी है तुमने … प्लीज़ डालो ना. जीजू मुझे चूमने लगे, बोले- बहुत मजा दिया है तूने!मुझे भी अच्छा लगा जीजू!उसके बाद मैं वहाँ एक महीना रुकी और जब मौका मिलता हम एक हो जाते. जब हम अंदर पहुँचे तो दूसरे जोड़ों को देखकर भाभी शर्माने और हंसने लगी क्योंकि बाकी एक दूसरे को चूम रहे थे, मैं भी भाभी के मन की बात समझ गया और हम दोनों भी एक बेंच पर बैठ गए और फिर मैंने जबरदस्ती भाभी के होंठो पर होंठ रख दिए, कोई विरोध ना होता देख मैं ऊपर से ही उनके वक्ष मसलने लगा जिससे शायद भाभी थोड़ा गर्म हो गई थी और चुम्बन में मेरा साथ देने लगी.

आज की मेरी कहानी भी ऐसी ही एक शादीशुदा औरत की है जिसे चुदवाने की तो बड़ी इच्छा होती है लेकिन वो कभी किसी से भी बात नहीं कह सकी ….

हिंदी बीएफ मोटी औरत की: ब्रा पैडेड थी! उस वक़्त अगर कोई भी लड़का मुझे देख ले तो कोई नहीं कह सकता था कि मैं लड़की नहीं हूँ, एकदम गोरी-गोरी पतली लड़कियों जैसी टाँगे, एकदम पतली लड़कियों जैसी कमर, और कमर पर लाल रंग की ब्रा और नीचे गुलाबी पेंटी!उस वक़्त रात के बारह बज चुके थे. तब उसने कहा- संभल कर! मेरी चूत कुँवारी है… खून निकलेगा!मैंने फिर चूत के छेद पर अपना सुपारा रखकर एक धक्का मारा… उसे दर्द हो रहा था.

कभी दाना दबाता… मेरी फ़ांकें खोल कर उसमें गिटार बजाता…मैं बस अपनी आँखें बंद कर अपने जिस्म के मज़े ले रही थी…कि तभी वो मेरे ऊपर से हट गया…!!!” क्या हुआ. मैंने उठना चाहा लेकिन उसने मुझे अपने ऊपर खीच लिया और मेरे होंठों को अपने होठों से दबा कर चूसने लगी। थोड़ी देर तक हम दोनों इस प्यार भरे चुम्बन में लगे रहे लेकिन तभी…. उसके होंठों के ठीक ऊपर एक तिल था जो उसे और मादक बना देता था पर उस भोसड़ी वाले दुकानदार को यह चिड़िया कैसे मिली, यह सोच कर मेरा दिमाग गर्म हो जाता था.

मैं इसी उधेड़बुन में थी कि तभी वो आगे बढ़ा, उसने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और मेरे ऊपर चढ़कर.

हमारा रास्ता तो अब खुल चुका था… बस अब तो मात्र मौके की तलाश थी, मौका मिला और चुदवा लिया…मेरे और जीजू का प्यार बहुत दिनो तक चलता रहा. अंदर आ जाओ!मैं अंदर चला गया तो वो बोली- मम्मी थोड़ी देर के लिए बाहर गई हैं, अभी आती होगी. ओ मां… कितना मजा आ रहा था मैं यहाँ बयान नहीं कर सकती…जैसे ही उसका लण्ड मेरी चूत से बाहर आता.