महिलाओं की बीएफ

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पेशाब करती है: महिलाओं की बीएफ, ऐसा कहते हुए मैंने पूरा लंड चुत में पेल दिया और तेजी से अन्दर बाहर करने लगा.

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पहले तो काफी देर मैंने आंटी की गांड को बजाया, फिर खुद मैं ज़मीन पर लेट गया और आकृति आंटी को अपने लंड पर बिठा कर जन्नत की सैर कराने लगा. सेक्सी कहानीयापूरी 8 हुक खोल कर मैंने उसका ब्लाउज़ खोला तो अंदर सुर्ख लाल ब्रा में कैद उसके दो गोल और दूध से सफ़ेद मम्में मेरा मन ललचा गए.

पहले तो उसने पेमेंट के लिए मना किया मगर मैंने कहा- एकाध दिन की बात होती तो मैं भी नहीं कहता, पर ये तो रोज का मामला है, इसलिए आप मेरी बात मान लीजिएगा. बिहारी सेक्सी फिल्म वीडियोउन्होंने पूछा- क्या काम है?तो मैंने बताया- आंटी मैं रवि, आपके पड़ोस में नया नया रहने आया हूँ.

मैं इस समय अपने पूरे मूड में आ गई थी और सत्यम भी मुझे पूरी ताकत से चोदे जा रहा था.महिलाओं की बीएफ: मुझे सब पता है कि भैया मीनू को चोदते हैं।इतना कहना था कि मौसी ने मेरा लंड पकड़ लिया और मेरी लोअर के ऊपर से सहलाने लगी।मेरा लंड पहले से ही अकड़ा हुआ था.

उसी समय कुसुम को अपनी गांड पर कुछ अहसास हुआ, तो वो अचानक से घूम गई.इस तरह से चंचल की पर्पल ब्रा पैंटी को मैंने सफेद रंग की मलाई से सान दिया और साबुन से नहा कर बाहर आ गया.

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फिर मैंने पूरी ताकत लगा दी और एकदम से मेरा वीर्य निकल कर बाहर आने लगा तो मैं जाकिरा के ऊपर लेट गया और मैंने उसकी चूत में धक्के लगाते हुए अपना माल उसकी चूत में खाली कर दिया.वहां मैंने क्या देखा? साली को मैंने कैसे चोदा?अर्न्तवासना पर ये मेरी पहली काल्पनिक जीजा साली की चुदाई कहानी है.

इसमें कोई शक नहीं कि रीना उसके दिमाग में रहती है, मगर सारा से नशे में वो रीना कह गया और सारा ने कुछ नहीं कहा. महिलाओं की बीएफ अनीषा बोली- वो कैसे?मैं बोला- उसकी 2 बेटियां हैं और वो दोनों आपके ही काम आएंगी.

मैंने सोचता था कि इस लेडी की चूत मिल जाए तो …दोस्तो, मेरा नाम आकाश है और मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर का रहने वाला हूँ.

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मैं लंड चुत में पेल कर थोड़ा रूक गया और आराम आराम से अन्दर बाहर करने लगा. क्या तुम्हें इसमें कोई दिक्कत है?सारा एक एक दांव संभाल कर चल रही थी. मैं उनके पीछे पीछे उनकी गांड को देखते देखते अन्दर गया और पानी लेकर आ गया.

दोस्तो, आपको ये भाई ने बहन की गांड मारी कहानी कैसी लगी … प्लीज कमेंट करके जरूर बताएं. लेकिन मुझे इसी वीक पक्के में जाना है … अब चाहे कोई भी चले मेरे साथ … चाहे तो मम्मी ही चली चलें. वो उस वक्त 26 साल का था और दिखने में भी काफी हैंडसम था।मेरी और उसकी उम्र में बस 7 साल का फर्क था।समय यूं ही बीतता गया और हम दोनों की नजरें एक दूसरे को निहारती रहीं। अब वो मुझे देखकर मुस्कराता भी था और मैं भी उसे देख कर मुस्करा देती थी।मतलब ये कि अब आग जोर पकड़ चुकी थी.

मैंने उसकी कमर पकड़ कर लंड की तेज ठोकर मारी, तो वो गनगना उठी और मस्ती में बोल उठी- आह … आज असली मर्द का लौड़ा मिला है. वो फिर से गांड हिलाते हुए कहने लगी थी- आह … जीभ को और अन्दर डाल दो. सुबह जब वो दूध देने आता, तब सरिता भाबी जानबूझ कर दूध वाले के सामने रात की खुली हुई नाईटी में आती और झुक कर दूध लेती.

कुछ देर बाद वो दूसरे वाले अंकल कमरे में आ गए और तुरंत नंगे होकर मेरे ऊपर चढ़ कर मेरी चूत चोदने लगे. मैंने रिट्ज से पूछा- किसने लिया है?वो अपना मुँह बना कर बड़बड़ाते हुए बोली- आप तो ऐसे पूछ रहे हैं, जैसे दिला ही देंगे.

एक मिनट में वो मुझे एक रूम में ले गई और कमरे का दरवाजा बन्द कर दिया.

लेकिन उन मादरचोदों ने मेरी चूत के अन्दर माल छोड़ दिया था, जो मैं नहीं चाहती थी.

लंड तन कर घोड़ा हो गया, तो वो कहने लगीं कि ज्यादा समय नहीं है जानू, तुम जल्दी मेरी आग शांत कर दो. बहुत मुश्किल से उसकी गांड पर टोपा घुसा और गांड के छल्ले पर टोपा अटक गया. मैंने इस बार बहुत सारा थूक उसकी गांड पर लगाया और उंगली से उसकी गांड के अन्दर करके ढीली कर दी साथ में जरा ज्यादा सा थूक भी गांड के अन्दर लगा दिया.

मैंने सोचा कि इतनी रात को ये जाग क्यों रहे हैं, कहीं तबियत तो खराब नहीं हो गयी?उनको देखने के लिए मैं रूम की ओर जाने लगी तो मैंने पाया कि मेरे ससुर अपने लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाये जा रहे थे. सरिता भाबी के मम्मों पर छोटे छोटे से काले अंगूर से निप्पल एकदम कड़क थे. अंकल ने धीरे अपने हाथों को आगे किया और पहले तो मेरे पेट पर और फिर एकदम से मेरी दोनों हेडलाइट्स पर रख दिए और मेरे दूध मसलने लगे.

मैंने उससे बिना कुछ पूछे अपने ढके तेज किए और अपना पूरा उसकी चुत के अन्दर ही निकाल दिया.

जैसे ही उसने मेरा लंड अपने हाथ में लिया, मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया में चला गया. काफी देर तक मेरे मुंह को चोदने के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकाला जो मेरी लार में पूरा गीला हो गया था. कुछ देर बाद उसने मुझे आगे किया और झुका कर मेरी गांड पर थूक लगा दिया.

मैं- तो फिर तूने अपने कॉलेज में क्यों किया?वो बोली- अब तुम इस बात को भूल जाओ. मैं उसके ऊपर चढ़ कर अपने लंड को उसकी चूत की फांकों में रगड़ने लगा और अपने होंठ उसके होंठ व पूरे बदन पर घुमाने लगा. मैंने लंड को चुत की फांकों में सैट किया और उससे कहा हाथ से लंड पकड़ कर चुत पर घिस जरा.

फिर वो लंड निकाल कर सीधा लेट गया और मुझसे बोला- चल अब तू लंड पर बैठ जा और ऊपर नीचे कूद.

उस रात को सारा और लकी ने कमल के पीछे से किस भी की लेकिन सारा प्यासी रह गयी क्योंकि उसको लकी के साथ ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं मिला. लगभग 5 दिन बाद सुबह देखा आसिफा का एक मैसेज व्हाट्सएप्प पर डिलीटेड था.

महिलाओं की बीएफ उसकी खुशी का कारण यह था कि वो आज अपने घर पूरे दो वर्ष बाद लौट रहा था. मेरा एक फव्वारा आने पर जेठजी ने जीभ को बाहर किया और स्तन से अपने दाहिने हाथ को नीचे लाकर, झट से एक साथ अपनी तीन उंगलियां, प्यार के रस से लबालब हुई मेरी चूत में डाल कर तेज रफ़्तार से चुत को चोदने लगे.

महिलाओं की बीएफ फिर मैंने उसका टॉप ऊपर कर दिया और प्रिया की ब्रा के ऊपर से उसके चूचे चूसने लगा।फिर मैंने ब्रा भी ऊपर कर दी और उसके निप्पलों पर टूट पड़ा. उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखते हुए मेरे बालों को कसके पकड़ लिया और एकदम से मेरा मुँह अपनी चूत में दबा दिया.

मेरी सेक्स कहानी को सुनकर मेरे पति के चेहरे पर वासना की लकीरें साफ़ दिख रही थीं.

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दूसरे दिन मैंने अनीषा मैडम को फोन किया और बोला- आज तुम कोई मेरे उम्र की माल रोक लेना या बुला लेना. पहले उसने यहां रहकर पढ़ाई की और उसके बाद यहीं पर जॉब भी करने लगी थी. मैंने प्यार से उस भाभी के पेट पर अपने होंठों से चूम लिया तो भाभी सिहर सी गई.

मेरा मन आगे भी कुछ करने को हो रहा था लेकिन मैं डर रहा था कि कहीं रूपाली इस बात का बुरा न मान जाये. इस वजह से मेरे घरवालों ने कुछ दिन मेरी मामी को मेरे यहां भेजने का फैसला किया. लकी ने सारा की ब्रा उतार फेंकी तो सारा ने अपनी पैंटी खुद ही नीचे कर दी.

सरिता भाभी के मुँह से निकली मादक आवाजें और विजय की आवाजों से पूरा रूम गूंज रहा था.

रोशनी में सरिता भाबी उसे देख कर चौंक गयी और उसके मुँह से निकला- अरे तू तो वही लड़का है, जो मुझको देखता रहता है. मैंने उन्हें बाइक पर बैठने का इशारा किया तो वो गांड उचका कर वो मेरे पीछे बैठ गई थीं. जोरदार धक्के लगाते हुए मैं उसकी पीठ को काटने लगा और उसके गांड दबाने लगा.

नैना भी बहुत जोरों की चीख के साथ चिल्लाई- आह … मर गई … आह … अनुराग … मार दिया।मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये और कहा- मेरी जान … बस अब दर्द नहीं होगा।मैं अपने लण्ड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा. भाभी को लंड सहलाने में प्राब्लम हो रही थी, तो उन्होंने मेरी पैंट निकाल दी. वो तब तक मेरे लंड को चूसती रही जब तक कि मेरे लंड में फिर से तनाव नहीं आ गया.

मॉम के बूब्स चूसने के बाद मैंने उनकी नाभि पर किस किया, जिससे वो सिहर गईं. उसकी बातों से साफ था कि उसने मुझसे सेक्स के लिए ही दोस्ती की थी।मैं भी वही तो चाहती थी कि मेरी सेक्स की भूख को वो शांत करता रहे।बातों ही बातों में उसने मुझे सेक्स के लिए भी बोला और कुछ टालमटोल करने के बाद मैं उससे मिलने के लिए तैयार हो गई।बस अब हम दोनों को सही मौके का इंतजार था.

एक बार मैं बस से दिल्ली से अजमेर जा रहा था। मैंने डीलक्स बस में ऊपर केबिन की टिकट ली और कश्मीरी गेट से बैठ गया।मैं आराम से लेटा हुआ था. वैसे भी उसके पापा भी इस हालत में नहीं हैं कि उसके कुछ बुरा हो जाने पर संभाल लें. मेरी गांड बड़ी होने की वजह से जब मैं कमर मटका कर चलती हूँ … तो पीछे से मैं और भी ज़्यादा सेक्सी दिखती हूँ.

मैं जानबूझ कर उसी समय नहाने घुस गया और अन्दर जाकर जल्दी से नंगा हो गया.

मैंने उसकी आंखों में झांका … तो वो मुझे चोदने के लिए गांड उठाती दिख रही थी. वो जब भी कोचिंग पढ़ने आती थी, तो पहले मुझसेअपनी चूत चुदाईकराकर ही कोचिंग जाती थी. उसने मेरा मुंह अपनी टांगों के बीच में करवा लिया और अपनी चूत मेरे सामने खोल दी.

वो अपनी गांड उठाते हुए अपनी चुत की दरार में लंड का सुपारा घिसने लगी. उन्होंने पूछा- क्या काम है?तो मैंने बताया- आंटी मैं रवि, आपके पड़ोस में नया नया रहने आया हूँ.

जेठानी वहां नहीं थी तो मैंने फटाफट नाइटी पहनी और अपने बेड पर कमर के नीचे तकिया लेकर लेट गई. हाय … उसके बड़े बड़े, गोल गोल और सफ़ेद मम्मे एकदम मादकता बिखेर रहे थे. मेरे ममेरे भाई और बहन शहर में रहकर पढ़ाई करते थे और बड़े मामा दूसरे मकान में रहते थे।गर्मियों का मौसम था। घर में मेरे नाना-नानी थे लेकिन वो लोग नीचे सोये हुए थे.

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यदि कमरे में लाइट बंद करके मेरे जिस्म को टटोला जाए तो किसी भी लौंडे को एक गदर माल के स्पर्श का मजा मिलेगा.

फिर जब सुबह मेरी आंख खुली तो मैं मामी की चुदाई के बारे में ही सोच रही थी. आखिरकार वह घड़ी भी आ गयी और मैं अपने सपनों की रानी के साथ अपनी सुहाग की सेज पर पहुंच गया. मामाजी और मीनू दोनों ही बारी बारी से ऊपर आ गये और अपनी अपनी जगह पर लेट गये.

मैं और मेरी वाइफ भी बड़े दिनों बाद मिले थे, इसलिए वो भी सेक्सी अंदाज से ताड़ रही थी. दो दिन के बाद वह अपने कॉलेज से जल्दी निकल आया और मेरी छुट्टी होने के बाद हम दोनों साथ में ऑटो से बैठ कर आए. हिंदी भोजपुरी सेक्स वीडियोउसने मुझे कार की पीछे वाली सीट पर लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर किस करने लगा.

फिर उसने अपने होंठों को मेरे होंठों से जोड़ कर मुझे चूमना शुरू कर दिया. मेरे पापा काम के सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहते हैं और भाई सुबह 9 बजे ही दुकान चला जाता है.

मैंने दरवाज़ा बंद किया और पीछे मुड़कर देखा तो जीजू लंड हिला रहे थे. सुबह अन्वेषी भाभी ने उठते ही मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया और लंड को कड़क करके उसके ऊपर चढ़ गईं. मैंने कैसे खोला उसे!हैलो मैं राज सोलंकी, एक बार फिर से सुहागसेज पर मेरी बीवी की कुंवारी चुत चोदने की सेक्स कहानी में आपका स्वागत करता हूँ.

वो किस तरह के सपने में खोया था, ये उसकी पैंट में बना तम्बू बयान कर रहा था. उसको ले जा और देख वह कितना जवान है … तुझे बिस्तर में कितना संतुष्ट कर पाता है. ये सिलसिला अगले दिन दोपहर तक चला जिसके बाद शाम को आकृति आंटी वापस आ गईं और मैं अपने घर चला आया.

लेकिन बोलते है ना कि किस्मत के आगे किसी की नहीं चलती, मेरे साथ ऐसा ही कुछ हुआ.

मैं लिली के पास जाकर बैठ गया और उसे अपनी बांहों में ले कर किस करने लगा. बाहर किसी को नहीं आता देखकर चुपके से दरवाजे के रास्ते अपने घर चली गयी.

ना चाहते हुए भी मैं अपनी मुंडी नीचे करके उनकी नाइटी के नीचे झांकता, तो मुझे तो मानो जैसे सारा मैदान अजूबा सा दिख जाता. उनके दोनों दूध को बारी बारी से मुँह में रख कर मैं कुछ देर तक चूसता रहा. 9 जनवरी की रात जो ससुर और बहू की चुदाई हुई वो मैं कभी नहीं भूल पाती हूं.

रूपाली का पहली बार था इसलिए वो इस हमले को सह नहीं पाई और उसकी जोरदार चीख निकली जो बाथरूम में दब गई. वो ज्यादातर शॉर्ट्स और स्कर्ट में ही होती है, जिसमें जरा सी झुकने पर उसकी पैंटी भी साफ दिखाई देती है. मेरे ससुर के हाथ मेरी चूचियों पर आ गये थे और वो मेरी नाइटी के ऊपर से मेरी चूचियों को जोर जोर से दबा रहे थे.

महिलाओं की बीएफ मैं भी अपने हाथों को पहले उनके कंधे पीठ कमर पर लाया फिर उनकी मोटी मोटी गांड पर सहलाते हुए मसलने लगा. मैं आपको प्रिया की चुत चुदाई की कहानी अगली बार लिखूंगा, अभी तो आप मेरी बहन की चुदाई की कहानी का मजा लो.

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उसने मुझे मैसेज पर तुरंत जवाब दे दिया कि मैं आपको बाद में फोन करूंगा. वो ये भी कोशिश कर रहे थे कि मुझे उनकी नजर के बारे में पता न चले इसलिए बार बार नीचे नजर कर लेते थे. मैंने ओके कह कर उसकी ड्रेसिंग टेबल से तेल उठाया और अच्छे से उसकी मालिश कर दी.

मैंने उसकी चूत में एक ही बार में अपनी 2 उंगलियां डाल दीं और ज़ोर ज़ोर से अन्दर बाहर करते हुए हिलाने लगा. मैंने पूछा- तुम्हारे पास कोई टच वाला मोबाइल है, उसमें मैं अपने छोटू का फ़ोटो भेज देता हूं. मेकअप वाला कैमराफिर वो बोली- मैं इतना बड़ा लंड केवल उनके मोबाइल में जब गंदी वाली वीडियो दिखाते हैं, तब देखी थी.

यदि अनिकेत जाग गया तो मैं तो बिल्कुल बिना कपड़ों के उसकी पत्नी को चोदते पकड़ा जाता.

पीयूष ने पान वाले को बोला- क्या देख रहे हो भाई?तो पान वाला बोला- भैया आपकी गर्लफ्रेंडवा बहुतेई सेक्सी है. और उसके बाद धीरे फिर से वो पानी छोड़ने लगी।उसकी कमर चलती रही, उसको सांस चढ़ने लगी।मैंने पूछा- मैं ऊपर आऊँ”?वो बोली- नहीं, अब तो मर कर ही नीचे उतरूँगी।वो मुझे पेलती रही.

मैंने जोर से उसको अपनी बांहों में भींच लिया था, जिससे उसके बोबे पिचक कर मेरे सीने से पिसने लगे थे. शेखर- बेटा तुम्हें कब निकलना है?रोहन ने जवाब दिया- जी कल सुबह छह बजे. मैंने उसके लंड की पूरी चमड़ी को खोली और आगे लाकर सुपारे को ढका इस तरह से मैंने लंड की मुठ सी मारी.

उसने अलमारी खोली।मैंने कहा- उसमे ऊपर वाले दराज़ में मेरी बीवी के कपड़े हैं। तुम उनमे से एक ब्रा और पेंटी निकाल कर पहन लो।उसने एक सफ़ेद ब्रा और एक मेरून कलर की पेंटी निकाल कर पहन ली।फिर उसने मेरे कहने पर मेरी बीवी की लिपस्टिक लगाई, आँखों में काजल डाला। आने हिसाब से वो थोड़ा साज संवर कर मेरे पास आई।मैंने कहा- बड़ी सुंदर लग रही हो!जबकि वो लग नहीं रही थी.

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रोमी ने सरिता भाभी की गांड को देखा, तो उसकी गांड सूज गयी थी लेकिन उसकी गांड का छेद काफी खुल चुका था. वैसे तो मैं अकेली ही किसी ऑटो से चली जाती, लेकिन मौसम भी आज खराब है और इतनी रात को अगर मैं अकेली जाउंगी तो घर पर भी मम्मी भी कहेंगी. पूजा- अच्छा, मुझे तो मालूम ही नहीं था कि तुम भी मेरी गांड के दीवाने हो.

वो एकदम से चिहुंक गई और अपने चेहरे से मेरे लंड से निकले रस को साफ़ करने लगी. वो मेरी चूचियां देखता हुआ बोला- हां चलिए दीदी … आपका काम अभी कर देता हूं. वो सब आपके नाम से फर्जी आईडी बना कर फ़ोटो वायरल करने की बात भी कह रहे थे.

अब अमित ने अपनी चड्डी निकाल कर पलंग के नीचे फेंक दी और मेरी नजर उसके भीमकाय लंड पर टिक गई. मैंने उसी स्थिति में उसके एक पैर को अपने कंधे पर लिया, दूसरा पैर बेड पर फैलाया और उसको चोदने लगा. इस बार मैंने जैसे ही उसकी पैंटी की महक लेने के लिए उसे डोरी से उतारी और खुशबू लेने लगा, तो मुझे सुध-बुध ही न रहा.

मैंने उसके होंठों पर होंठों को चिपका लिया और दोनों के नंगे बदन एक दूसरे के बदन से चिपक गये. ऑटो वाले ने उस लड़के को आगे बुला लिया, तो उसने अपना किराया वहीं दे दिया और मुझे देखने लगा.

उसकी इस अदा से मैं एकदम से कामुक हो गया और सुहैला को अपनी गोद में उठा कर बेडरूम में ले गया.

जाते जाते मैंने उसकी गांड पर एक चपेट मारकर बोला- अबकी बार इसका नंबर है, तैयार चिकनी करके रखना. जंगली जानवरों का सेक्सीये अनुभव मुझे अपनी ज़िंदगी में पहली बार मिल रहा था कि कोई मेरी बुर चाट रहा था. मैजिक कॉल एप्समेरी बात पर वो मुस्कुरा दी और अपने आप ही बोली- तुम्हें मैं कैसी लगती हूं?मैंने कहा- आप तो एकदम हॉट लगती हो. उसकी आंखों के सामने उसके जवान बेटे रोहन का लम्बा और 3 इंच मोटा लंड फनफना रहा था.

तभी छत पर खड़े होकर मैंने गांव की खुली हवा का आनन्द लेते हुए एक बार छत पर घूम कर देखा.

सरिता भाभी बोली- देख भोसड़ी के उंगली बाहर … निकाल वरना मैं नहीं चुदवाने वाली. चुत की मलाई चाट लेने के बाद मैंने तुरंत अपने लंड पर थूक लगा कर उसे चिकना किया और एकदम से उसकी चूत में घुसा दिया. मुझे चॉकलेट खाना पसंद तो थी लेकिन मैं बसंत से लेते समय कुछ सकुचा जाती थी.

हमारे बीच धीरे धीरे ये सब चीजें बढ़ने लगीं … और अब सुरेश मेरे मम्मों को अपने मुँह में लेकर चूसता और दबा देता; मेरी सलवार में हाथ डालकर मेरी चुत को रगड़ देता. फिर मैंने थोड़ा सा और अपनी गांड को आगे की ओर धकेला और अपना आधा तनाव में आ चुका लंड मामी की गांड से थोड़ा और ज्यादा सटा दिया. वो अपने बेटे के साथ ये सब कर रही है, यह अहसास ही उसे इतना मज़ा दे रहा था कि वो गर्मी की इन्तेहा को पार करते हुए फिर से कामोत्तेजित हो गई थी.

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कभी मैं उसके ऊपर चढ़ कर चुदाई करने लगता, तो कभी वो मेरे लंड के ऊपर बैठ कर चुत चुदवाने लगती. सारा कमल पर ज्यादा हावी नहीं हो सकती थी क्योंकि उसके सारे महंगे शौक तो कमल के पैसों से ही पूरा होते थे. उसने लंड सहलाते हुए कहा- ठीक है लेकिन मैं तुम्हारे लंड पर बैठकर चुदाई करूंगी.

अब मैं आराम से उसके मोटे, गुलाब से सुर्ख होंठों को आराम से चूस रहा था.

मतलब मुझे अभी अभी पता चला था कि मेरे कोई चाचा भी थे, पर वो अब इस दुनिया में नहीं रहे थे.

मैंने कहा- मेरे पास एक बुक रखी है आप पहले उससे बेसिक पढ़ लो, उसके बाद किसी भी सेंटेंस को ट्रांसलेट करना आ जाएगा. इतना कह कर रोहन ने कैब वाले को आगे बढ़ाने के लिए कहा और वो निकल गया. टॉयलेट फिल्मरात में सोते समय भी आकाश की घूरती नजरें याद आने लगी थीं।उसके साथ मजे लेने का मन तो मेरा भी करने लगा था मगर मेरे मन में एक बात ही खटक रही थी कि वो शादीशुदा था।उसकी उम्र उतनी ज्यादा नहीं थी.

उसने मुझसे सिंदूर मंगाया और मेरी मांग भरते हुए बोला- लो आज से तुम मेरी पत्नी हो गई. मैंने भी अपना रस उसकी बुर में निकाल दिया और हम एक दूसरे से लिपट कर लेट गए. अन्दर एक हुक के ऊपर चंचल की ब्रा और पैंटी का सैट सूखने के लिए टंगा था.

मैं बोला- अभी तुम ये सारी बात भूल जाओ और मेरे साथ चुदाई का मजा ले लो. इसी वजह से उसने मुझे मेरी कमर के थोड़ा ऊपर से पकड़ा और गोटी मारने का इंतजार करने लगा.

सबसे पहले मैंने कुंवारी दुल्हन की नाक पर जो नथ पहनी थी, उसको उतार दिया.

इतने में कल्पना ने मुझे दीवार से सटा दिया और मेरी आंखों में देखने लगी. फिर उसने एक बैग लिया और बाथरूम चली गई।जब वापस आई तो उसने नाइटी पहन रखी थी. शेखर अपनी बीवी की संगमरमरी जांघों को चाटने के बाद उसकी चूत पर अपनी जीभ फेरने लगा.

सरिता पत्रिका की कहानी मनीष- अंजलि, प्रोड्यूसर मान गया है और अगले हफ्ते फिल्म की शूटिंग होगी. इन हरकतों के वजह से निकलती मायरा की मादक सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थीं.

मैं एक बार जोया के हाथ से झड़ चुका था इसलिए मेरा लंड पूरी मेहनत से काम कर रहा था. तो दोस्तो, अब मैं आपका समय बर्बाद न करते हुए सीधी ससुर और बहू की चुदाई की कहानी पर आती हूं जो मेरे साथ 9 जनवरी की रात घटी थी।मेरा नाम नेहा है और मैं 24 साल की शादी शुदा औरत हूं. इसके बाद चाहे उसे कमल की झपकी लगने के बाद वॉशरूम में जाकर वहां अपनी उँगलियों से या किसी पतली बोतल से अपनी चूत को मसाज क्यों न देनी पड़े.

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वो आंखें बंद करके अपनी चूत को रगड़ रही थी और रोहन के लंड के बारे में सोच रही थी. मेरा लंड एक औसत भारतीय की तरह साढ़े पांच इंच का है, जो किसी भी चूत और गांड को खुश करने के लिए काफी है. कुछ देर बाद बारात के वापस जाने का समय होने लगा था; उन्होंने मुझे कार के पास आने का इशारा किया.

‘आआआह …’लंड घुसेड़ते ही उसने टांग छोड़ कर मेरी पिछाड़ी को पकड़ लिया और मैंने टांगों को फैलाते हुए अपने दोनों हाथ उसके गले में डाल दिए. भाभी ने मेरे सामने अपने दूध हिलाए और बोलीं- माल पसंद आया?मैंने कहा- चूस कर देखने दो डार्लिंग … फिर बताता हूँ.

वो हंसने लगी और बोली- मैं भी उधड़वाने के लिए रेडी हूँ मगर समय और जगह भी देखी जाती है … ऐसे नहीं कि चाहे जिधर लग गए.

कुछ दिन बाद जब मुझे कोई दूसरा लंड पसंद आता है, तो फिर पुराने लवड़े से चुदने में मुझे तनिक भी मज़ा नहीं आता है. फिर उसने मेरे अंडरवियर को भी खींच दिया और ऊपर से भी मैं नंगा हो गया. मैं अपनी छोटी बहन को भी चोद चुका हूँ, उसकी चुदायी की कहानी आपको बाद में बताऊंगा, लेकिन अभी तो मॉम की चुदाई की कहानी पर फोकस करते हैं.

मैंने आंटी से बोला- इनका अध्यापक मेरा सीनियर और दोस्त है और अभी जाकर ये उसके घर से अपना मोबाइल ले ले. उसने मुझे अपनी नयी ड्रेस दिखायी और उसके उस रूप को देखकर मेरा दिल घायल हो गया. कुसुम- आआहह ओह ईईईर … आई एम लविंग इट … यसस्स्स … फक माय होल … ओ माय गॉड … ऐसा मज़ा तो मुझे कभी नहीं मिला … अहह … ओह रोहन … यू आर फकिंग मी रियली गुड … फक मी विद युअर हार्ड कॉक … अह चोदो मुझे … मारो मेरी चूत … अहह.

कार्तिक अपने हाथ को धीरे-धीरे मेरी साड़ी के अन्दर चलाते हुए उन्हें जांघों तक ले गया.

महिलाओं की बीएफ: लगभग दस मिनट तक नवाब ने मेरे मुँह की चुदाई की और अपने लंड का पानी मेरे मुँह में ही छोड़ दिया. मैंने कहा- मैं नहीं ढक रहा, जब तक तू नहीं देगी … तब तक मैं कुछ नहीं मानूँगा.

पर इसमें मेरी क्या गलती थी, उसने खुद ही मेरे बारे में बिना वजह ही गलत सोच लिया था. अब मेरी बहन मादक सिसकारियां लेते हुए बोली- अहा अहा पंकज आह मजा आ रहा है … आह चोदो मुझे … और तेज चोदो आआह अपनी पूजा जानू की चूत फाड़ दो. बताओ आज कहाँ बिजली गिराने वाली हो?उन्होंने मेरा गिरेबान पकड़ा और खींचते हुए मुझे अंदर वाले कमरे में ले गईं.

मैंने भी मौक़ा ताड़ा और लोहा गर्म देख कर चुत का भोसड़ा बनाने की ठान ली.

उसके चड्डी के सामने जो तंबू बना हुआ था, उसे देखकर उसके लंड की लंबाई का अनुमान लगा रही थी. दरअसल हम लोगों को वेस्टर्न स्टाइल के टॉयलेट की आदत थी और गांव में टॉयलेट नाम की कोई चीज ही नहीं थी. मैंने उसके लंड की पूरी चमड़ी को खोली और आगे लाकर सुपारे को ढका इस तरह से मैंने लंड की मुठ सी मारी.