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मैंने लण्ड को बाहर निकाले बिना चाची को अपनी बाँहों में लिया और मैं सीधा लेट गया और चाची को मेरे ऊपर लिटा लिया।चाची पूरी तरह से थक चुकी थी और वो लगभग सो गई थी लेकिन मैं नहीं सोया था…. जालिमों की तरह चोदै है, तेरी मां तांई तै खुस रेहवे है पर मन्ने कोई इसा मज़ा ना देवै ?मैं : छी. नहीं मैम आप उसे यहीं बुला लो यहाँ आपके सामने ही, बल्कि आप ही कह दो सारी बात !लो यह काम अगर मै करुँगी तो बाकी काम भी मै ही कर लूंगी उसके साथ!मैम!अच्छा बुलाती हूँ! यह कह कर मैंने रोहित को आवाज लगा कर बुलाया.

मेरी जुबान ने जैसे ही उसकी भगनासा को छुआ, वो पागल हो गई और अपने दोनों हाथों से अपनी चूचियों को दबाने लगी. उसके बाद शीतल ने मुझे कंडोम पहना दिया और फिर मैं उसे दनादन चोदने लगा। मेरा चिक बहुत जल्दी निकल गया था। मगर थोड़ी ही देर में मैं अच्छे से चोदने लगा। उसे मैं बहुत जबरदस्त शारीरिक सुख दे रहा था और वो उससे आनंदित हो रही थी।सच में जब लंड चूत में जाता है तब जो आनंद मिलता है उससे कोई आनंद बड़ा नहीं।हाए ओह ओह ओह…. मुझे लगा कि मामी अब बाहर निकलेगी तो मैंने मामी को पेट के नीचे हाथ डाल कर पकड़ लिया और ऊपर से ऐसा जोर लगाया कि लंड अन्दर धंसने लगा.

मैं उसकी ये आवाज़ें सुनकर और भी जोश में आ गया और जोर जोर से उसकी चूत को खाने लगा, उसके दाने को अपने दांतों के बीच लेकर दबा देता बीच बीच में. जवान कुंवारी बुर मेरी मधु की …मैंने जैसे उसमे ऊँगली डाली …ऊउई अम्मा आह्ह्ह सुनील ! बस ! मत करो ! कुछ होता है …मैंने ऊँगली निकाली.

वो धीरे-धीरे मुस्कुराने लगी और बोली- आज मुझे असली मजा आया है! आज के बाद मैं तुम्हारी हूँ! तुम जब चाहो मुझे चोद सकते हो! मेरी चूत हर वक़्त तुम्हारी राह देखेगी!और उसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और अपनी हालत ठीक करके चली गई.

’‘और गोमती, दिन में दो बार भी चुद गई!’‘देर से ही मानो, पर हमने इतना सब्र तो किया ना, मिला ना फ़ल!’‘हाँ री, मिला क्या, लगता है अब तो रोज ही मिलेगा यह फ़ल!’‘दीदी, एक बार चारों से एक साथ चुदवा कर मजा ले!’‘साली मर जायेगी…’‘अरे दीदी, अभी तो मौका है… जाने फिर ऐसा समय आये, ना आये?’दोनों ने अपनी निंदासी आँखें खोली और अपनी आँखें एक दूसरे की आँखों से लड़ा दी.

दोस्तो, अब ये बताने की ज़रूरत तो शायद नहीं है की मेरे बड़े बड़े बूब्स किसी को भी अपना दीवाना बना सकते हैं. वो दोनों बिस्तर पर एक दूसरे के साथ लेटी हुई थी और दोनों पेट के बल लेट कर एक साथ किताब को देख रही थीं. यह कह कर मैं वहाँ से चल दिया, दीदी भी मेरे पीछे आने लगी, शायद श्यामलाल ने दीदी की छुट्टी कर दी थी.

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फिर वो दोनों जाकर नहाये और फिर हम तीनों ने अपने कपड़े पहने और मैं और चित्रा वापिस घर आने लगे.

मैंने कहा- अरे! यह क्या कर रहे हैं आप दोनों?अरे कुछ नहीं भाभी! थोड़ा सा देख रहा था!ये भी बोले- बेचारे को हाथ लगा लेने दो! क्या फर्क पड़ता है तुम्हें?मनोज हाथ लगाने के बहाने दबाने लगा. और वाशरूम जाकर मुँह धोया और वापिस आ गए…जब हम वापिस आए तो मेरी गर्लफ्रेंड मिली और बोली- कहाँ रह गए थे तुम. मेरी दीदी की जब शादी हुई तब मैं 18 साल की थी पर 18 साल की उम्र में मेरे वक्ष पके आम की तरह हो गए थे, चूतड़ उभर गए थे और उनकी दरार क़यामत ढाने लगी थी.

यही ना?हालाँकि नीना ने मुझे इतना ही बताया कि विनोद को नीना के गर्भवती होने का डर सताता रहता था. एक चुम्बन ने क्या कर दिया… या फिर शायद यह यौवन ही था जिसने यह सब करा दिया…मैं उसकी ओर थोड़ी टेढ़ी होकर लेट गई. आते ही वो भी मुझ पर टूट पड़े और मेरी गाण्ड, चूचियाँ, जांघों को जोर जोर से मसलने लगे और मेरे होंठों का रसपान करने लगे, वो मेरी कमीज़ को ऊपर उठा कर मेरे दोनों निप्पल को मुँह में डाल कर चूसने लगे।मैं भी उनके सर के बालों को सहलाने लगी.

‘ओये होये, क्या बात है भाभी… मजा आ गया इस बात पर… तुसी फिकर ही ना करो जी… यह देवर भाभी के बीच के बात है…’मैंने गिलास को मुँह से लगाया तो बहुत कड़वी सी और अजीब सी लगी.

भाभी ने उनका परिचय कराया- एक का नाम श्रुति था, वो भाभी की तरह ही मस्त फिगर वाली थी. जी वो… मुझे छबीली से मिलना है…”माईने पधारो सा…” उसकी मीठी सी मुस्कान से मैं घायल सा हो गया.

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बीएफ सेक्सी फिल्म बढ़िया इस खेल में समझदार रीटा ने बहादुर के लण्ड पर ढेर सा थूक थूका और लण्ड को खूब गीला पिच्च कर दिया. फिर एक दिन स्कूल बस खराब होने की वजहा से रीटा के डैडी ने अपने नये चपड़ासी को साईकल से रीटा को स्कूल छोड़ने और लाने की ड्यूटी लगा दी.

अगले दिन मुझे तान्या के घर पहुँचने की जल्दी थी, शाम के करीब पाँच बजे मैं तान्या के घर पहुँच गया और सीधा तान्या के कमरे में घुस गया.

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क्या मजा था उसमें! एकदम चिकनी और गोरी टाँगें थी उनकी! मैंने उनकी स्कर्ट इतनी ऊपर कर दी कि मुझे उनकी पेंटी दिखने लगी. मेरा लण्ड पैंट से बाहर आने के लिए बेताब हो रहा था…मैंने अपने खड़े लंड को छुपाने की पूरी कोशिश की…हालांकि रिश्ते में वो मेरी दीदी जैसी थी पर उसके गोरा बदन ने सब कुछ भुला दिया …. अगले ही पल में मेरा पूरा लंड उसके मुँह में था और उसकी गोल-गोल चूचियाँ मेरे हाथों में…….

अब चित्रा पूरे होश में थी और वो हमारा पूरा साथ दे रही थी शायद वो भी दो-दो लंड का मजा एक साथ लेना चाहती थी. !!राजा- अच्छा!!यह कहते ही राजा ने मेरी चूचियों पर से कपड़ा नीचे सरका दिया। मैंने बिन कंधे का टॉप पहना था और ब्रा तो रास्ते में ही खुल चुकी थी, सो चूचियाँ उसके सामने झूलने लगी और राजा की आँखों में लालच आने लगा…बाकी अगले भाग में…क्या राजा मुझे पानी में चोदेगा… या मुझे अपने सिपाहियों से चुदवा कर मज़े लेगा. ‘हाय रे मेरे राजा… मेरा तो निकाला रे… मैं तो गई… आह्ह्ह्ह्ह्ह’ और सोनू की चूत ने पानी छोड़ दिया.

जब मैं घर पहुंचा तो शैली नहा रही थी, उसने दरवाजे की चिटकनी नहीं लगाई थी क्योंकि घर में कोई नहीं था.

मैं उसकी तांगों के बीच में बैठ गया और उसकी चूत को चूमा और लंड को उसकी चूत पर रख दिया …. मेरी 2 बजे की अपॉयंट्मेंट थी। एक हफ्ते पहले यह अपॉयंट्मेंट पक्की हुई थी, तब से आज तक चैन से नींद नहीं आई है, पहली बार किसी से सेक्स के प्रति अपना डर बताने वाली थी. ‘ऐ चुप… ये क्या रण्डी की तरह बोलने लगी…’‘सच में जीजू… अब बस कर ना!’ मैं रुआंसी हो कर विनती करने लगी.

कल से तुम्हें भी काम करने को मिलेगा। जीजू, इसे अन्दर ले चलो। सारा काम अपने आप सीख लेगी ! बहुत होशियार है यह।मैं उसे अन्दर ले आया। वहाँ जाहिदा, नीला, रानी सुनीता धंधे के लिए तैयार होकर खड़ी थी. मैं उसे चोदता रहा !आप सब यकीन नहीं मानेंगे- उस बार मैंने उसे पूरे 50 मिनट तक चोदा जो कि मेरे लिए भी आश्चर्यजनक था कि इतनी देर चुदाई करने पर भी मैं झड़ा नहीं।यह उस गोली का ही असर लग रहा था!जब बहुत देर हो गई तो फिर से मैंने उसे अपने नीचे लिटा लिया और जोर से चोदने लगा और वो तो बस आःह्ह्ह…. ये सोच कर मैंने उससे कहा,’ आ मेरे राजा तेरा पानी तो मेरे मुंह में डाल मुझे पिला दे तेरा पानी.

हमारा खानदान बहुत बड़ा है, मेरे पापा की 5 बहनें हैं जिनमें से तीन दिल्ली में ही रहती हैं. एक तो कंटाप माल और उसकी कसी चूत… ऊपर से मेरा मूसल सा लंड…फिर दबा कर चुदाई होनी ही थी… मैं चोदता रहा और रानी चिल्लाती रही.

मैं वो देख ही रहा था कि सोनम ने बीच में ही मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे एक तरफ़ चलने को बोला. बहादुर थूक सटकता, रीटा की शर्ट में हाथ डाल कर बैच लगाने लगा तो रीटा प्यार से बोली- ठहरो बहादुर, ऐसे नहीं!फिर रीटा ने लाहपरवाही से अपनी शर्ट के अगले तीन बटन खोल दिये और बोली- अब लगाओ, बड़ी आसनी से लगेगा. अपनी बीवी के जिस्म को चूम-चाट रहे हैं। कौन नहीं करता यह सब? हम क्या अनोखा काम कर रहे हैं.

मुझे अंदर घुसता देखकर मनीषा इधर-उधर देखने लगी और बिल्कुल चुप हो गई, मनीषा के इस रूप को देख कर मेरा भी लण्ड खड़ा हो चुका था.

मैंने कहा- लेकिन तुम्हें दो दो किताबों की क्या जरूरत है? एक रखो और दूसरी लौटा दो, मुझे पढ़नी है. भाभी अंदर आकर बोली- दूसरा बाथरूम खाली है, वहाँ नहा लो!मुझे भाभी के ऊपर बहुत गुस्सा आया मगर मैं कुछ कर भी नहीं सकता था. इस खेल में समझदार रीटा ने बहादुर के लण्ड पर ढेर सा थूक थूका और लण्ड को खूब गीला पिच्च कर दिया.

और उसने पूछा… राहुल मेरी पैंटी कहाँ है???…………सेक्स के बाद हर लड़की अपने साथी से पहला सवाल यही करती है।आपकी प्रतिक्रियाएँ ही मुझे दूसरी कहानी को लिखने के लिए मजबूर करेंगी।[emailprotected]. मैंने धीरे से ज्योति के कमरे का दरवाजा खोल दिया, अंदर का नजारा देख कर मेरे अन्तर्वासना जागृत हो गई क्योंकि ज्योति अपने बिस्तर पर सिर्फ ब्रा-पेंटी में सो रही थी जिसे देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया मगर मैंने अपने ऊपर काबू करते हुए वहाँ से चल दिया और योगी के कमरे में आकर सो गया.

फिर हम तीनों नंगे ही बाहर आ गए तो योगी ने चित्रा को पकड़ लिया और चित्रा के चूचे चूसने लगा. बस में होम वर्क कॉपी करना और साथ में लंच करना… हमारी दोस्ती जो बस यूँ ही शुरू हुई थी और प्रगाढ़ होने लगी… अब वो मुझे अपनी कक्षा के किस्से-कहानियाँ लंच में सुनाता… किसने किसको चांटा मारा, किसने किसकी स्कर्ट खींची, किसने किसे प्रोपोज किया, किसने अध्यापिका को पेन मारा. योगी भी पीछे-पीछे आ गया, मैंने उसका सूट उतार दिया और फिर उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और फिर मैंने चित्रा की पेंटी भी निकाल दी और उसकी चूत चाटने लगा.

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उस वक़्त मेरी चूत कुंवारी थी लेकिन उसकी नहीं क्यूंकि उसने तो नौंवी कक्षा में ही लौड़े का स्वाद चख लिया था.

आखिर तुम्हारा पति क्या सोचेगा? कहीं इस पर दाग ना पड़ जाये! तुम अपने बच्चों को दुधू कैसे पिलाओगी?नीना शर्म से लाल हुई जा रही थी. ‘दीदी, आपको तो कोई मुस्टण्डा ही चाहिये चोदने के लिये, घोड़े जैसा लण्ड वाला!’‘घोड़े से चुदवा कर मेरा बाजा बजवायेगी क्या… ‘‘अरे दीदी, बहुत दिन हो गये, साहब तो चढ़ते ही टांय टांय फ़िस हो जाते है, लण्ड झूल कर छोटा सा हो जाता है. इस बार मैं पूरे स्तन को हथेली में लेता और निपल समेत जितना मुँह में ले सकता, उतना मुँह में लेता और चूसता.

मेरी बगलों से लंड-रस बह रहा था, चूचो पर महामंत्री जी अपने हाथों से घुन्डियाँ घुमा कर मुझे मीठी सी टीस दे रहे थे, हाथ वाले लण्ड, मैं अभी भी जोर जोर से हिला रही थी, और पहलवान मेरी गाण्ड फाड़ रहा था।उस पर चोट खाए राजा ने जोर से एक झटका मारा और मेरी चूत फाड़ डाली।मेरी चूत से खून नहीं निकला तो राजा बोला- तू तो खेली-खाई है, तो भी तेरे इतने नखरे हैं… ये ले …!!!कह कर उसने एक और ज़ोर से झटका मारा…. मैंने उसका होंसला बढ़ाने के लिए उसकी तरफ़ मुस्कुरा कर देखा और कहा- आईये टीटी साहब बैठिये, खाना लेंगे आप?मेरी बात सुनते ही वह बोला- न. कुंवारी लड़की बीएफ हिंदीमैंने कहा- जान, सुना है कि बहुत दर्द होता है पहली बार में……तो वो बोली- इस दर्द से अच्छा है कि मैं वो दर्द बर्दाश्त करूँ …… प्लीज़ जानू ! डालो ना ! वरना मैं पागल हो जाउंगी…मैंने कहा- ठीक है, तैयार हो जाओ.

”ठीक है,” वैल ने नम्रता से कहा,”तुम सिर्फ यह देखो कि यह जगह तुम्हारे लिए आरामदायक है या नहीं ! नग्नता के बारे में सोचने की जरूरत नहीं और न ही किसी के दबाव में आने की ! तुम वो करो जो तुम्हारा मन चाहे. ”हे भगवान्…” अनीता दीदी के मुँह से एक हल्की सी चीख निकल गई- तू सच कह रही है? सोनू लेकर आता है?नेहा उनकी शकल देख रही थी- तुम इतना चौंक क्यूँ रही हो दीदी?”अनीता दीदी ने एक लम्बी साँस ली और कहा- यार, मैं तो सोनू को बिल्कुल सीधा-साधा और शरीफ समझती थी.

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फिर वो पेड़ का सहारा लेकर घोड़ी बन गई और मैंने अपना लंड पीछे से उसकी चूत में डाल दिया. बहुत ही शानदार कमरा था, बड़ा सा पलंग, मेज-कुर्सी, अलमारी, अटेच्ड लेट-बाथ !मैं सीधे फ्रेश होने बाथरूम में घुस गई। मैं बाथरूम से वापिस आई तो…कहानी तो अब चलती ही रहेगी !. ”मैंने देखा कि इतनी गर्म चूत तो दोनों बहनों की भी नहीं थी !छोटी छोटी झांटें हाथ में चुभ रही थी और एक मोटा सा दाना भी स्पर्श हो रहा था, मैंने कहा, पारुल जान, यह क्या है?”वो बोली,”यही तो सबसे बड़ी क़यामत है ….

वो खिड़की से उतर के थोड़ी देर बाद चोरी से मेरे घर अंदर आ गई जिसके लिए मैंने पहले से ही दरवाज़ा खुला रखा था. आँटी ने कहा- सागर, उस दिन कौन थी वो लड़की?तो मैंने कहा- कोई नहीं…आंटी बोली- अगर तुम मुझे नहीं बताओगे तो मैं तुम्हारी मम्मी को सब कुछ बता दूंगी. बीएफ भोजपुरी हिंदी सेक्सी?अभी देता हूँ मेम… कहकर मैं गरम पानी बाल्टी में ले जाने लगा… शुक्र है वो क्या कहत है गीजर ख़राब था…मैंने देखा कि मेम काली ब्रा और पैंटी में बाथरूम में इन्तज़ार कर रही थी…उनकी पतली पेट में वोह नाभि के पास जो तिल था मानो काला हीरा.

मुझे मेरे पति स्टेशन तक छोड़ने के लिए आए और मुझे मेरे कूपे में बिठा कर टिकेट चेकर से मिलने चले गए.

जिस वक़्त के वाकियात मैं आपको सुनाने जा रही हूँ उस वक़्त मेरी उम्र 20 साल की होने वाली थी यानि अपनी जवानी के इंतहाई हसीन मोड़ पर थी मैं, जब उमंगें जवान होती हैं, जब मन में किसी का डर नहीं होता और मुझ पर तो जवानी भी टूट कर आई थी. मैंने कहा- पर मोना के होते हम कैसे मिल सकते हैं?तो वो मुस्कुराई और बोली- मोना को भी मैंने इसी शर्त पर माफ़ किया है.

उसकी आवाज़ में दर्द और गले में कुण्ठा थी… वो रो रहा था… मैंने दूसरे हाथ से उसके चेहरे को छुआ. प्रेषक : अमित शुक्लालेकिन मैं अब मुट्ठ मार-मार कर थक गया था और उसको हर हाल में चोदना चाहता था !एक दिन भगवान ने मेरी सुन ली और मेरे परिवार को एक शादी में मुंबई जाना पड़ा एक हफ्ते के लिए।मैंने उसको अपने घर बुलाया तो थोड़ी ना-नुकुर के बाद आने को तैयार हो गई. कुछ देर बाद जब ज्योति वापिस आई तो उसने पूछा- क्या हुआ था?तो आयशा ने कहा कि वो कॉकरोच देख कर डर गई थी.

अब आई ना लाइन पर साली साहिबा!”जीजू, क्या यह सब ठीक है? हम दोनों जवानी के नशे में दीदी को भूल रहे हैं! दोनों धोखा दे रहे हैं दीदी को!क्या करूँ? बहुत प्यासा हूँ! मैं तेरे ऊपर पहले से फ़िदा था!इतने में हम फ़ार्म हाऊस पहुँच गए.

कम से कम दस इंच था या शायद उससे भी बड़ा…मैं अभी उस काले नाग को देख ही रही थी कि उसने मेरे सर को पकड़ा और अपने लौड़े के साथ मेरे मुँह को लगाते हुए बोला… जानेमन अब और मत तड़पाओ… इसे अपने होंठो में भर लो और निकाल दो अपनी सारी हसरतें…मैंने भी उसके काले लौड़े को अपने मुँह में ले लिया… मेरे मुंह में वो पूरा आ पाना तो नामुमकिन था फिर भी मैं उसको अपने मुँह में भरने की कोशिश में थी. मेरी तो आह ही निकल गई…उसकी एक ऊँगली मेरी चूत में भ्रमण कर रही थी !उसने उस स्थान के गीलेपन को छुआ और ऊँगली बाहर निकाल ली… उसे सूंघते हुए… उसने मेरी ऊँगली चाट ली…!!!अब उसने मेरी टीशर्ट उतार फेंकी और अपने मुँह मेरी चूचियों में दे दिया… मेरे होंठों को हाथों से दबा दिया. मैंने झट से उसका लौड़ा निकाला और अपने हाथों में ले लिया और फिर मुँह में डाल कर जोर जोर से चूसने लगी। मैं सोफे पर ही घोड़ी बन कर उसका लौड़ा चूस रही थी और अनिल मेरे पीछे आकर मेरी चूत चाटने लगा.

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ज्योंही मम्मी की बुर पर अंकल ने अपना लंड रखा, मम्मी जोर से फुसकारी मारते हुए बोली- अब मुझे न तरसाओ यार! अब चोद दो!अंकल ने भी फुर्ती से अपने लंड को जोरदार धक्का लगाया और उनका लंड मम्मी की चूत में जा घुसा. आशा करता हूँ सभी चूतों और लौड़ों को मेरी यह कहानी भी पहले वाली कहानियों की तरह ही पसंद आएगी. फिर थोड़ी देर रुक कर चुदाई शुरू कर दी…सबसे पहले उन सब में सबसे सेक्सी रांड श्रुति की चुदाई की.

‘सोनू, अच्छा राजेश रात को कितनी बार करता है… एक बार या अधिक…?’‘वो जब मूड में आता है तो दो बार, नहीं तो एक बार!’ बड़े भोलेपन से उसने कहा. कहानी शुरू करने से पहले बता दूँ कि यह अन्तर्वासना पर मेरी पहली और सच्ची कहानी हैं. और जैसे ही उसने मेरे लंड को पकड़ा मैंने उसके बाल पकड़ लिये। और पकड़े-पकड़े ही ऊपर आ गया और जैसे ही वह चेहरा ऊपर आया, मेरी आँखे फटी की फटी रह गईं और मुँह खुला का खुला….

फिर उसने जूली से मोल-तोल किया तो जूली ने उसको 1000 रुपए में दो घंटे कहा।वो तैयार हो गया।जूली उसकी कमर में हाथ डालकर ले गई। कमरे में जाते ही उस लड़के की हिम्मत बढ़ गई। उसने जूली की गाण्ड को आहिस्ता से छुआ।जूली- अरे आराम से ! अब दो घंटे के लिए मैं सिर्फ तेरी हूँ। क्या नाम है रे?लड़का- जी, सुखबीर ! और तुम्हारा?जूली- अरे क्या तुम तुम करता है? अभी तू मुझे चोदेगा तो क्या मैं तेरी बीवी बनने वाली हूँ. मुझे याद आया… ‘पुष्पा का पुष्प’।मैंने दाएँ स्तन पर से हाथ हटाकर नीचे टटोला। उसकी पैंटी गीली हो रही थी। उंगलियों पर उसकी गर्म चिपचिपाहट महसूस हुई।उत्सुकतावश ही उंगली को नाक के पास लाया। एक अजीब सी गंध… न अच्छी … न बुरी … बस एक बुलावे से भरी, कोई पुरानी याद दिलाती-सी…।मैं उसकी ओर किसी जानवर सा खिंचने लगा। पेट पर चुंबन अंकित करता, पेड़ू की ओर बढ़ता.

चूत पानी छोड़ रही थी… चिकनी हो गयी थी… लंड फिसल कर अन्दर घुसता चला गया… कामिनी के मुंह से सिसकारी निकल पड़ी.

मेरी मार अब…तभी दीदी ने मुझसे वादा लिया- वादा कर कि मेरी शादी के बाद भी मुझे चोदा करेगा !मैंने मान लिया ! तब से तीन साल तक मैं दीदी को चोदता रहा, दीदी गोलियाँ खाने लगी थी।एक दिन घर में कोई नहीं था तो हम दोनों साथ नहाये। तभी दीदी ने कहा- मेरी गांड पर साबुन लगा दे…. सेक्स एक्स बीएफइसके चुदाई के बाद मैं मौका देख कर रोज़ भाभी की चुदाई करता हूँ और हम दोनों बहुत खुश हैं. सेक्सी वीडियो बीएफ भोजपुरियाखैर, जहाँ चाह वहाँ राह!वीना आंटी ( अमित की पत्नी ) कुछ दिनों के लिए अपने मायके गई. तभी विनोद अंकल ने मम्मी के चूतड़ थपथपाये और एक क्रीम की ट्यूब माँ की गाण्ड में घुसेड़ दी.

‘नहीं जवान लड़की की गाण्ड ऐसे नहीं फ़टती है, बस दर्द ही होता है… अब इसे भी तो अपने लायक बनानी है ना… देख इसे भी चोद चोद कर मस्त कर दूंगा!’ जीजू हाँफ़ने लगे थे.

मैंने झुक कर धीरे से उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिये और अधरों का रसपान करते हुये हमारे बदन एक दूसरे को रगड़ने लगे। दोनों के जिस्मों में वासना का उफ़ान भर गया था। लण्ड और चूत एक दूसरे में घुसने की पुरजोर कोशिश कर रहे थे। मेरे हाथ उसके स्तनों को बेदर्दी से मसल रहे थे, उसकी निपल को घुमा कर खींच रहे थे। उसका हाथ मेरे लण्ड पर आ गया। उसने मुझे धक्का दे कर दीवार से लगा दिया और जैसे बेतहाशा लिपट गई।आ…. चुदी हुई रीटा अपने चकराते हुऐ सिर को पकड़ जमीन पर बैठ अपनी बेतरतीब सांसों को सम्भालने लगी. मैंने भी उसके होठों पर अपनी ऊँगली फिराई और हाथ को नीचे खिसकाते हुए उसके गले से होकर मम्मों तक पहुँच गया.

दोस्तो, जब सेक्स के दौरान लड़की को मजा और दर्द दोनों आएँ तो उसके चेहरा बहुत सेक्सी लगता है. उसके चूतड़ों की दरार और उसके भरे हुए और कसे हुए कूल्हे का भी नक्शा बडा खूबसूरत नजर आता था. मुझे टेंट के बाहर से उसकी नंगी चूत तो नज़र नहीं आ रही थी मगर मैंने उसकी परछाई से उसकी गांड का अंदाजा लगा लिया था। सारे कपड़े निकालने के बाद ज़ाहिरा ने ढीला ढाला एक गाउन पहन लिया। मैंने सोचा कि कपड़े बदल कर ज़ाहिरा सो जाएगी इसलिए मैं भी वापस लड़कियों के तम्बू में आ गया।थोड़ी देर तक मैं भी लड़कियों की मस्तियों का मज़ा लेता रहा.

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इस बार मैं पूरे स्तन को हथेली में लेता और निपल समेत जितना मुँह में ले सकता, उतना मुँह में लेता और चूसता. 2-3 धक्कों के बाद ही मेरा पानी भी निकल गया और मैंने शिखा की नर्म, मुलायम और गर्म चूत के कोने कोने को भिगो दिया. मैंने देखा कि विपिन की अंडरवीयर वाशिंग मशीन में पड़ी हुई थी, उसके कमरे में झांक कर देखा तो वो शायद सो गया था.

आज मैं आप लोगों से दिल्ली की हकीकत बयां करने जा रहा हूँ।दिल्ली एक ऐसा शहर जहाँ आप जो सोचते हैं उससे कहीं ज्यादा पाते हैं। जहाँ लोग एक दूसरे को प्यार करते हैं पर मौका मिलने पर पूरा फायदा भी उठा लेते हैं।मैं दिल्ली में छः साल से हूँ इन सालों में मैंने दिल्ली के कई रंग देखे हैं अच्छे भी और बुरे भी ! दिल्ली की लड़कियाँ आधे से ज्यादा मोटी होती हैं पर जो फिट हैं उनका कोई मुकाबला भी नहीं.

मैं मस्ती में आगे पीछे होकर एक हाथ से बैंगन गाण्ड में अन्दर बाहर कर रही थी और दूसरे हाथ से लण्ड हिला रही थी.

मैं काफी देर तक सोनम को ऐसे ही देखता रहा, सोनम वैसे तो उस वक्त बुरके में ही थी मगर उसके चेहरे पर से नकाब हटा हुआ था. उसके बाद हमने बाथरूम में जाकर एक दूसरे को साफ़ किया, लगभग 11 बजे अनिल चला गया और उसके बाद मैंने और ज्योति बातें करने लगे. मैं बीएफ देखना चाहता हूंमैंने कहा- अब तो यह तेरी चूत का बाजा बजा कर ही निकलेगा!फिर क्या था, रात भर हम दोनों भाई बहन ने ऐसी जम कर चुदाई की कि चिंकी की चूत का सुबह तक भोसड़ा बन गई.

”मैंने आंखें बंद कर ली और कह डाला,”आई लव यू !”और उसने बहुत ही सहजता से जवाब दिया,”मैं भी !”और इस बार मैंने पहला कदम उठाया. क्या तो मस्त बला लग रही थी वो!मैंने चूमते हुए उसके स्तन भी दबा दिए।फिर मैंने उसका कुर्ता उतारा!पहले तो थोड़ी देर मस्त स्तनों को ब्रा में से ही दबाने लगा फिर ब्रा उतार कर उसके स्तनों को आजाद कर दिया।उसके मोटे मोटे स्तन बड़े शानदार लग रहे थे। मैंने उसके स्तनों का दूध पीना शुरू कर दिया. कहानी का पहला भाग:बेटा और देवर-1अब आगे-देवर ने मेरी चूत के दाने (भग्नासा) को मुँह में लेकर कुल्फ़ी की तरह चूसा…स्सीईईईई हाआआ देवर जी स्सीईईई ईईईई बस करो स्स्सीईईई देवर जी ब्ब्ब्स्स करो!” मैं बुदबुदाई.

मैंने फ़िर कहा- एक बार मुँह में लो!तब उसने कंडोम के ऊपर से लिया… मैं उत्तेजित हो रहा था… 12-15 मिनट में मैं कंडोम में ही झर गया, फिर भी वो उसी तरह मुँह में लिए हुए थी. इतना मोटा… क्या तुमने पहले इतना मोटा नहीं देखा है?” मुझे शक हुआ कि इसे कैसे पता कि लण्ड के और भी आकार के होते हैं.

अच्छा चलो कोई बात नहीं कभी कभी मुट्ठ मारना भी अच्छा रहता है ?पर आप हैं कौन ?नाम जानकर क्या करोगे ?नहीं पहले अपना नाम बताइये !चलो, मैं तुम्हारी एक चाहने वाली हूँ !कोई नाम तो होगा ?मुझे मैना कह सकते हो ?मैना.

सबसे पहले मैंने उसे आवाज लगाई, वो कुछ नहीं बोली तो मैं समझ गया कि मेरी बहन नींद में है. मैं सारे कपड़े उतार कर नंगी रहूंगी, भाई का जांघिया लूंगी, उसे अपनी चूत पर मसलूँगी और जमकर मस्ती करुँगी. औरऽऽ और ऽऽ जैसी आवाजें निकाल रही थी। मैंने और जोर लगाया और पूरा लंड अन्दर डाल दिया, वो चीखी लेकिन उन्होंने मुझे नहीं रोका। मैंने अब अंदर-बाहर, अंदर-बाहर करना शुरू किया।मैंने उन्हें 20-25 मिनट चोदा, मेरा वीर्य निकल आया और भाभी का भी.

कुमारी लड़की के सेक्सी बीएफ वीडियो मम्मी ने कहा- बहन जी, मेहरबानी कैसी? यह भी तो आपके बेटे जैसा है!मम्मी ने मुझे आवाज़ लगाई, कहा- हैरी, तुम आंटी के घर जा कर सो जाया करो कुछ दिन! आंटी की तबीयत ठीक नहीं है. थोड़ी देर मैं उसकी चूत इसी पोजिशन में मारता रहा फिर मैंने उसको पेट के बल लिटाया और उसके घुटने मोड़ के उसको घोड़ी बनाया.

मैं साधारण कद काठी का हूँ पर बचपन से ही जिम जाता हूं इसलिए अभी भी मेरी बॉडी अच्छे आकार में है. बड़ी मुश्किल से मैं बक्से के ऊपर से उठी… मैंने देखा मेरी चूत से थोड़ा ऊपर बक्से के कोने का निशान पड़ गया था. देखो ये सुन कर मेरा लण्ड तो खड़ा होने लगा है !”यदि आपने ये सब किया तो फिर चोद लेना मुझे ?….

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ऐ… यो काई करो… मन्ने तो गुदगुदी होवै!” वो शरमा कर उठ गई और अपना मुख हाथों से ढांप लिया. मैं अपनी टांगों को बार बार फ़ैला कर अपने आप को व्यवस्थित कर रही थी, पर दर्द कम नहीं हो रहा था. रीटा अपने मुँह पर हाथ रखे हक्की-बक्की सी बहादुर के दस इंच लम्बे और चार इंच मोटे लण्ड को देखती रह गई.

सुर्ख लाल पकौड़े जैसी चूत एक दम गुलाबी रंग की थी। ऊपर अनार दाना, उसके नीचे मूत्र-छिद्र माचिस की तीली की नोक जितना बड़ा। आईला… और उसका फिंच… स्स्स्सी… का सिस्कारा तो कमाल का होगा। एक बार मूतते हुए ज़रूर चुम्मा लूँगा. अनिल मेरे होंठों को जोर जोर से चूस रहा था, मैंने हाथ उसकी कमर पर ढीले से छोड़ रखे थे.

मैंने अपना कंडोम निक्कल दिया लेकिन उसकी चूत अभी तक झरी नहीं थी, वो मुझसे कहने लगी- अपने लण्ड को डाले रखो अभी मेरा मन नहीं भरा…मैंने कहा- कंडोम तो अब नहीं है?तो उसने कहा- वैसे ही डाल दो…तब वो सेक्स के चक्कर में अन्धी हो चुकी थी…वो मुझे जोश में लाने के लिए तुरंत लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी… मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया… फिर उसकी चूत ने लण्ड का स्वागत किया.

जीजू कभी कभी मुझसे भी दो धारी बातें कर लेते हैं… उन्हें टोकने पर उनका जवाब होता था- भई, साली तो आधी घरवाली होती है… साली से मजाक नहीं करेंगे तो फिर किस से करेंगे…?बस एक मीठी सी टीस दिल में घर कर जाती थी. ”हे भगवान्…” अनीता दीदी के मुँह से एक हल्की सी चीख निकल गई- तू सच कह रही है? सोनू लेकर आता है?नेहा उनकी शकल देख रही थी- तुम इतना चौंक क्यूँ रही हो दीदी?”अनीता दीदी ने एक लम्बी साँस ली और कहा- यार, मैं तो सोनू को बिल्कुल सीधा-साधा और शरीफ समझती थी. ‘रोहित चोद दे मैम को… जल्दी कर ना… फिर मेरी बारी भी तो है… ‘मेरा दर्द के मारे बुरा हाल था -‘हरामजादे… बस कर अब… मेरी गाण्ड फ़ट गई है… ‘‘साली रंडी… तू क्या समझती है.

धीरे-धीरे मैं मनीषा के वक्ष की तरफ बढ़ने लगा और उसका एक चूचा अपने हाथ और दूसरा अपने मुँह में ले लिया. जितना सहलाती उतना ही विपिन का मोटा लण्ड मेरी चूत में घुसता सा लगता और मेरे मुख से एक सिसकारी सी निकल जाती. ?मैडम ! आपको बुरा न लगे तो मेरा हाथ पकड़ लीजिए, मुझे तैरना आता है। आपको डूबने नहीं दूँगा। आप बैग को एक हाथ से ऊपर उठाइए तथा दूसरा हाथ मुझे थमा दीजिए।थैंक्यू !उसने अपना हाथ मुझे पकड़ाते हुए आभार व्यक्त किया। हम दोनों अन्य लोगों के पीछे-पीछे संभल कर चल पड़े।अगर बुरा न लगे तो क्या मैं आपका नाम जान सकता हूँ?”मेरा नाम रंजीता है। घर वाले मुझे.

तो उसने कहा- आपको मना किसने किया है? करो!फिर मैंने कहा- यहाँ नहीं, कहीं अकेले में.

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और झर झर करके रति-रस छलक पड़ता है। आभा ने मेरे लण्ड पर जोर लगाया और उसकी चूत लपलपा उठी। लहरें उठने लगी…. मेरा दिल रोज़ उसके लौड़े को चूसने को करता लेकिन मौका और जगह सही ना होने की वजह से कभी आगे नहीं बढ़ पाए. उसकी सिसकारियाँ मुझे और पागल कर रही थी और कभी कभी मैं उसके निप्पल चबा देता तो उससे उसके शरीर में सिहरन दौड़ जाती थी.

उसके हटने के बाद मैं जैसे ही खड़ी हुई, मेरी चूत से पतला पानी जैसा उसका वीर्य टपकने लगा जिसे मैंने अपने पेटिकोट से पोंछा और उसको उसके कमरे में भेजते हुये उसको याद दिलाया कि वो फ़िर दुबारा ऐसा करने की कोशिश नहीं करेगा और किसी से इस बात का जिक्र नहीं करेगा.

रात को फिर वही छबीली की गालियों की आवाज आई… उसका पति निढाल पड़ा था… और खर्राटे ले रहा था. मैं अब आपके सामने आगे की कहानी प्रस्तुत कर रहा हूँ, आशा करता हूँ यह भी आपको बहुत पसंद आएगी।मेरी घरेलू नौकरानी सोनी ने मुझसे चुद कर संतुष्ट होकर कहा- साहब, अपने मुझे वो सब दिया है जो आज तक मेरे पति ने नहीं दिया है, मैं इसका अहसान कैसे चुकाऊँगी?मैंने भी तपाक से बोल दिया- तू मुझे रोज खुश कर दिया कर. पर तुम मेरी बहू हो… बेटी समान हो…” मेरा धर्म मुझे रोक रहा था पर मेरा लौड़ा… वो तो सर उठा चुका था, बेकाबू हो रहा था.