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मैं उठा, अपने कपड़े लिये और कमरे में आ गया क्योंकि अब मामा-मामी के भी जागने का टाईम हो रहा था। सुबह जब मैं सोकर उठा तो पता चला कि शुभ्रा की तबियत ठीक नहीं है इसलिये वो पढ़ने भी नहीं जा रही. सेक्सी देवर भाभी के वीडियोथोड़ी देर बाद रेखा मेरे ऊपर से उतर गयी और फिर दोनों लोग हाफ करवट लेकर एक दूसरे से चिपककर सो गए.

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मेरे लंड से वीर्य की पिचकारियाँ छूट छूट कर साली जी की चूत में भरने लगीं.कुछ देर किस करने के बाद वो बोली- चलो अन्दर कमरे में पलंग पर चलते हैं.

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तभी संजना ने शीना की चूत पर अपनी उंगलियां रख दीं और वह उसकी चूत सहलाने लगी. मैंने अपनी टांगों से अपने अंडरवियर को वहीं फर्श पर निकाल कर एक तरफ डाल दिया. तेरा पूरा जीवन तेरे सामने पड़ा है अभी और मैं तुझे अपने पैसे उधार दे रहा हूं जब तेरी जॉब लग जाये तो बाद में वापिस कर देना, सिम्पल है न!”और मैं घर पर क्या जवाब दूंगी कि मेरे पास पढ़ाई के पैसे कहां से आ रहे हैं?” मैंने सवाल किया.

बेटा, पहली बात तो ये कि जो मैं कहने जा रहा हूं उसे सुनकर तुम ये कभी नहीं सोचना कि मैं तुम्हारे साथ सेक्स सम्बन्ध बनाए रखने के लिए ऐसा कह रहा हूं. करीब 20 मिनट बाद भाभी चरम सीमा पे आ गईं और चिल्लाने लगीं- आहा अह्हह अहह उम्मह और जोर से … अह्ह्ह्ह … मुकेश जोर से अह्ह्ह ओह्ह्ह!भाभी ने उसको जोर से जकड़ लिया और झड़ गईं. बन्दी जब तक मेरे मुँह से नहीं हटी, जब तक कि उसकी चूत की अच्छे से चटाई नहीं हो गयी.

इसमें मेरी जवानी निखर कर आने लगी और मैं अब 25 साल की मस्त लौंडिया सी दिखने लगी. साफ करते करते पता नहीं कैसे, मेरी उंगली चूत के अन्दर चली गयी और कुछ गीला गीला सा लगा.

मंजू जब घर से फरार हुई थी तो उस घटना का मैंने गोपनीय रूप से पता लगाया था.

मैं उसको बच्चों का कमरा दिखा कर बोला- ये कमरा मैंने तुम्हारे लिए बुक कर दिया है.

फिर तैयार कैसे हो गई?तो उसने कहा- पता नहीं कैसे मेरा मन कर गया और मैं अपने आप को रोक नहीं पाई. फिर लंड को उसकी गांड में घुसा कर उस की जोरदार चुदाई चालू कर दी।सुमन की आंखें मुझे ही देखे जा रही थी और मैं भी सुमन को ही देख रहा था. मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखकर जोरदार किस किया ऐसा लगा कि मैं स्वर्ग में हूँ। फिर मैंने उसे किस करते हुए उसके पैंट में हाथ डाल दिया.

मैंने कहा- हां, सच में ही आशीष, तुम्हारे लंड ने मेरी चूत को फाड़ दिया है. लेकिन वो दिखने में कुछ खास सुन्दर नहीं थी और उसका बदन भी दुबला पतला था।सच कहूं तो मैंने उसे देखते ही सोच लिया कि इसकी तो मैं चूत सुजा दूँगा. फिर मैं प्लान के मुताबिक चुपके से मानसी के कमरे में यहां आकर लेट गई और मानसी मेरे कमरे में जाकर लेट गई.

फिर मैंने उसके सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसे उतार कर एक साइड में फेंका और उसकी चूत पर एक जबरदस्त चुम्बन जड़ते हुए उसकी चूत चटाई शुरू की.

मैं- तुम्हारा कोई ब्वॉयफ्रेंड है?दीपाली- हां, पर वो साऊथ इंडिया में रहता है. मैंने अपने खड़े लंड को पैंट के अन्दर सैट किया, चैन बंद की और उसको एक किस करके बिना कुछ बोले वहां से निकल गया. आदमियों की टांगों के बीच में लंड होता है, जिसे चुत में डाल कर चुदाई का मजा लिया जाता है.

मुझे इस तरह अधमरा होता देख, उन्होंने मेरे शरीर को अपने बेड के बीचों बीच ले लिया और चारों दिशाओं में चारों हाथ पैर फैला दिए. मैंने शिखा को अपनी तरफ खींच लिया और उसके होंठों पर किस करके उसके होंठों को चूसने लगा. फिर उसके बाद शाम के खाने के समय जब सब साथ में बैठ कर खाना खा रहे थे तो जागृति मुझे अजीब सी नजरों से देख रही थी.

जिसमें से दो बार उन्होंने मेरी जबरदस्त चूत चुदाई की थी जिसमें मैं और जीजा ही थे जबकि उसके बाद फिर दीदी भी साथ में आ गयी थी.

जब तुम्हारा लंड मेरी चुदाई करता है, तो मेरे जिस्म का पुर्जा-पुर्जा ढीला पड़ जाता है. कमरे में अंधेरा होने के कारण मुझे उसके साथ चुदाई करने में काफी दिक्कत हो रही थी.

दिल्ली कॉलेज की बीएफ फिर आधे घंटे बाद उसने देखा 4 बजने वाले हैं, तो वो उठा और मीरा को चूम कर कपड़े पहनने लगा. नितिन सीमा के गोरे गोरे मम्मों के गुलाबी गुलाबी निप्पलों को मुँह में ले कर चुहलने लगा.

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ऐसा करने से वो दुबारा गर्म हो गईं और जोर जोर से कामुक सिसकारियां लेने लगीं.

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उसने 5 मिनट तक मेरे संतरे जैसे होंठों को चूसा और सारी लिपस्टिक व लिप लाइनर छुड़ा डाली. उन्होंने कहा- थोड़ी देर सो जाओ!तो मैं ऐसे ही नंगा लेट गया और वो कपड़े पहनने लगी. सीमा तुरंत बोली- अरे जान, मैं तो मज़ाक कर रही थी, हम तो इतनी अच्छी दोस्त हैं यार, उस टाइम मज़ा बहुत आ रहा था, क्या करती, दिल करता था तुझे छेड़ने का.

सोच रही थी कि लंड बस अब घुसने ही वाला है मगर वो बार-बार इधर-उधर फिसल जा रहा था. वंश ने मुझसे बिना बोले … साले कमीने ने मेरी गांड में अपना मूसल जैसे लंड को एक ही झटके में पूरा डाल दिया. लगभग दस मिनट के घमासान संभोग के बाद उसकी योनि सिकुड़ने लगी और उसी समय उसने मुझे जोर से जकड़ लिया और अपनी टांगें मेरी कमर में फंसा दीं.

मैं- पक्का न … मुकर तो नहीं जाओगी न?नम्रता- न मेरी जान … जो तुम कहोगे, वो मैं करूँगी.

उन दिनों मैं चाची की चूत को चूसने और उनकी चूत का रस चाटने के लिए बहुत पागल रहता था. वो तो वहाँ कभी-कभी ही आता है, अब मोनी भी वहाँ पर नहीं रहेगी तो गांव का घर तो पहले ही नहीं रहा, अगर रायपुर में थोड़ी बहुत जगह है वो भी छिन जायेगी तो फिर मोनी कहाँ जायेगी. ऐसा करते करते चूत में लंड कब पूरा चला गया, न पिंकी को पता चला न नितिन को महसूस हुआ.

मैंने अपने हाथों से चुत की पंखुड़ियों को खोला और अंकल के मुँह को वहां पर दबाया. लेकिन जितने विश्वास के साथ मैं आगे कदम बढ़ा रहा था मोनी मेरे उस भरोसे को पीछे धकेल देती थी और वह शायद नहीं चाहती थी कि मैं उसकी चूत को भी हाथ लगाऊं. नेहा बोली- पहले मेन गेट तो बंद कर लो?मैंने गैलरी के मेन गेट की कुंडी लगाई और नेहा को दोबारा उठाकर उसके बेडरूम में ले गया.

उसके बाद उन्होंने मेरी चूत में उंगली दे दी और उसे अंदर बाहर करने लगे. चूंकि पहला दिन था, तो पहचान ना होने के कारण मैंने किसी से भी बात नहीं की थी.

इतनी देर में उसके मोबाइल पर मीरा का संदेश आ गया कि आ जाओ निखिल सो गया है. बस उसका इतना कहना ही था कि मैंने आव देखा न ताव लंड को गांड में एक ही झटके में पेबस्त कर दिया. ऐसा हुआ कि एक दिन जब वो कोचिंग से बाहर आयी, तो हम कुछ खाने के लिए मैकडोनाल्ड चल पड़े.

से बहुत मिन्नतें करने के बाद वह कुछ रूपये में एक बर्थ देने के लिए तैयार हुआ.

इसी आनंद का लुत्फ उठाते हुए मैं उसकी योनि में ही झड़ने लगा और सारा वीर्य उसकी योनि में छोड़ने के बाद उसके ऊपर लेट गया।दो मिनट तक लेटे रहने के बाद हम दोनों उठे और एक-दूसरे को किस किया। काफी देर हो गई थी और खेत में किसी के आने का भी डर था. अब तक मैं भी अन्दर आकर दरवाजे को बन्द करके अपने एक-एक कपड़े उतारता गया और इससे पहले वो अंधेरे कमरे को लाईट जलाती, मैं भी पूर्ण रूप से नग्न हो गया. मैंने उसे सहलाते सहलाते ही एक झटका और मारा तो लंड थोड़ा सा अन्दर और घुस गया.

एक पल संतोष जी के लंड को देख कर मैंने भी बोल दिया- हां चोद लेना … पर अभी नहीं … कल आ जाना!संतोष जी बोले- अच्छा ठीक है … आज कम से कम लंड तो चूस कर जा. मैंने हिम्मत कर के भाभी से कहा- भाभी एक बात कहूँ?भाभी- बोल न?मैं- आप किसी को बोलोगी तो नहीं?भाभी- हां बोल ना … मैं किसी को कुछ नहीं बोलूंगी.

पापा ने मुझे पार्सल, जो वाचमैन ने दिया था, को लेकर एयरपोर्ट आने को कहा. इसीलिए मैंने तुमसे बिना पूछे ही तुम्हारा पूरा बीज अपने अन्दर ले लिया. क्या हुआ बॉस? परेशान दिख रहे हैं आप?” मैंने कहा।दीपिका! मेरे सिर में बहुत दर्द है.

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और ट्रेनिंग खत्म होने के बाद मैंने अपने दोस्तों के साथ थोड़ा समय बिताया.

शायद उसकी कमनीय काया को लेकर आपके लंड ने भी समझ लिया होगा कि वो सांवली सुन्दरी कितनी गर्म माल होगी. मेरी बेटी भी आह्ह्ह ह्हह्ह … आय्ह्ह… अय्य्य्ह ह्ह्ह करके हिल रही थी और अब मस्त चुदवा रही थी. मैंने भी कहा- चलो जो हुआ, अच्छा हुआ! तुम को भी एक अलग अनुभव मिला और मुझे भी!वह मुस्कुराती हुई बोली- अनुभव तो ठीक है.

नम्रता- अरे वाह इसका मतलब जल्दी ही तुम्हारे लंड और मेरी चूत के बीच जंग छिड़ने वाली है. बाहर आकर मैंने बाईक निकाली और रास्ते से मिठाई की दुकान से पेड़े का डिब्बा खरीद कर कुछ ही मिनट में अपने घर आ पहुंचा. लड़की पेशाब करते हुए वीडियोमेरे लंड को उसने अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत पर सेट करके उसने अपने शरीर का भार मेरे लंड पर छोड़ना शुरू कर दिया.

कंपनी ने मुझे मेरी नियुक्ति का पत्र भी दे दिया और अगले हफ्ते ज्वाइन करने को कहा. मेरे घर पर मेरी माँ और एक छोटी बहन है। पिता जी कुछ साल पहले गुजर गए तो घर की जिम्मेदारी माँ और मुझ पर आ गई.

मैं हंस कर बोली- क्या मैं पहले सुन्दर नहीं थी?वंश बोला- वो बात नहीं है मम्मी. आई लव यू प्रतोष!मैंने भी कहा- सेम टू यू डार्लिंग।तो दोस्तो कैसी लगी मेरी यह कहानी आप सब अन्तर्वासना पाठकों को?मुझे आपके जवाब का इंतजार रहेगा।आप सबका दोस्त प्रतोष सिंह फिर अगली बार हाज़िर होऊंगा एक भाभी की चुदाई के साथ! और आशा करता हूं कि आप सब मुझे आप अपना प्यार[emailprotected]पर जरूर भेजेंगे।तब तक के आप सब अपना ध्यान रखिए और पढ़ते रहिये कामुक और मजेदार कहानियां![emailprotected]. मुझे लंड चूसने के कारण ही पेशाब पीने में भी कोई शर्म या हिचक नहीं आई थी.

आशीष बोला- वाह बंध्या, तुम तो ऐसे कर रही हो जैसे रियल में ही लंड चूस रही हो. ”वो … वो … मुझे डर लग रहा है ज्यादा दर्द तो नहीं होगा ना?”तुम दर्द की बिल्कुल चिंता मत करो बस जैसा मैं कहूं करती जाओ और अपने आपको रिलेक्स कर लो. लाल लालिमा के साथ हल्का सफेदीपन उस जगह दिखायी पड़ रहा था, जहां पर इन दिनों मेरे लंड का आना जाना था.

यह रस भरी चुदाई स्टोरी जब अपने चरम पर पहुंचेगी, तब आपको खुद ब खुद अपने आइटम पर हाथ ले जाना ही पड़ेगा.

अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई हो तो मैं साना भाभी के साथ उसकी गांड की चुदाई भी जल्दी ही लिखूंगा. उस दिन मैंने उसको अलग अलग पोज़ मैं एक घंटे में दो बार चुदाई की और वापस आने के लिए तैयार हो गए.

आओ, हम दोनों लोग अपने दिमाग के फितूर लगाते है और सेक्स का मजा लेते हैं. पानी गर्म करने के लिये वो एक बर्तन नीचे की शेल्फ से निकालने के लिये झुकी, मैंने झट से उसकी गांड घिसाई झट से कर दी. रीना के सारे कपड़े उतार कर मैंने उसे पूर्ण रूप से नग्न कर दिया। यह करते हुए मुझे पिछली बार का हाफ स्वैपिंग वाला किस्सा याद आ गया, जिसमें उस दिन उसे शर्म आ रही थी.

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दीपिका कहने लगी- वैसे तो मेरी चूत दुःख रही है परंतु आपका साथ मुझे अच्छा लगा. आप सभी ने मेरी पहली कहानी ‘मैं और मेरी प्यासी चाची’ को ख़ूब पसंद किया. जब उसकी नजर जब मेरी नजर से मिली और उसने देखा कि मैं उसकी नंगी चूचियों को देख रहा हूँ, तो वो शरमा गई.

मुझे नहीं पता था कि रंजना ने इससे पहले किसी के साथ संभोग किया था या नहीं, लेकिन मेरा तो यह पहली बार था. मैंने उससे सीधे सीधे पूछ लिया- अगर कोई तेरी चुत चाटे, तो कैसा लगेगा तुझे?दीपाली- हां मुझे एक बार एक्सपीरियंस तो करना है. सेक्सी चूत लंड की सेक्सीफिर मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर उनकी साड़ी ऊपर करना चाहा, तो मौसी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरी तरफ देखकर इंकार में अपना सर हिलाया.

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मेरा और उसका कमरा साथ-साथ हैं और मैंने उसके कमरे में देखने के लिए बीच में एक मोरी भी कर ली. तो वो कहने लगे- मेरे ऊपर नहीं … ये तुम्हारे ऊपर है कि तुम क्या चाहती हो, पक्की नौकरी या टाइम पास नौकरी?मैं बोली- वो कैसे?वो मेरा हाथ दबाते हुए बोले- अगर जैसा मैं कहूँ, तुम वैसा करने को राजी हो जाओ तो कल से ही तुम्हारी नौकरी यहाँ पर पक्की समझो.

मेरे लंड की चिकनाई उसकी चूत को पूरा गीला कर चुकी थी और अब मैं भी बस झड़ने वाला था. फिर लंड को उसकी गांड में घुसा कर उस की जोरदार चुदाई चालू कर दी।सुमन की आंखें मुझे ही देखे जा रही थी और मैं भी सुमन को ही देख रहा था. दी जब नहाकर बाहर आई तब मैंने देखा कि उन्होंने मेरा एक शर्ट और नीचे पजामा पहना है.

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वो बिलखते हुए उस दिन को याद करने लगी जब उसकी मम्मी ने मुझसे पूछा था कि मेरे कर्मचारी नितिन को अपना ऊपर वाला कमरा किराए पर दे सकते हैं क्या? तब मैंने ही हाँ किया था, अब मेरी वो सहमति मेरे गले की फांस बन गई. मुझे पूरा भरोसा था कि इसके ऊपर से भांग का नशा जल्दी नहीं उतरने वाला हैं. पर मैंने समय और मौके की नजाकत देखते हुए खुद ही अपना पैंट और अंडरवियर निकाल दिया अब मैं सिर्फ एक टीशर्ट में था.

अब खुश?साली जी ने मुझे उलाहना सा दिया और अपनी चूत से बहता वीर्य नैपकिन से पौंछने लगी. ईशश … अंकल क्या कर रहे हो?”नीतू तुम्हारी चुत की खुशबू सूंघ रहा हूँ. वह बर्दाश्त कर गई और इस बात का फायदा उठाते हुए मैंने थोड़ा और जोर से उसकी चूचियों को गूथने लगा.

रमेश को पता नहीं क्या सूझा कि वो बोला- खाना हो गया हो तो अब पानी भी पी ले साली रंडी. मैं भी उसकी बात रखते हुए उसके साथ हमारे ऑफिस के बगल रूम में चला गया, जहां हम लोग लंच या रेस्ट करने के लिए जाते हैं. अच्छा ये बताओ कि तुम्हें सेक्स में क्या क्या करना पसंद है?मैं बोला- मुझे लंड चूसना सबसे ज्यादा पसंद है.

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आपको मेरी ये सच्ची सेक्स कहानी कैसी लगी, कमेन्ट करके जरूर बताइएगा … ताकि मुझे अगली कहानी लिखने की प्रेरणा मिले.

वसुन्धरा की आँखें बार-बार झुकी जा रही थी, होठों पर हल्की सी मुस्कान आ गयी थी और माथे पर लिखा 111 कब का विदा ले चुका था, आवाज़ में से तल्ख़ी गायब हो चुकी थी और उस के हाव-भाव में आक्रमकता की बजाये एक शालीनता सी आ गयी थी. ब्लू सेक्सी पिक्चर ओपनमैं डरते हुए उठ कर बाहर गया तो देखा कि शिखा किचन में चाय बना रही थी. ब्लू फिल्म करने वालाउसकी कमर को खींच कर उसकी चुत से अपने लंड के फ़ासले को इतना कम कर दिया कि बस कपड़े ना होते, तो दोनों की बीच कोई दूरी ना रह गयी होती. दो खाटों की वजह से पूरा लंड उसकी चुत में डालना मुश्किल हो रहा था … इसलिए बस लंड का अगला हिस्सा ही अन्दर जा पाया था.

अब उसने मुझे घोड़ी बनाया और मेरी गांड को चाट कर पूरा गीला किया और अपने लंड पर खूब सारा थूक लगा लिया.

चूत और लंड के घर्षण से जो थप-थप की आवाज आ रही थी, वो पूरे कमरे में आराम से सुनाई पड़ रही थी. जैसा कि मैंने बताया कि मैं जिस दिन घर में अकेली रहती हूँ, तो वो रात को मेरे घर रुक जाती है. वो रोने लगी- अंकल मैं क्या करूँ मुझे बहुत दर्द हो रहा है … ऐसा लग रहा है आपका लंड नहीं, चाकू अन्दर गया है.

अरे आप यहां क्या कर रही हैं इतना ठंडा हो रहा है?भाभी- मेरी छोड़, तू इधर क्या कर रहा है?मैं- बस यूं ही टाइम पास. मैंने धीरे से भाभी के ऊपर हाथ रखा पहले उनके होंठों पर, फिर मम्मों पर हाथ फेरा. वो तीनों में से एक मेरे पास आतीं और मेरे दोनों हाथ पकड़कर अपने मम्मे पर रखवा कर मुझे मम्मे दबाने का इशारा करतीं.

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जैसा कि मैंने बताया कि मैं जिस दिन घर में अकेली रहती हूँ, तो वो रात को मेरे घर रुक जाती है. वास्तव में कोई भी लड़की उसे देख लेती थी, तो वो उसी पल नितिन की दीवानी हो जाती थी. मैंने उसको अपनी बांहों में लेकर कहा- क्यों तू मुझे प्यार नहीं करता क्या?उसका बदन मेरे इस तरह से उसको अपनी बांहों में लेने से एकदम से झनझना सा गया और मेरे मम्मों की गर्माहट से उसका लंड मुझे खड़ा सा होता महसूस हुआ है.

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उसने कहा- लंड पहले से भी बहुत सख्त लग रहा है, लगता है कि चूत की सिलाई उधेड़ देगा.

उन दोनों एक दूसरे को देखा और करीब आ गए और फिर से एक दूसरे में सामने आकर एक दूसरे को चूमने लगे. उन्होंने अपने होंठों को मेरे होंठों से लगा दिया और मेरे लबों को चूसना चालू किया तो मैंने एक बार उनको हटाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं हटे. मस्सगे सेक्सी वीडियोबन्दी जब तक मेरे मुँह से नहीं हटी, जब तक कि उसकी चूत की अच्छे से चटाई नहीं हो गयी.

अनिल भैया ने पास ही के ड्रावर में से लिग्नोकान नाम की ट्यूब निकाली और मेरी गांड में उसकी पाइप को अन्दर तक डाल कर दवाई को अन्दर तक डाल दिया. ”अंकल ने मेरी पीठ की मालिश करनी शुरू कर दी, अपना हाथ मेरी गर्दन से कमर तक घुमा रहे थे और वही प्रक्रिया अपने होंठों से भी दोहरा रहे थे. उसके घर में फ्रेश होने के बाद तुषार मुझे अपने बाइक पर बिठाकर उधर ले आया, जहां मैंने एक्टिवा रख दी थी.

मेरे दूसरे हाथ से उसका मुंह बन्द करके मैं लगातार उसकी गांड पेलता रहा. क्या वसुन्धरा जी! आप की चुनरी पीछे से लहंगे के अंदर फंसी थी और आपको पता ही नहीं … वही निकालनी है.

मैंने उसके गाल पर एक किस करते हुए हंस कर कहा- हम्म … मुझे लग रहा है अब तू मेरा ब्वॉयफ्रेंड बनने लायक हो गया है.

मैंने वसुन्धरा की आँखों में झांकते हुए उसको अपने अंक में दोबारा कस लिया और उस होठों का एक नाज़ुक सी छुवन वाला चुम्बन लिया. इतना बोलने के बाद पैकेट खुलने की आवाज़ आई और थोड़ी देर कुछ सुनाई नहीं दिया. वीर्य की आखिरी बून्द तक दीपिका ने चुदाई का आंनद लिया और अंत में मैं उसकी चूचियों और पेट के ऊपर पसर गया.

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इतने में भी जब मन नहीं भरा तो मैंने रात को सोते समय फिर से उसकी योनि की चुदाई के आनंद के बारे में सोच कर फिर से लिंग को तेजी के साथ हिलाते हुए मुट्ठ मारी. एक तो नशीले बदन की नशीली जांघें और ऊपर से उस पर लगी हुई नशीले अमृत की बूदें … आअह आआह बहनचोद क्या कहने !!!तभी बाली रानी कूद के मेरे पास नीचे आ गई और लिपट के मेरे मुंह पर चुम्मियों की झड़ी लगा दी. फिर उन्होंने मुझे अपने से अलग किया और करवट लेकर मुझे चिपकाते हुए बोले- नम्रता, तुम्हारा रस तो बहुत ही स्वादिष्ट था.

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भाभी बोलीं- किसे?मैंने भाभी को उस लड़की के बारे में सब कुछ बता दिया. वसुन्धरा! आज तुम बहुत ऊपर उठ गयी, मैं तो किंचित शूद्र प्राणी मात्र हूँ लेकिन तेरी ज़ुस्तजू ने एक ज़र्रे को आफ़ताब बना दिया, एक अदना को आला कर दिया. दो खाटों की वजह से पूरा लंड उसकी चुत में डालना मुश्किल हो रहा था … इसलिए बस लंड का अगला हिस्सा ही अन्दर जा पाया था.

मूत्र विसर्जन के बाद वो किचन में गया और वहाँ से दूध की मलाई ले के आया. नवरात्रि की रात को गरबा खेलने के बाद जब रुमित, भार्गव, तुषार और मैं जब घर आने के लिए निकले.

उन्होंने मेरे दूधों को जोर से चूसना शुरू कर दिया और मैं तड़पने लगी.

शाम को जब मैं घर आया तब देखा कि पापा के एक दोस्त मेरे अंकल की बेटी जिसका वास्तविक नाम मैं नहीं बताना चाहता, वो आई हुई थी. तभी तुषार ने भार्गव से कहा- क्या यार … बस इतना ही पावर था … चल तू आगे चला जा … मुझे मोर्चा सम्भालने दे. फिर मैंने एक हाथ नीचे डाल कर अपना अंडरवियर नीचे खिसका दिया, जिससे मेरा नंगा खड़ा लंड उसकी चूत के पास के एरिया में पहली बार टच हुआ.

लंड से चूत में मजे लेने वाली सारी ही गर्म चूत मेरी दीवानी हो गयी हैं. उसे थोड़ा दर्द हो रहा था। लेकिन मुझे बडा मज़ा आ रहा था। वो भी मुझे सहयोग कर रही थी। फिर मैं उसकी गांड में झड़ने ही वाला था कि चाची ऊपर आयीं और दरवाजा खटखटाया. मैंने देखा, लड़की ने सामने से अपना टॉप उठाया और उसमें से अपने बड़े बड़े, गोल और दूधिया मम्मों को बाहर निकाला.

इस फूल से जिस्म को, जिसे मैं इतना चाहता हूँ … उसे मैंने कितने सारे जख्म दिए है.

दिल्ली कॉलेज की बीएफ: हम तीनों बाहर आ गए और एक दूसरे के भीगे हुए बदनों को चाट-चाट कर सुखाने लगे. अचानक ही मुझे अपने ही दिल की धड़कन साफ़-साफ़ सुनाई देने लगी और मुझे एक अनजानी सी बेचैनी महसूस होने लगी.

तो मीरा ने पलट कर रितेश को उठाया और ज़ोर का चूमा लेकर उसके होंठों को काटते हुए कहा- अभी नहीं, आज रात का इन्तजार करो, आज पूरा मजा मिलेगा. मुझे लगने लगा कि मेरा लंड अगर ज्यादा देर तक चादर से रगड़ खाता रहा तो माल कभी भी निकल सकता है। मैं सीधा होकर शुभ्रा के बगल में बैठ गया. प्लान के अनुसार मैं खाना खाने के बीच में उठा और रसोई में जाकर पैग बनाया और पीकर खाली गिलास लेकर चला आया.

अंकल ने मेरी तरफ देखा और मेरी पैंटी नाक के पास ले गए और उसे सूंघने लगे.

क्योंकि हमारा घर यहां दिल्ली में है तो वो महीने में एक बार ही घर आ पाते हैं।मेरे ससुर जी सेना से सेवामुक्त हैं और अधिकतर घर पर ही रहते हैं।मेरी ननद सुमीना अभी बी ए तृतीय वर्ष की छात्रा है और देवर एक प्राईवेट कम्पनी में काम करता है।मैं शादी के बाद छः महीने तो अपने पति के साथ ही रही. रमेश के लण्ड पर खीर का दबाव एक गद्दे की तरह लग रहा था। थोड़ी देर में रिया की गांड रमेश के घुसपैठिये लण्ड से अभ्यस्त हो चुकी थी।रमेश रिया की गांड में लंड को रखे हुए उसकी गांड का पूरा पूरा अंदाजा लगा पा रहा था. फिर मैंने अपना हाथ उसकी कमर से हटाया और उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया.