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मैं समझ गया और उसको बाहों में लेकर एक प्यारा सा किस किया और समझाया कि यह सब जरूरत है, आपने कुछ गलत काम नहीं किया है.पूरा कमरा आंटी की सिसकारियों से गूंज रहा था और वो सिसकारियाँ मुझे अच्छी लग रही थी.

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कभी तो चाची अपनी अंगुली मेरी गाण्ड में चलाती तो कभी जीभ को उसमे घुसाने का यत्न करती.फिर हम लोग बिस्तर पर लेटे, मैंने उसे बातो-बातो में छुआ तो उसने कोई विरोध नहीं किया.

और मोना की घाटी के पास अब एक बेलगाम सा नाग नज़र आ रहा था।तभी अब्बास ने मोना के अधरों को आज़ाद किया और चेहरा उठाकर मोना की शक्ल को देखा- क्यूँ डार्लिंग…. हिंदी बीएफ भेज उसके हटने के बाद मैं जैसे ही खड़ी हुई, मेरी चूत से पतला पानी जैसा उसका वीर्य टपकने लगा जिसे मैंने अपने पेटिकोट से पोंछा और उसको उसके कमरे में भेजते हुये उसको याद दिलाया कि वो फ़िर दुबारा ऐसा करने की कोशिश नहीं करेगा और किसी से इस बात का जिक्र नहीं करेगा.

फ़िर मैंने पढ़ाई की तरफ ध्यान देना ठीक समझा क्योंकि मेरा लास्ट सेमेस्टर था और पेपर भी आने वाले थे.

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शालू- बहनचोद… अ आ आह और चाट साले! तेरी माँ की चूत!मैंने मुँह हटा कर उसकी चूत में उंगली डाल दी और मैं भी गाली देने लगा. मैंने उसको दोपहर के खाने के बारे में पूछा तो उसने बताया कि कुछ भी बना लो पर दो बजे से पहले उसको डिस्टर्ब ना करूं. क्या हुआ सर ?कुछ नहीं चलता हूँ श्रेया …मैंने कहा- कुछ पियेंगे ??उसने कहा- हाँ दूध.

धीरे धीरे मेरे हिम्मत भी बढ़ गई और मैं थोड़ा नीचे को सरक गया और पूरा जोर लगा कर अपने पैरों से उसके स्तन मलने लगा. अब मैंने देर करना उचित नहीं समझा और लंड को बाहर खींच कर जोर का धक्का दिया और पूरा लंड जड़ तक उसकी गांड में समा गया. तो मैं उसके साथ बैठ गई।वैसे भी लड़का इतना सेक्सी था कि उसको मना करना मुश्किल था। रास्ते में उसने अपना नाम अनिल बताया। मैंने भी अपने बारे में बताया। थोड़ी आगे जाकर उसने कहा- भाभी अगर आप गुस्सा ना करो तो यही पास में से मैंने अपने दोस्त से कुछ किताबें लेनी थी.

मगर वो ही क्या उनके सारे दोस्त मेरे दिल की बात समझ गये…वो सारे मेरे गहरे गले में से दिख रहे मेरे कबूतर, मेरी गाण्ड और मेरी मदमस्त जवानी को बेचैन निगाहों से देख रहे थे और राठौड़ अंकल तो मेरी पीठ से हाथ ही नहीं हटा रहे थे।फिर उनके लिए खाना बनाने के लिए मैं रसोई में आ गई. जब मैंने उसको सहलाया, तब 1-2 मिनट बाद बोली- आज के बाद मैं तुम्हारा चेहरा भी नहीं देखना चाहती…मैंने उसको बताया- जान, पहली बार में तो दर्द होता ही है… देखो पूरा चला गया है अब दर्द नहीं, बस मज़ा है…. थोड़ी देर में किसी ने मुझे पीछे से आवाज लगाई, मैंने मुड़ कर देखा तो वो चित्रा थी, वो बोली- मैं कैसी लग रही हूँ?चित्रा सिर्फ ब्रा-पेंटी पहने थे और वो किसी परी से कम नहीं लग रही थी.

उसने पूछा- कहाँ जाना है आपको?…बोदला!उसने अंदर आने का इशारा किया और मैं चुम्बक की तरह आगे वाली सीट पर बैठ गया. भाभी बोली- मजा आ गया पहली बार गांड मरवाने में! बहन का लौड़ा, मेरा पति तो मेरी गांड चोदता ही नहीं है.

‘दीदी… प्लीज, बुरा मत मानना… मुझे करने दो!’‘आह विनोद… यह क्या कर रहे हो… मुझे तुम दीदी कहते हो…?’‘प्लीज़ दीदी… ये तो बाहर वालों के लिये है… आप मेरी दीदी तो नहीं हो ना.

‘अरे दीदी अपनी जगह है, साली अपनी जगह, फिर तुम आधी घर वाली तो हो ही, तो चुदवाने का हक तो तुम्हें है ही… चल अब मस्त हो जा… चुदवा ले!’ जीजू ने लण्ड घुसेड़ते हुये कहा.

आंटी ने कहा- सागर अब रहा नहीं जा रहा है, तुम मुझे चोद दो!मैंने कहा- ठीक है आंटी!आंटी की दोनों टांगों को मैंने अपने कंधों पर रखा और लंड को उसकी चूत पर रखा और एक धक्का मारा. पुराने वाले टीटी जिसका नाम मुझे अभी तक पता नहीं था उसने अपने साथी से मुझे मिलवाया ‘मैडम ये है मेरा दोस्त वी राजू. उसने मुझे जन्नत का मज़ा दिलवा दिया…थोड़ी देर बाद वो मेरे मुँह में ही झड़ गयी… और मैंने उसका पानी हाथ से साफ़ कर दिया और फिर चूत चाटनी शुरू कर दी.

घर पहुँचने के काफी देर बाद तक मेरे जहन से बस और कार के सफ़र का फर्क निकल नहीं पा रहा था, मैं सोच रही थी कि कितना सुखी रहता है कार में सफ़र करने वाला! ना धूल मिटटी, ना गर्मी, ठाठ से ए. जब मम्मी लहँगा उतारने के लिए खड़ी हुई तो मुझे उन्हें देख कर पता चला कि मेरी मम्मी कितनी सेक्सी दिखाई देती है. !!! हा ह़ा हा हा!!मंत्री मेरी तरफ बढ़ चला, तो भीड़ से आवाज़ आई- मंत्री जी छुइएगा नहीं! कहीं पानी न छोड़ दे राण्ड.

ह…मैंने अपनी पिचकारी छोड़ी और उधर वो भी मुझे जोर से कसती हुए अपनी आँखें बंद करके बड़बड़ाने लगी- आ.

मेरी उंगली उन की चूत में और उन के चुचूक मेरे मुँह में और मेरा लंड उनके हाथ में!उन की सिसकियाँ और तेज़ होती जा रही थी- अह्ह्ह् आह्ह्ह्ह ओह ऊऊफ्फिर मैंने माँ से कहा- मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चख तो लो!और लंड उनके मुँह में रख दिया और वो बड़े प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी. ”मैंने उसे नंगी ही लिपटा लिया…कोमल बेटी… शुक्रिया… तूने मेरे मन को समझा… मेरी आग बुझा दी. मैं: यदि तुम कुछ कह नहीं पाओगे तो मैं कैसे तुम्हारी कुछ सहायता कर पाऊँगी…?वो कुछ नजदीक आया और अपने दोनों हाथों से मेरे हाथ पकड़ कर बोला- आप सच में बुरा नहीं मानेंगी ना.

!!!मैंने मन में सोचा : वैसे मम्मियों को ना, अपने छोड़ के औरों के बच्चे अच्छे लगते हैं…!!!वेदांत भी ना जाने क्या सोच रहा होगा. फिर उसने कहा- क्या तुम और पैसे कमाना चाहते हो?तो मैंने हाँ में सर हिला दिया तो उसने एक पेपर पर दो मोबाइल नंबर लिख कर दिए और कहा- ये मेरी ऑफिस की सहेलियाँ हैं. और मैंने उसका बायां चुचूक होंठों से चूसना शुरू कर दिया और दायें पर उंगलियाँ चलाने लगा.

!!!मैं राजा के हाथ लुट चुकी थी और कई मर्द मुझे अब भोग चुके थे… राजा की बाकी दासियों की तरह मैं भी उसके लण्ड की दीवानी हो चुकी थी.

रीटा ने सोचा काश बहादुर की लेडी सायकल होती और वह शान से बहादुर के लण्ड पर बैठ कर स्कूल जाती. फिर ?दूसरे हाथ की अंगुली पर तेल या क्रीम लगा कर एक अंगुली अपनी गांड में भी तो घुसा मेरी तरह ?उस से क्या होगा ?चुतिया है तू एक नंबर का ?कैसे ?अबे मुट्ठ मारना ही नहीं आता तुम्हें ?अच्छा तुम समझा दो ना ?देखो मुट्ठ मरते समय एक अंगुली अगर गांड में डाल ली जाए तो मज़ा दुगना हो जाता है !ठीक है ऐसा ही करता हूँ !आआ….

हिंदी बीएफ भेज सिनेमा हाल में घुसते हुए निशा ने मेरा हाथ पकड़ लिया क्योंकि वहाँ काफी अँधेरा था। हम मूवी देखने लगे।मूवी रोमांटिक थी. मैंने अपनी पैंट खोली और अपना लंड ले जाकर ज्योति के मुँह के पास ले गया तो ज्योति ने खुद ही उसे पकड़ा और चूसने लगी क्योंकि वो इस खेल में काफी माहिर खिलाड़ी थी तो वो सब कुछ जानती थी और काफी देर तक मेरा लण्ड चूसती रही.

हिंदी बीएफ भेज पापा मम्मी भी गए हैं ! तुम चिंता मत करो ! तुम बस मेरी चूत को चीर दो !मैंने कहा- नहीं दीदी ! यह तो गलत है, तुम तो मेरी बहन जैसी हो !उसने कहा- क्या भाई क्या बहिन ? यह ज़िन्दगी का असली आनन्द ……. पूरा तन चुका था उसका लण्ड, मुझे बहुत स्वाद लग रहा था, अपनी ही धुन में मैं लगी पड़ी थी.

साथ में चूमा-चाटी भी कर रहा था …चोदते हुए चुम्बन में बड़ा मजा आया … सच में लग रहा थे जैसे जन्नत में पहुँच गया हूँ …हमने उस दिन जी भर चुदाई की…हर नये स्टाइल से चोदा उसे …दो घंटे में तीन बार चुदाई करने के बाद हम कपड़े पहन कर लॉन्ग-ड्राइव पर निकल गए …फिर हमने कई बार चुदाई की…भाभी को भी चुदाने का मन करता … लेकिन मीनाक्षी हमेशा घर में रहती, जिस कारण वो नहीं चुदा पाती थी ….

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इतना तो पता चल ही गया था कि विश्रांती को लंड चूसने में बहुत मजा आता है… रेशमा ने इतने प्यार से कभी नहीं चूसा था… फिर जब विश्रांती मेरे लंड से खेल रही थी… मैं विश्रांती की चूची को मज़े देने लगा…. मेरा इतना बुरा हाल था कि अब मुझसे खड़ा होना भी मुशकिल लग रहा था। मैं वहीं पर लेट गई। हम सभी नंगे ही एक ही बिस्तर में सो गये। फिर अचानक मेरी आँख खुली और मैंने समय देखा तो 3 बजे थे. अगले दिन मैं दिए पते पर पहुँच गया!दरवाजा खुला, आज आकांक्षा कल से ज्यादा स्मार्ट लग रही थी!उसने मुझे चाय के लिए पूछा, मैंने मना कर दिया.

आगे मेरी जिंदगी में क्या-क्या हुआ! जैसे उस रात भाभी के कमरे में कौन था और आगे क्या-क्या हुआ, यह मैं बाद में लिखूँगा!अपनी राय बताने के लिए मुझे मेल कीजिये![emailprotected]. मैं इसी उधेड़बुन में थी कि तभी वो आगे बढ़ा, उसने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और मेरे ऊपर चढ़कर. ‘हिच, मां की लौड़ी, तेरी चूत मारूँ… चिकनी है भाभी…!’ अब उसकी गालियाँ मुझे बहकाने लगी थी.

अगले दिन मैं कॉलेज़ से लौटा, माँ ने कहा- चलो जल्दी से कपड़े बदल ले, मैं खाना लगाती हूँ!और वो रसोई में चली गई.

तभी मैंने अमिता को खड़ा किया और घोड़ी बना कर पीछे से उसकी चूत मारने लगा और शालू भी अब लण्ड मांगने लगी. तेरा मूत नहीं निकाल दिया तो मैं भी मोना नहीं।अब्बास- और साली अगले नौ महीने में तेरे से बच्चा ना निकलवा दिया तो मैं भी अब्बास नहीं।मुकाबला शुरू हो चुका था…अब्बास ने जोरदार मुक्का मोना की तरफ घुमाया, मोना सावधान थी. मैंने पूछा- कैसे?देवर ने याद दिलाई कि बाथरूम के साइड वाले गेस्ट रूम में जाकर कर सकते हैं.

मैंने उसके एक स्तन को पंजे से पकड़ा और ज्यादा से ज्यादा मुँह के अन्दर लेकर चूसने लगा…‘आह. रीटा जैसी सुन्दर लौंडिया की चूत देखने के चक्कर में बहादुर बैठ कर कांपते हाथों से रीटा की कच्छी को कमर से नीचे खिसका कर घुटनों तक सरका दी. मेरी आँखें बंद थी, इस वकत सुनील पता नहीं क्या कर रहा था मगर उसने अभी तक मुझे नहीं छुआ था.

मैंने उसके गाण्ड से अपना लंड निकाला और उसे अच्छे से पौंछा…थोड़ा सा तेल लगाया और रानी की चूत में फिर से डाल दिया. ”हे भगवान्…” अनीता दीदी के मुँह से एक हल्की सी चीख निकल गई- तू सच कह रही है? सोनू लेकर आता है?नेहा उनकी शकल देख रही थी- तुम इतना चौंक क्यूँ रही हो दीदी?”अनीता दीदी ने एक लम्बी साँस ली और कहा- यार, मैं तो सोनू को बिल्कुल सीधा-साधा और शरीफ समझती थी.

वो वैसा ही गुमसुम बैठा घास की ओर देखे जा रहा था…मैंने उसका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने की एक और कोशिश की…मैं : देखो वेदांत ! हाथ छोड़ के …!!!!बस मैंने इतना बोला ही था और एक झटके के साथ में झूले की उच्चतम छोर से नीचे गिर पड़ी…!!वो दौड़ा दौड़ा मेरे पास आया. कि अचानक फिर वो ही सवाल मेरे कानो में गूंजने लगा…क्या तुम कभी अपनी मम्मी-डैडी से दूर हुई हो. अचानक उन लोगों के अन्दर आने से मैं चौंक गई और जल्दी से अलग होकर अपने कपड़े उठा कर अपना बदन छुपाने की कोशिश करने लगी.

तो वो समझ गई कि मैंने उससे झूठ कहा था, बोलो- नौटी बॉय !और कह कर फिर से मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

वो दर्द से पागल हो गई, बोली- निकालो ! बाहर करो ! मैं नहीं सह पाऊँगी !पर अब मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने कविता की कमर से पकड़ कर पूरे जोर से एक धक्का मारा और लंड उसकी चूत की गहराइयों को छू गया……वो दर्द से रोने लगी पर मैं धीरे धक्के लगाने लगा। थोड़ी देर में कविता को भी मजा आने लगा, उसके मुँह से आवाज निकलने लगी थी- चोदो…. वो गर्म हो चुकी थी और उसके मुँह से उह्ह… आअह्ह… ऊह्ह्ह… ह्ह… निकल रहा था… फिर मैंने उसे लण्ड मुँह में लेने को कहा तो उसने मना कर दिया. और उसने बताया कि उसके पति भारत में नहीं हैं वो अमेरिका गए हुए हैं, उसको गए हुए दो महीने हो गए हैं और शायद अगले छ: महीने तक नहीं आ सकते हैं.

जोर से पेलो…वोह… आह… मेरे राजा और जोर से पेलो…बहुत देर तक चुदाई चली… हम दोनों अपनी मंजिल पर एक साथ पहुँच गए. पर अब्बास के हाथ ने अभी भी मोना के दोनों हाथों को कसकर जकड़ा हुआ था और मोना को छूटने का कोई भी मौका नहीं दे रहा था…अब्बास ने अपने दूसरे खाली हाथ से मोना के बदन पर बचा आखिरी लिबास उसकी पैंटी को भी नीचे खिसका दिया और जैसे ही मोना की पैंटी नीचे खिसकी.

सुबह जब मैंने शालू को बताया कि मैंने तेरी पेंटी पर हाथ फिराया था तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि मैंने ऐसा किया होगा. कहाँ अंकल, वो पहले मम्मी के दो दोस्त थे ना, उनके तो ना तो मोटे थे और ना ही लम्बे!” वो अपना अनुभव बताने लगी. स्कर्ट उसकी गोरी मखमली टांगों से ऊपर उठ कर जांघों तक तक़रीबन चड्डी से कुछ ही सेंटीमीटर नीचे रह गई थी.

बीएफ की कहानी

जूली ने एक आँख मारी और उसके पास जाकर खड़ी हो गई।उसने डरते हुए जूली को कहा- मैं पहले कभी नहीं आया ! दोस्तों ने बोला कि मज़े करने हैं तो इस गली में चले जाना।जूली- सच है ! यहाँ बहुत मज़े करवाने वाली हैं। तुझे किसके पास जाना है?जूली ने उसको पास खींच कर चूम लिया और उसके लौड़े को दबा दिया। वो शर्म और डर से पानी पानी हो गया.

मैं उसको देखता ही रहा, उसने टोका- अन्दर नहीं आने दोगे क्या?मैं शरमा कर पीछे हो गया और वो अन्दर आ गई. अंकल- चिंता मत करो डार्लिंग! आज मैं तुम्हें खूब चोदूंगा!यह कह कर अंकल ने मम्मी को अपनी बाहों में भर लिया और उन्हें निरंतर किस करने लगे. चारों के तनतनाते हुये कठोर लण्ड हमारे बिस्तर के दोनों ओर खड़े हुये हमे चुदाई का निमंत्रण दे रहे थे.

मैंने एक झटके में अपनी मैक्सी ऊपर उठाकर नीचे कर कहा- देख क्या रहे हो? गांड में दम है तो आओ. पूरा कमरा आंटी की सिसकारियों से गूंज रहा था और वो सिसकारियाँ मुझे अच्छी लग रही थी. அம்மா xxxथोड़ी गीली भी हुई थी… मेरे कपड़े भी वो नहीं थे जो मैंने रात को वेदांत के सामने पहने थे.

आग जैसे गरम गोरे गुलाबी जिस्म पर पानी की नन्ही नन्ही बूंदें पड़ती तो मेरे तर बदन से जैसे जजबातों का धुआँ सा उठने लगता. मैंने कहा- ऐसा नहीं हो सकता!तो आंटी ने कहा- क्यों?मैंने पूछा- अंकल नहीं करते क्या आपके साथ?तो आंटी ने कहा- करते हैं पर तुम बताओ कि करोगे या नहीं?तो मैंने कहा- ठीक है!फिर मैंने कहा- आज नहीं, फिर कभी!उन्होंने कहा- आज क्यों नहीं?तो मैंने कहा- बस ऐसे ही!फिर आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगी.

उसके बलिष्ठ प्रहारों को भी मैं कितना झेलता, कुछ ही मिनटों में मेरा वीर्य भी लण्ड से छलक पड़ा. लगभग दस दिन बाद विक्की ने मुझे अपनी सुसराल चलने के लिए कहा, बोला कि तेरी भाभी को लेने चलना है!मेरे मन में तो जैसे लड्डू फूटने लगे. एक दिन मेरे कार में बैठते ही अमित अंकल ने पूछा- दस पन्द्रह मिनट देर हो जाए तो कोई परेशानी तो नहीं है ना?मैंने कहा- नहीं अंकल, कोई परेशानी नहीं है!अमित अंकल ने कार एक रेस्तरां के बाहर रोकते हुए कहा- इसका डोसा बहुत टेस्टी है!पापा के साथ इस रेस्तरां में आने के बारे तो मैं सोच भी नहीं सकती थी, वो एक नंबर के कंजूस आदमी हैं.

)वेदांत : कुछ नहीं रे, बस ऐसे ही… क्लास के बच्चे आजकल कुछ ज्यादा ही बकवास करने लगे हैं…हम दोनों के बारे में ! कुछ भी बोलते रहते हैं. लड़कों से बातचीत करके मैं ज़ाहिरा के टेंट में गया तो देखा वो गाउन पहने लेटी हुई थी. जीजू का लंड देखा तो मेरे होश उड़ गए, नौ इंच का फनफनाता लंड! मैं तो देखकर ही काँप गई कि यह मेरी इतनी सी चूत में जायेगा कैसे?मैंने जीजू से कहा- आप इस लंड का जो करने को कहोगे, वो मैं करूँगी लेकिन इसे मेरी चूत में मत घुसाना, नहीं तो वो फट जायेगी.

ओह… ब… भरजाई जी… एक मिनट… ओह… करता ही रह गया !कहानी अगले भागों में जारी रहेगी।आपकी नीरू बेन (प्रेम गुरु की मैना)[emailprotected][emailprotected]2053.

ज़रा नीचे आ जाएँ! कमर पतली और बहुत चिकनी! ज़रा हाथ रख कर देखें, अगर फिसल ना जाए तो बोलिएगा. मैंने उनकी टांगों पर हाथ फेरना शुरु कर दिया और धीरे धीरे उनकी स्कर्ट के अन्दर हाथ डालना शुरु कर दिया.

तभी मैंनेजर उठा और कपड़े पहनने लगा मुझे लगा कि शायद दीदी का चुदाई कार्यक्रम खत्म हो गया. उसने यह भी बताया कि देवरानी तो कभी कभार ही झड़ती है वरना उसे ही फ़ारिग होकर उतरना पड़ता है. मैंने भी एकदम प्रफुल्लित होकर उसको कस के पकड़ा और चूमने लगा… मैं उसके नरम होंठों का रस पिए जा रहा था…फिर मेरे हाथ पहले उसकी गांड पर पड़े… आये हाय….

‘आप सो जाईये अब… बहुत हो गया!’‘अरे मेरी चिकनी भाभी, मेरा लण्ड तो देख, यह देख… तेरे साथ, तुझे नीचे दबा कर सो जाऊँ मेरी जान!’वो बेशर्म सा होकर, अपनी सुध-बुध खोकर अपना पजामा नीचे सरका कर लण्ड को अपने हाथ में ले कर हिलाने लगा. अब मेरा मुँह और जीभ उनकी चूत चाट रही थी और वो मेरा लंड अपने मुँह में अन्दर-बाहर कर रही थी. ”मैं अब दोनों भतीजों को पाकर अपने भाग्य पर इठलाने लगी थी…और अब भी इन दोनों पर मुझे पूरा नाज है, बहू। अब तू जो चाहे मुझे कह ले.

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उधर राज अंकल बाजी की बड़ी बड़ी चूचियों को जोर जोर से मसल रहे थे और बाजी जोर जोर से सिसक रही थी- ऊह्ह्ह,आह्ह्ह्ह,ओऊ बहुत मजा आ रहा है! और जोर जोर से मसल के पूरा दूध पी जा!राज पागलों की तरह बाजी की चूची को मसलने लगा और चूची को मुँह में लेकर पीने लगा. हाय!!वो मेरे होंठ चूस रही थी और मेरी जांघें सहला रही थी, मैं मचल रही थी- नहीं कामिनी! प्लीज मत करो! आ. चला दी। मैंने कुछ देर और ध्यान लगाये रखा तो मैंने देखा वो अश्लील वीडियो थी! मैं भी आँख लगाकर उन्हें देखने लगा। तभी मैंने देखा कि चारों मैडमों ने अपनी अपनी कमीज़ तथा ब्रा उतार दी तथा वे एक दूसरे के बोबों को दबाने लगी, मुँह में लेकर चूसने लगी।इससे मेरा लिंग भी काफी कड़क हो गया लेकिन मैं यह सब नहीं चाहता था, इसलिए मैंने घंटी बजा दी। मेरा घंटी बजाना ही था कि सबने हड़बड़ाकर अपने-अपने कपड़े पहन लिए तथा टी.

सारी तैयारी करने के बाद मैं अपनी सीट पर लेट गई और मैगज़ीन पढ़ते हुए टीटी का इंतजार करने लगी. सोनिया की मम्मी-2से आगे की कहानीप्रेषक : राज कार्तिकदोस्तो,आपने मेरी कहानीबुआ हो तो ऐसी-1औरसोनिया की मम्मी-1पढ़ी और पसंद की, धन्यवाद. हाथी वाली सेक्सी वीडियोआह……सॉरी सॉरी करने लगी।मैंने कहा- शीला मैं छुटने वाला हूँ !तो शीला बोली- गांड में नहीं, मैं तुम्हारा रस अपनी चूत में लेना चाहती हूँ !मैं रुक गया, अपना लंड निकाला और शीला को सीधा लिटा कर उसकी चूत में अपना लंड डाल कर तेज धक्के मारने लगा। शीला भी चूतड़ उछाल कर मेरा साथ देने लगी और जोश में आकर आह …… स ….

वो आई तो मैंने पूछा- तुम मुझे देखती क्यों रहती हो?उसने कहा- तुम मुझे अच्छे लगते हो!मैंने भी कहा- मैं भी तुझे पसंद करता हूँ.

एक तरफ कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म चल रही थी और दूसरी तरफ वो मेरा लण्ड हाथ में लिए मुझसे चिपक रही थी. औरऽऽ और ऽऽ जैसी आवाजें निकाल रही थी। मैंने और जोर लगाया और पूरा लंड अन्दर डाल दिया, वो चीखी लेकिन उन्होंने मुझे नहीं रोका। मैंने अब अंदर-बाहर, अंदर-बाहर करना शुरू किया।मैंने उन्हें 20-25 मिनट चोदा, मेरा वीर्य निकल आया और भाभी का भी.

अगले दिन सुबह 7 बजे मेरे कमरे का दरवाजा बजा, मैंने जब उठ कर दरवाजा खोला तो देखा कि आयशा चाय ले कर आई हुई थी. पापा और मम्मी भी साथ थे, इसलिए उन्होंने मेरे सर को चूमा और फिर जल्दी आने को बोल कर चलेगये।मगर मैं पूरा दिन और पूरी रात बिस्तर पर ही अपनी चूत और गाण्ड को पलोसती रही. क्या इन्हें दबाने में तुम्हें मज़ा आएगा?मैंने भी बिना कोई मौका गंवाते हुए उसमें अपना मुँह घुसा दिया और अपनी जीभ से उसके मम्मे चाट लिए.

राजू ने रीटा की हड्डी पसली एक कर दी थी और उसकी जवानी को चारों खाने चित कर दिया था.

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मैं तो तुम्हें बहुत शरीफ समझती थी!’भाभी के ऐसा कहने से मुझे बहुत शरम महसूस हुई और भाभी नहाने चली गई. रागिनी के कुछ समझने के पहले मैंने उसकी पतली कमर को पूरी ताकत से जकड़ कर एक धक्का लगा दिया. उसके बाद भाभी मुझे वहाँ से ले आई और भाभी और मैं एक पार्क आकर बैठ गए और बातें करने लगे.

मैंने चाँदनी को कहा- रानी, मैंने कितनी चूत और लड़की चोदी हैं पर जो मजा तुमसे मिला है वो किसी में नहीं था. मैं थोड़ी देर तक उनको मसलता रहा, फिर मैंने उसके चुचूक अपने मुँह में ले लिए और उनको पीने लगा. मैं- जा जा! तुझ में इतनी हिम्मत नहीं कि किसी औरत का सतीत्व बिना उसकी मर्जी के तोड़ सके! इतनी हिम्मत होती तो क्या औरतों पर जुल्म करता? उन्हें मजबूर करके अपनी रखैल बनाता? अपने फरमान से प्रजा को दुखी करता? नहीं, तू तो एक नपुंसक है, जब तेरी कोई भी पत्नी माँ नहीं बन सकी तो तूने बाहरी औरतों का शोषण किया, तेरे जैसा बुज़दिल और बेगैरत इन्सान मैंने आज तक नहीं देखा.

अनु मेरे लंड को लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। अनु ने इतने शानदार तरीके से चूसा कि मैं आपको वो आनन्द बयान नहीं कर सकता. सुबह भैया-भाभी को ऑफिस जाना था इसलिए सभी अपने अपने कमरों में जाकर सो गए और मैं भी आराम से अपने कमरे में आ गया और दुबारा भाभी को चोदने की योजना बनाने लगा मगर एक सवाल मेरे दिमाग में अभी भी था कि आखिर शनिवार की रात को भाभी के कमरे में कौन था. ‘अब राजू जरा घोड़ा बन, और मजा आयेगा!’‘सच चाची, क्या करोगी…?’‘बस देखते जाओ’मैं धीरे से घुटनो के बल हो कर घोड़ी जैसा बन गया और अपनी गाण्ड उभार दी.

फिर थोड़े देर बाद उठी और आंटी ने मेरे गाल पर एक चुम्मा ले लिया और कहा- बेटा, बहुत मजा आया! आज काफी दिनों बाद चुदी हूँ, शरीर हल्का हो गया!मैंने कहा- आंटी, मैंने तो आपकी गांड भी चोदनी है. सभी को यह लगता है कि सब कुछ सामान्य है।इस बार जब भैया गए तो कह गए कि अब उनका आना बहुत कम या नहीं के बराबर रहेगा, उन्हें कनाडा के नागरिकता मिल चुकी है।सयाली और भाभी दोनों ही अब मां बनने वाली है.

वो 1-2 मिनट में ही झड़ गई लेकिन मेरा काम अभी बाकी था…मैंने उससे तेल मंगवाया और उसकी गांड में तेल लगा कर उसकी गांड मारने लगा…वो बहुत मज़ा लेकर सीत्कार कर रही थी…आखिर मैं भी 4-5 मिनट में झड़ गया… मेरा सारा वीर्य उसके कूल्हों पर निकल गया।और फिर हम काफ़ी देर तक बिस्तर में ही लेटे रहे, मैं उसकी चूचियों से खेलता रहा।फिर हमने कपड़े पहने और मैं वहाँ से निकल गया.

जीजू ने मेरी रोंयेदार चूत को देखा तो वो मदहोश हो गए, कहने लगे- मुक्ता रानी! आज तुझे मैं जन्नत की सैर कराऊँगा! आज तेरी चूत का भुरता नहीं बनाया तो मेरा नाम भी विपुल नहीं! आज तुझको पता चलेगा कि तेरी इस चूत से क्या गुल खिलेंगे. मोना भाभी की सेक्सी वीडियोबेडरूम में पहली बार लड़के के साथ थी, मुझ से रुका नहीं गया और मैं नीचे बैठ उसका लौड़ा चूसने लगी. சிஸே வீடியோकभी कभी रीटा लजीज गालियों के साथ राजू के थप्पड़ शप्पड़ भी ठोक देती थी, तो राजू ने हिंसक रीटा की गाण्ड को झाड़ू, बैट, चप्पल और बैल्ट से भी खूब पीटा और जंगली रीटा को भी पीट कर चुदने में खूब मजा आता था. मैंने उसकी चूत के पट खोल डाले और अन्दर गुलाबी चूत में लण्ड को घिसा… उसका दाना लण्ड के सुपाड़े से रगड़ दिया.

मैं फ़िर से झड़ने के लिये तैयार हो गई तो मैंने देवर को रोक कर कहा- एक मिनट रुक जाओ ना… मैं फ़िर से बिना उसके ही झड़ जाऊँगी.

तुमने मेरे चूत को फाड़ डाला……वो दर्द से कराह उठी, मैं समझ गया कि इसकी चूत की आज पहली बार चुदाई हो रही है।दूसरा धक्का बिना देर किये मैंने मार दिया जिससे मेरा लंड सपना की चूत की गहराइयों को नाप गया।हाय आह………. मैं काफी गोरा हूँ, मेरा वजन 56 किलो है, मैं काफी चिकना हूँ और मेरी टाँगें और गाण्ड तो एकदम लड़कियों जैसी ही है. मैंने तान्या को बाहों में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया, उसके बाद सारे नौकर वहाँ से चले गए.

मेरे दिमाग में ज्योति का वो ब्रा-पेंटी और आयशा का नाईटी वाला रूप घूमने लगा और मैंने सामने खड़ी आयशा को बाहों में ले लिया वो चिल्ला पड़ी, जिसे सुन कर ज्योति भागती हुई आ गई. प्रेषक : समीर रंजनमेरा नाम समीर है, मैं लखनऊ में रहता हूँ, 27 साल का हूँ ! मैं इससे पहले कई कहानियाँ अन्तर्वासना. फिर मम्मी ने कहा- जब तक यह मर्दों के ड्रेस में है, ऐसा नहीं हो सकता… साली को साड़ी में चोद सकता हूँ मैं.

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नहीं आप झूठ बोल रही है ?पर गुरूजी तो ऐसा ही कहते हैं।ये गुरूजी कौन है ?इसीलिए तो मैं कहती हूँ तुम एक नम्बर के लोल हो !जरा खुल कर बताओ !तो फिर प्रेम आश्रम में क्या गांड मरवाने जाते हो ?वो. भाभी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया मगर उन्होंने इस बात पर कोई नाराज़गी भी नहीं दिखाई. आईई करना शुरू कर दिया।मैंने पूछा- आपको क्या हुआ है?तो उन्होंने कहा,” बेटा, मैं भीग गई थी न इसलिए कमर में दर्द है। तू ऐसा कर मेरे बैग से मूव निकाल कर मेरी पीठ पर लगा दे….

और उससे अपने प्यार का इजहार किया…” वेदांत, एक बात कहूँ…?”फिर से करने का इरादा है क्या…?”नहीं वो… मतलब हाँ.

‘भाभी, एक बात कहूँ, बुरा मत मानना और ना भी मत कहना!’‘क्…क्… कहो, पर दूर तो हटो!’‘भाभी आज चुदवा लो, प्लीज, मना मत करो, देखो मेरा लौड़ा कितना उतावला हो रहा है!’‘आ… आ… ये क्या बदतमीजी है भैया… हट जाओ!’ तभी मुझे गोमती नजर आ गई.

मगर मेरी मर्दानगी के आगे कहाँ टिक पाती, मैंने फिर से उसके पलंग पर पटक दिया और उसके लहंगे को ऊपर कर, उसकी चड्डी उतार फेंकी. अब अक्सर यह संयोग होने लगा कि मेरे कॉलेज से निकलने के समय अमित अंकल उधर से गुजरते और मुझे साथ ले लेते. सेक्सी ब्लू साड़ी वालीमैंने पूछा- निधि क्या छुपा रहो हो?वो हकलाते हए बोली क्क्कुछ नही सर!मैंने कहा- झूठ मत बोलो, मैंने तुम्हे एक लैटर पढ़ते हुए देखा है, क्या लिखा है उस में मुझे दिखाओ.

??”वेदांत : कभी पूछते हैं… बात आगे कहाँ तक बढ़ी… अरे… तू किसी और लड़की से बात मत करना वरना वो जल-भुन जाएगी. अब मैंने पीछे हाथ ले जाकर उसके ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा के खुलते ही उसने अपने दोनों हाथों से अपने स्तनों को ढकना चाहा लेकिन मैंने उसके हाथ पकड़ लिए।मैं उसके नायाब खजाने को देखना चाह रहा था. प्रेषिका : सिमरन सोधीहाय दोस्तो, मेरा नाम सिमरन है, मैं 32 साल की शादीशुदा महिला हूँ, मुझे एक 11 साल का बेटा कुंदन और 10 साल की बेटी सिया है। मैं मेरे पति और बच्चों के साथ पूना में रहती हूँ। मेरे पति संजय कोलेज में प्रोफ़ेसर हैं, मैं सायंस ग्रेजुयेट हूँ और मैं एक हॉस्पिटल में काम करती हूँ, बीमार मरीजों की सेवा करना मुझे अच्छा लगता है।मेरा पहला सेक्स….

कुछ दिनों बाद उन्होंने मेरा घर खाली कर दिया और मैं तड़पता ही रह गया।काश कोई मिल जाती जो मेरी प्यास बुझा देती !मैं दुआ करुँगा कि आपको भी ऐसी ही कोई पड़ोसी, भाभी मिले या हो सकता है आपके पड़ोस में ऐसी भाभी हो जिस पर आपकी नज़र नहीं गई हो !आपको मेरे जीवन की यह घटना कैसी लगी, कृपया मुझे मेल करके जरूर बताएँ ![emailprotected]. अब मेरा लंड भी खड़ा हो गया लेकिन मैं फिर भी आराम से लेटा रहा क्योंकि यह मेरा पहला मौका था इसलिए मेरी गांड फट रही थी.

मैंने अपना कंडोम निक्कल दिया लेकिन उसकी चूत अभी तक झरी नहीं थी, वो मुझसे कहने लगी- अपने लण्ड को डाले रखो अभी मेरा मन नहीं भरा…मैंने कहा- कंडोम तो अब नहीं है?तो उसने कहा- वैसे ही डाल दो…तब वो सेक्स के चक्कर में अन्धी हो चुकी थी…वो मुझे जोश में लाने के लिए तुरंत लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी… मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया… फिर उसकी चूत ने लण्ड का स्वागत किया.

उसके जाने के बाद मुझे नींद ही नहीं आई… सोचते सोचते थकान के कारण कब आँख बंद हुई पता ही नहीं चला…फिर सुबह आठ बजे का अलार्म बजा… आँख खुली तो सब कुछ ऐसा लगा जैसे कुछ हुआ ना हो. उन लोगों ने बताया कि पापा की शूगर थोड़ी बढ़ी हुई है इसलिए हमें थोड़े दिन रुकना पड़ेगा, उसके बाद ही उनकी सर्जरी की जायेगी. सबको लगता था कि हम दोनों प्रेमी हैं… मुझे भी मेरी क्लास की लड़कियाँ उसके नाम से चिढ़ाती थी.

సెక్స్ రేప్ సీన్స్ चूँकि सभी सदस्य घर पर थे इसलिए उस दिन प्रिया भाभी से अकेले में बात ही नहीं हो पाई. ऊपर से मोनिका के दिये हुई ब्ल्यू मूवीज़ और मस्त राम के सैक्सी नावल देख और पढ़ कर रीटा की चूत ने ‘चोदा मरवाओ- चोदा मरवाओ!’ की बगावत कर दी.

पता नहीं मेरे मन में चोर अपने आप में ही भयभीत हो उठा… कहीं किसी को पता लग गया तो… कहीं अंकल या मम्मी पापा ने देख लिया तो. जिन्दा तो तू उसको कभी नहीं लेकर जा सकेगा और अगर मेरे पुलिस स्टेशन में आएगा तो तेरा तो मैं वो हाल करूँगी कि कभी चल नहीं पाएगा !!इतना बोल कर मोना फ़ोन काट देती है और उधर आरती को होश आता है और वो मोना को बुलाने को कहती है।आगे जानने के लिए अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर आते रहिए…. जब मैं वापिस घर आया तो मैं मनीषा को ढूंढने लगा क्योंकि मैं मनीषा की तरफ काफी मोहित हो चुका था.

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कम से कम मैंने अपना सब उसे सौंपा, जिससे मैं प्रेम करती हूँ और जो मुझ से प्रेम करता है. इस बार मैंने उसकी गांड मारने की इच्छा रखी तो वो बोली- इस बार नहीं! अगली बार मार लेना. उस वक्त उनको देख कर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और जब चाची बाल सुखा कर आई वो भी मेरे लंड को देख कर मेरे पास आकर मेरे गले लग गई और बड़े प्यार से बोली- बताओ ना ? क्या करूँ मैं तुम्हारे लिए ?मैंने कहा- ठीक है, बताता हूँ !आगे क्या हुआ जानने के लिए अगली कड़ी का इन्तजार करिये और आपने मेल मुझे भेजते रहिये।अभी आप मुझे मेल करिये आप को मेरी कहानी कैसी लगी ….

मैं पूरे जोर से पेले जा रहा था- हाँ रानी… ले… खा ले … पूरा मेरा खा जा … ले … ले … पूरा ले …आह …राजा…. । जब तुमने मुझसे बाम मसलवाई थी तो मैंने तुम्हारी योनि देख ली थी। बस यूँ ही दिल चाहने लगा….

पर उत्तर नहीं मिल रहे थे …क्या वो जैसा मुझे दिख रहा था वैसा ही था… या फिर वो सर्फ मेरे साथ ही ऐसा था.

और वोह सिसकारने लगी- डाल दे बेटा अपनी आंटी की चूत में अपना लंड !अभी लो आंटी ! यह कह कर मैंने अपना लंड घुसा दिया और घुच घुच करके चोदने लगा।और जोर से चोद. उसे ही अपनी मंजिल मान चुकी थी मैं…कुछ देर नग्न अवस्था में एक दूसरे की बाँहों में हमें वक़्त का पता ही नहीं चला. ‘दीदी लो बाहर आ गई प्यार की कुछ बूंदें… ‘फिर गोमती झुकी और मेरी योनि से उसने अपने अधर चिपका दिये.

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मैंने अब तक बहुत सब्र से काम लेते हुए अपने लौड़े को कुँवारी चूत में घुसाया था, पर अब मेरा सब्र साथ नहीं दे रहा था और मैंने उसकी चूत में धक्का-पेल चूदाई शुरू कर ही और उसको बाँहों में कस के जकड़ कर उसकी चूचियों को करीब करीब चबाते हुए खूब चोद डाला.

हिंदी बीएफ भेज: उसके बाद जब हम केबिन में कपड़े ठीक करने गए तो सब कपड़े निकाल कर मेरे ही सोफे पर बैठ कर मुझसे अपने घोड़े की सैर करवाई … रात भर हुई चुदाई के बाद हम दोनों को इसका चस्का लग गया।अब तो हर देर रात हमारी दिवाली थी. मैं तो बस मजे से लेटे लेटे मजे ले रहा था, कि वो एकदम से बैठ गई और अपनी चूत को मेरे लन्ड पर कस लिया.

मैं सोनम के और करीब गया और उसे कस कर बाहों में जकड़ लिया क्योंकि हम दोनों ही एक-दूसरे से शादी के लिए राजी थे तो सोनम ने इसका कोई भी विरोध नहीं किया. कई बार तो रीटा सबके सामने सबकी नजरें बचा कर राजू से घोड़ा घोड़ा खेल खेल कर अपनी उधड़ी सलवार में से ही राजू का लण्ड अपनी चूत में सरका लेती थी. फिर भाभी ने पूछा- दूसरी शर्त क्या है?तो मैंने बोला कि मैं एक लड़की से प्यार करता हूँ और उससे शादी करना चाहता हूँ.

दीदी ने मुझसे हंसते हुए पूछा- यह कौन सा आसन हो रहा हैं ?गलती से मेरे मुँह से निकल गया- यह रामदेव बाबा चोदासन कर रहे हैं……….

मरर गई… जान मैं…मैंने भी अपनी पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू कर दिए और जोर जोर से हांफ़ने लगा…वो भी चिल्ला रही थी…हम दोनों को सर्दियों में पसीना आने लगा…करीब 20 मिनट के बाद मैं झड़ गया और उसके ऊपर से उठ गया…मैंने कहा- जान मज़ा ही आ गया !वो बोली- अब तो और आएगा. अभी कॉलेज जाते जाते एक महीना ही गुजरा था कि मेरे पड़ोस में रहने वाले एक लड़के की शादी हुई जिसका नाम विक्की था. सोनिया अभी भी अपनी ऑफ़िस की चिंता और मुस्तफ़ा के साथ हुए पंगे के बारे में डॉक्टर सुनील को बता रही थी कि तभी उसने महसूस किया कि सुनील का दायां हाथ उसके मोटे-मोटे उभारों पर है.