बीएफ चुदाई चुदाई वाली

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मैं और आपी दोनों ही इस सिचुयेशन पर कन्फ्यूज़ हो गए थे और मैं बेसाख्ता ही बोला- सॉरी गुड़िया. श्रुति हासन की सेक्सीमैंने उनका ब्लाउज भी फाड़ कर फेंक दिया और देखा कि काली ब्रा में कैद दो बड़े बड़े आम फड़फड़ा रहे थे.

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’ की आवाज़ निकाली।उन्होंने अचानक से अपने हाथ मेरी झांटों पर रख दिए और कहने लगीं- बहुत दर्द हो रहा है.वो हमारे यहाँ किरायेदार थी!उसकी उम्र 20 साल की रही होगी, उसकी कम उम्र में ही शादी हो गई थी। वो खूब गोरी-चिट्टी और सेक्सी है। उसका कद 5 फुट 2 इंच था। उसका फिगर 32-24-34 का रहा होगा।वो दिखने में बहुत सेक्सी है कोई भी उसे देखे तो उसका मन उसे चोदने का हो जाए।उसके पति का नाम विकी है वो किसी कोस्मैटिक की दुकान पर काम करता है।हुआ यूं कि जब मैं दिल्ली में था.

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तो फरहान नहा रहा था।मैंने बाहर से आवाज़ लगाई- फरहान यार कितनी देर है?अन्दर से शावर के शोर के साथ ही फरहान की आवाज़ आई- भाई मैं अभी तो घुसा हूँ. ?’ अम्मी ने बाहर से चिल्ला कर पूछा।फ़ौरन ही आपी ने भी ऊँची आवाज़ में ही जवाब दिया- कुछ नहीं टूटा अम्मी. तो मुझे कुछ आराम हो जाएगा।मैंने यह बात सुनी तो मैं भी जाने के लिए तैयार हो गई।रविवार को जीजू मुझे लेने के लिए आए, रात में ही हमारा ट्रेन से रिजर्वेशन था.

तो मैं भी 20 -30 झटकों के बाद जानवरों की तरह चोदने लगा।वो चिल्लाने लगी. अब तो हमेशा तुम्हें मेरा लण्ड देखना भी है और उसे अपने पीछे के छेद के अंदर भी लेना है।अब आगे. इसलिए मैं ज़्यादातर दोपहार के बाद घर पर ही होता था।भैया का डेली रुटीन सुबह 7.

पर वो जैसे ही खड़ी हुई कि लड़खड़ा कर बिस्तर पर गिर गई।मैं- क्या हुआ?पायल धीरे से बोली- नीचे बहुत दर्द है. रात को हम सब लोगों ने मिलकर खाना खाया और सब सोने चले गए।फिर मैं भी बैडरूम में आई. जब हम सेकेण्ड इयर में थे। हमने कहीं घूमने का कार्यक्रम बनाया और तय किया कि हम सब एग्जाम के बाद नैनीताल चलेंगे।कार्यक्रम के मुताबिक हम चारों नैनीताल पहुँच गए और एक होटल में जाकर दो कमरों को बुक किया। अपने कमरों की चाभियाँ लेकर हम अपने कमरे में पहुँच गए।एक में मैं और सन्नी.

तो कभी मेरे लन्ड को अपने हाथों से रगड़ने लगती।मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया और चोदने की ख्वाइश सामने रखी तो उसने अपनी सिर्फ पैन्टी उतार दी और कंडोम लगा कर चोदने के लिए कहा।मैंने तुरंत कंडोम पहना और उसकी चूत में डाल कर तेज-तेज हिलाने लगा। नेहु भी मेरे इस काम में नीचे से अपनी गाण्ड को ऊपर-नीचे करके पूरा साथ दे रही थी।वो बोलती जा रही थी- मोनू चोदो मुझे. सम्पादक जूजामैं आपी के पीछे से उनकी जांघों के बीच अपना लन्ड रगड़ रहा था और आइने में दिख रहा था जैसे मैं आपी की चूत चोद रहा हूँ।आपी ने फरहान को बुलाया कि वो भी कुछ मौज मस्ती कर ले।फरहान एकदम कूद कर बिस्तर से उठा.

उसकी तबीयत ठीक नहीं है और मैं और रामा मेरे कमरे में आ गए। कमरे में आते ही मैंने रामा को अपने गले लगा लिया और उसकी चूचियाँ कुर्ते के ऊपर से ही दबाने लगा।उसने अपना सर मेरी छाती पर रख लिया और सिसकारियाँ लेने लगी- ओफ.

फिर मैं उसको पिक्चर के लिए ले गई।पिक्चर शुरू होने के थोड़ी देर बाद उसने मेरे बालों में हाथ फेरना चालू कर दिया।मुझे बहुत मज़ा आ रहा था क्योंकि काफी दिनों से मुझे किसी ने मज़ा नहीं कराया था और मेरी मुनिया उछलने लगी थी।धीरे-धीरे फिर उसने मेरे पूरे बदन को छूना चालू कर दिया, मेरे बूब्स.

दर्द की लकीर चेहरे पर थी।वह एक बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी और मुझे धक्का देने की कोशिश करने लगी।पायल- राहुल प्लीज. एक मिनट तक हम में से कोई नहीं बोला।मैंने चुप्पी तोड़ते हुए कहा- शायद आप कुछ काम से आई थीं।प्रीति- ओह. मैंने बात खत्म करके अपने होंठ आपी की गर्दन पर रख दिए।आपी ने मेरी इस हरकत पर हड़बड़ा कर आँखें खोलीं और कूल्हों को पीछे दबाते हुए मेरे हाथ अपने मम्मों से हटाने की कोशिश की और सहमी हुई सी आवाज़ में बोलीं- सगीर पागल हो गए हो क्या.

तो मामी ने बताया- मैं तुम्हारे मामा के साथ खुश नहीं हूँ। वो रोज शराब पीकर आते हैं और बुरा भला कहते हैं।इतना कह कर वो रोने लगीं।मैंने कहा- चुप हो जाओ मामी. वो बोली- लेकिन आज अभी तक 5 गुलाब ही बिके हैं।मैंने बोला- ठीक है सारे ख़रीद लेता हूँ लेकिन मेरे साथ ड्रिंक लेनी पड़ेगी।बोली- मैं ड्रिंक नहीं करती।अब मैं आपको उस लड़की के बारे में बताऊँ. वापस घर आते हुए मैंने अपनी शॉप से एक डिजिटल कैमरा भी उठा लिया था कि अब तो हर चीज़ ही पहुँच में थी।मैं घर पहुँचा तो सवा पाँच हो रहे थे। टीवी लाऊँज में कोई नज़र नहीं आ रहा था। आपी का और अम्मी का कमरा भी बंद था।ये वाकिया मुसलसल जारी है।[emailprotected].

हो जाता है।आंटी और अंकल बंगाल के रहने वाले थे।एक दिन अंकल को किसी काम से अचानक घर जाना पड़ा, अंकल जी जाते वक्त मुझे बोल गए- अगर तेरी आंटी बाजार से कुछ मंगाए तो लाकर दे देना.

तो देर ना करते हुए मैंने उसकी पैन्टी भी उतार दी।उसकी एकदम चिकनी क्लीन शेव. अम्मी ने सुस्ती से एक जम्हाई ली और कहा- तो तुम और तुम्हारे बाबा ही हो ना. तो वो बोला- मम्मी मैं बाथरूम जा रहा था तो आपके कमरे में से आपकी आवाजें आ रही थीं.

इसलिए मैं ज़्यादातर दोपहार के बाद घर पर ही होता था।भैया का डेली रुटीन सुबह 7. मैं भी जाती हूँ।यह कह कर हमारे कमरे से बाहर चली गईं।कहानी जारी है।[emailprotected]. फिर पता नहीं मैं कब तक तड़फता रहूँगा।वो बोली- यार अब मुझसे नहीं होगा।मेरे थोड़ा मनाने पर उसने कहा- ठीक है.

दर्द हो रहा है!मैंने आपी की बात अनसुनी करते हुए अपनी उंगलियों को अन्दर-बाहर करना जारी रखा और उनकी गाण्ड के सुराख को चूसने लगा ताकि इससे तक़लीफ़ का अहसास कम हो जाए.

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तो ट्रेन में हमें एक ही सीट मिली थी और एक सीट RAC में थी।रात का टाइम था और सीट एक ही थी। मैं और जीजू सीट पर काफी देर तक बैठे रहेफिर मुझे नींद आने लगी. अब मैं नीचे बैठकर सोनी की चूत चाटने और चूसने लगा।उधर सोनी का बारिश और ठण्ड होने के बाद भी पसीने से बहुत बुरा हाल हो चुका था।जल्द ही सोनी मेरे मुँह में अकड़ सी गई और दोबारा झड़ कर खाली हो गई।अब मैंने सोनी को नीचे बिछे हुए कारपेट पर लेटाया और देर ना करते हुए अपना लंड उसकी चूत पर रखकर एक ही झटके में पूरा का पूरा लंड सोनी की छूट में पेल दिया। सोनी के मुँह से एक दर्द भरी नहीं. इसलिए मैंने पहले उससे बात करने से मना कर दिया।तो उसने बोला- मुझे एक चान्स तो दे कर देखो.

इस झटके की तक़लीफ़ से बेसाख्ता उन्होंने अपना सिर ऊपर उठाया और मैंने अपना चेहरा उनसे बचाते हुए फ़ौरन ही साइड पर कर लिया।आपी के मुँह से घुटी-घुटी आवाज़ निकली ‘आआअ क्ककखह. तब उसकी चूचियाँ देखने लायक लग रही थीं, उसकी चूचियाँगोल तो नहीं हैं. लेकिन सारा दिन ऑफिस में बैठे रहने के कारण पेट निकल आया है।मेरे गुप्त अंग की लम्बाई लगभग 5″ है और मोटाई 2.

अपनी गोदी में लेकर!यह सुन कर बाकी सब औरतें हँस पड़ीं।कहानी जारी रहेगी.

अपने बहुत कुछ दे दिया है।उसके बाद मैंने उनकी एक फ्रेण्ड को उनकी हेल्प से कैसे चोदा. ?मैंने कहा- ये अभी भी भूखा लगता है।उसने कहा- तो फिर चलो शुरू हो जाओ।मैं यह सुनकर तो खुशी के मारे उछल पड़ा, फिर से चुदाई शुरू हो गई।इसके बाद तो जैसे चुदाई का सिलसिला निकल पड़ा और मैंने भाभी को न जाने कितनी बार चोदा और आज भी चोदता हूँ।बस दोस्तो. इसलिए मैंने फ़ौरन ही बोल दिया- अम्मी आपी के फैशन भी तो नहीं खत्म होते ना.

और उनके हाथ कुर्सी के आर्म्स पर रख दिए।फिर आईने में अपने आपको देखते हुए आपी से कहा- अब देखो आपी. जिससे मेरे आधे चूचे बाहर निकलने लगे।अब मैं भी उसके मजे लेने लगी, मैं बोली- जब तूने मुझे उठाया था. उसे देते टाइम मैंने जानबूझ कर उसके मम्मों फिर से टच कर दिए।उसके चेहरे से साफ दिख रहा था कि उसे भी मजा आ रहा था। मैंने बेबी वापस दिया ही था कि.

इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उसने अपने हाथों में जकड़े हुए मेरे हाथों को जोरों से दबा दिया और मेरे होंठों को काटना शुरू कर दिया।थोड़ी देर तक मैंने उसके लण्ड को अपनी चूत के अन्दर ही रखा और फिर मैंने अपने होंठों को चूमना छोड़ दिया। वो दर्द से कराह रहा था. मैं तेरी मदद कर दूंगी।मेरी बातें सुनकर उसकी शर्म थोड़ी कम हुई। अब हम दोनों एक-दूसरे से बहुत खुल चुके थे और फिर उसने अपनी पैंट खोल कर अपना लण्ड बाहर निकाल दिया।मैंने देखा कि उसका लण्ड अभी आधा खड़ा हुआ था। फिर मैंने उसके लण्ड को अपने हाथों में लिया और उसके लण्ड की खाल को ऊपर-नीचे करने लगी और उसका लण्ड धीरे-धीरे फूलने और लम्बा होने लगा.

वो भी रात को दस बजे के बाद!एक यूनिवर्सिटी होने की वजह से वियद्यार्थी भी दिखाई देते हैं।मैं कमरे में बोर हो रहा था. कि चाटने के बाद पता लगाना मुश्किल था कि अभी कौन सा हिस्सा चाटा है।करीब-करीब पूरी चूत चाटने के बाद मैं हटा और मैंने उसके गालों पर चुम्बन किया, बोला- कामना, गिव मी अ ब्लो जॉब।वो उठ खड़ी हुई और घुटनों के बल बैठ गई, मैं सोफे पर पैर नीचे करके बैठ गया, उसने अपनी भोली सी उंगलियों से जैसे ही मेरा बॉक्सर नीचे किया. तब उसकी चूत अब दर्द कर रही थी और वो चलने के लायक भी नहीं थी।शाम तक मेरे लोगों ने अपना वादा पूरा किया.

पर मेरा लण्ड खड़ा था।उसने मुझसे सिलाई मशीन माँगी। मैं मशीन लेने अन्दर गया.

एक हाथ में उसका हाथ पकड़ा और दूसरा हाथ उसकी कमर में रख कर बृजेश के पास आया और वैशाली को उसकी जांघों पर बिठा दिया और अपने हाथ से उसका हाथ बृजेश के हाथों में देते हुए कहा- ले तेरी बर्थ-डे का गिफ्ट! आज कुछ ऐसा कर कि जो पूरी जिंदगी तक यादगार रह जाए।वो दोनों पलंग पर थे. क्या पता कब ज़रूरत पड़ जाए।वैसे मैंने दो पैकेट हीथ्रो एयरपोर्ट के वाशरूम के वेंडिंग मशीन से लिए थे क्योंकि मेरी बीवी हमेशा पिल्ज़ यूज करती है।मैंने उसको बोला- लो मेरे लण्ड पर लगा दो।वो कंडोम को मेरे लंड पर लगाने लगी मगर जा नहीं रहा था। वो बोली- मैंने कभी नहीं लगाया. कि मैं एक लम्हें को दहल सा गया और खौफ की एक लहर पूरे जिस्म में फैल गई।मुझसे आपी की आँखों में देखा ही नहीं गया.

वो मेरा इरादा समझ गई थी, उसने खुद की जीन्स का बटन खोल दिया।मैंने उसकी जीन्स उसके जिस्म से अलग कर दी। अब वो टॉप और लाल रंग की पैन्टी में थी।उसने शर्मा कर कहा- तुम्हारा पसंदीदा रंग है।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !मुझे इस वक्त उस पर बहुत प्यार आ रहा था, मैंने उसके पैरों पर चूमना शुरू कर दिया।जब मैंने उसकी जांघ पर चूमना शुरू किया. वैसे तो मैं हर लड़की और लेडी की बहुत इज़्ज़त करता हूँ और आफरीन के लिए भी मेरे मन में कुछ ऐसा ही था.

फिर मैं इसे पीछे खींच लेता।यही सिलसिला कुछ देर तक चलता रहा।फिर कुछ देर के बाद उसको उठा कर पूरा का पूरा लण्ड उसके मुँह में घुसेड़ दिया और वो बड़े आराम से लौड़ा चूसने लगी. आपी ने मेरी उंगली पर लगा मेरे लंड का जूस देखा और नर्मी से मेरा हाथ पकड़ कर अपनी आँखों के क़रीब ले गईं और फिर अचानक ही झपट कर मेरी उंगली अपने मुँह में लेकर उससे चूसने लगीं।मैं आपी का यह अंदाज़ देख कर दंग रह गया।आपी ने मेरी पूरी उंगली चूसी और मेरा हाथ छोड़ कर फिर से मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर. तो थोड़ा सा धक्का लग गया।इतना सुनते ही वह बोली- अच्छा तो यह बात तो ठीक है कि भीड़ की वजह से धक्का लग जाता है.

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फिर मैं उन्हें किस करने लगा।पांच सेकंड बाद मैं रुका तो देखा उनकी आँखें बंद थीं।फिर उन्होंने आँखें खोलीं और आगे बढ़ कर मुझे किस करने लगीं।मैं भी उन्हें किस करने लगा.

आपको तो बहुत मज़ा आया होगा।मैंने कहा- यार आपी को खुदा ने बहुत गरम बनाया है. तू सिर्फ मेरा है और इस गांड पर सिर्फ मेरा हक़ है।यह कहकर उन्होंने मेरी गांड में उंगली डाल दी. यह कहती हुई वो एकदम से घूम गई पर मैंने लौड़ा अर्श की चूत में ही डाले रखा।अर्श का मुँह अब मेरी तरफ था। मैंने दो जोरदार झटके लगाए और अर्श को बायीं तरफ घुमा कर उसको राउंड जैसे घुमा दिया। वो गोल चक्कर जैसे घूम गई.

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तो मैं तुमको दिल्ली घुमाऊँगा।उस वक्त तो तो वो हँस कर वहाँ से भाग गई।मैंने अन्दर भावना के नाम की मुठ मारी और गीली पैन्ट के साथ ही सो गया।मैं इस देसी लड़की की चूत लेने के लिए बस एक मौके की राह देख रहा था।मौका गाँव में तो मिला नहीं इसलिए मैं अपना बिस्तर पोटला और लाचार लंड ले कर दिल्ली निकल गया।एक आस बची थी. थोड़ी चूत खुली होगी तो आराम से बाहर आ जाएगा।अब बाबा धीरे-धीरे मज़ा लेते हुए मेरे मम्मे दबा रहे थे और मेरे होंठों का रस पी रहे थे।मेरे रोने का उनके ऊपर कोई असर नहीं हो रहा था।कुछ मिनट ऐसे ही मेरे ऊपर पड़े रहे और मेरे दूध चूसते रहे.

तो मैं भी रो देता।मेरी आपी ने अपना सिर घुटनों से उठाया उनकी बड़ी-बड़ी आँखें आँसुओं में भीग कर मज़ीद रोशन हो गई थीं। उनके पलकों पर रुके आँसू देख कर मेरी आँखें भी टपक पड़ीं। आपी ने मेरी आँख में आँसू देखा तो तड़फ कर मेरे चेहरे को दोनों हाथों में थाम लिया और मेरे माथे को चूमते हुए भर्राई हुई आवाज़ में कहने लगीं।‘नाअ. तो भाभी मुझे देख कर मुस्कुराने लगतीं और मैं भी भाभी की मुस्कुराहट का जवाब मुस्कुराहट से देता।दोस्तो, मुझे उम्मीद है कि आप सभी को मेरी इस कहानी में मजा आया होगा. उन्हें देखकर मैं पागल सा हो गया, उन्हें देखकर मेरे ऊपर भूत सवार हो गया और मैं उन पर टूट पड़ा.

क्या देख रहा है?उसके मुँह से ये शब्द सुन कर तो मेरा लण्ड और कड़क हो गया, मैंने ज़ोर लगाया. मैंने बहुत सारा तेल उनकी गाण्ड पर डाल दिया और उंगली से गाण्ड के छेद में अन्दर-बाहर करने लगा।वो दर्द मिश्रित मजे से पागल हुई जा रही थीं और बोल रही थीं- उफफफ्फ़. मुझे कुछ फिर से हो रहा है।’मैंने उसके कान में धीरे से कहा- पायल मेरी जॉकी के अन्दर हाथ डाल कर सहलाओ ना।पायल- नहीं.

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आप चाहो तो मेरे से दोस्ती कर सकती हो या मत करो। मैं हर किसी से इतना करीब नहीं होता. उन्हें भी ये सोच मज़ा दे रही थी कि वो अपने सगे भाईयों के सामने अपने सीने के उभारों को खोले बैठी हैं और अपनी टाँगों के दरमियान हाथ फेर रही हैं।आपी उस दिन 3 बार डिसचार्ज हुई थीं लेकिन वे खुल कर डिसचार्ज नहीं होती थीं।मैंने महसूस किया था कि उनके अंदाज़ में अभी झिझक बाकी थी।लेकिन पहले दिन से मुकाबला करें. तो नेहा पर भी दिल आया हुआ है तुम्हारा?मैंने कहा- ऐसा कुछ नहीं है यार.

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बीएफ चुदाई चुदाई वाली लेकिन हैरत अंगैज़ तौर पर इस तक़लीफ़ से मुझे अनजानी सी लज्जत महसूस होने लगी।मेरा लण्ड आपी की चूत के नीचे दबे हुए ही सख़्त होना शुरू हो गया।आपी ने दाँतों से काटने के साथ-साथ अब मेरे कंधों. ऊपर स्टडी रूम में होंगी।’अम्मी ने सीढ़ियों की तरफ मुँह कर के तेज आवाज़ लगाई- रुहीययई.

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’ भरते हुए जल्दी-जल्दी अपनी कमर को उचकाने लगीं और साथ में ही कभी मेरे गालों को. उनमें आप लोगों ने मेरे बारे में बहुत कुछ जान लिया होगा और अब मैं इस शृंखला का अगला हिस्सा आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ।अभी तक आपने पढ़ा कि कैसे आलोक और उसके बाद रोहन भी मेरे नंगे जिस्म को देखकर मेरे साथ सम्भोग कर चुके थे और रोहन को हुई परेशानी की वजह से मुझे भी उसके साथ चुदाई करने का मौका मिल गया था।अब आगे. शायद मुखिया के यहाँ की शादी के चक्कर में सब गए हुए थे।मैंने रजबाहे के पास पहुँच कर वैशाली से कहा- चल कपड़े उतार!वो बोली- मुझे तुम्हारे सामने कपड़े उतारने में शर्म आ रही है।मैंने कहा- फिर तैरना कैसे सीखेगी?मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए सिर्फ कच्छा पहने खड़ा हो गया, मेरा लण्ड कुछ-कुछ सुरसुरा रहा था।मैंने उससे कहा- देख तुझे ऐसे होना पड़ेगा जैसे मैं हूँ.

पहले ही बता रही हूँ।यह बात कहते हो आपी की आँखें उस टाइम बिल्कुल बिल्ली से मुशबाह हो गई थीं और उन आँखों में बगावत का तूफान था. और उन्होंने बोला कि अंकल का आना जरूरी है।यह सोच कर हम सबने लौटने का प्लान बनाया. চুদাচুদি ডান্সसमय आने पर बताऊंगा।कोमल- ओके।तब तक घड़ी में चार बज गए और भाभी कॉफ़ी बना कर लाईं और वो मुझे कॉफी देने झुकीं.

कुछ नहीं होगा।फिर कुछ देर बात करने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे मेरी जांघ पर हाथ फेरते हुए मेरे मम्मों को दबाना शुरू कर दिया, फिर वे मेरे सारे कपड़े उतार कर मुझे चुम्बन करने लगे।मुझे थोड़ा मज़ा आ रहा था.

वे बहुत साधारण परिवार की हैं, हम तीनों लड़के भी साधारण परिवार से हैं।हमारे पार्लर में एक मैडम आती हैं ईशिता. पर वह किसी भी हालत में 25 से अधिक की नहीं लगती थी। वज़न लगभग 55 किलो था.

पर ना जाने क्यों उसकी खूबसूरती मेरे दिल को भा गई।मैं सोचने लगा कि काश ये लड़की मेरी गर्लफ्रेंड बन जाए. वो साथ-साथ आपकी चूत के दाने(क्लिट) को भी चूसता रहेगा तो दर्द नहीं होगा।मेरी बात सुन कर फरहान खुश होता हुआ बोला- हाँ आपी ऊपर आ जाएँ. मैं लेटे हुआ मोबाइल पर फन्नी वीडियो देख रहा था और वो मेरे पैर के पास बैठी हुई थी।मैंने उसे अपने पास बुलाया और बोला- आराम से पैर फैला लो।वो मेरे पास आ गई तो मैंने करवट ले ली।मैंने उससे पूछा- तुम्हें बच्चों की मूवी अच्छी लगती हैं?तो उसने बोला- आप क्या देख रहे हैं?मैंने कहा- फन्नी वीडियोज.

मेरे सो जाने के बाद आपने आपी के साथ क्या-क्या किया था?मैंने जान छुड़ाने के लिए फरहान से कहा- यार छोड़.

जो मुझे और भी मदहोश कर रही थीं।मैंने अपने बालों को अपने गले के दायीं तरफ कर लिया और मैं उसके लण्ड पर ऊपर-नीचे होते हुए उसके सीने को चूमने लगी।रोहन ने भी अब नीचे से तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए. मैं जानबूझ कर थोड़ी अम्मी को वापिस लाया हूँ।यह कह कर फरहान मुझे मनाने लगा. तो आपी सामने वॉशबेसिन पर खड़ी गंदे बर्तन धो रही थीं, उनके दोनों हाथ साबुन से सने थे।मैं अन्दर दाखिल हुआ और आपी को पीछे से जकड़ते हुए हाथ आगे करके आपी के खूबसूरत उभारों को अपने हाथ में पकड़ा और कहा- क्या हाल है मेरी सोहनी बहना जी?आपी मेरी इस हरकत पर मचल उठीं और मेरे सीने पर अपनी कोहनियों से दबाव देते हुए मुझे पीछे हटाने की कोशिश की और दबी आवाज़ में बोलीं- सगीर.

ऐश्वर्या राय ना सेक्सी फोटोइसलिए मैंने मिनी स्कर्ट टॉप पहना और चाय पीने लगी।तब तक ये सब उठ गए थे, सबने मुझसे ‘गुड मॉर्निंग’ कहा।मेरे पास पप्पू आया और मुझे किस करने लगा. तो मैंने उसको देखते हुए बोला- अरे तुम कब आईं?तो वो बोली- मैं तो आधे घंटे पहले आ गई थी.

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तो मैंने उसे निकालने की सोची।वैसे तो पैंटी ढीली ही थी। मैंने पैंटी को थोड़ा खींचा तो तो वह थोड़ा खिसकी. उसका एक पैर मुड़ा हुआ और उल्टा पैर मेरे पैर के ऊपर रखा हुआ। उसका ग्रीन कलर का टॉप. क्या पहना है?तो मैंने बोला- मैं स्टैंड के पास हूँ और टी-शर्ट पहनी हुई है। तुमने क्या पहना है?तो उसने बोला- काले रंग का सूट पहना है।मैंने देखा एक लड़की जिसका फेस ढका हुआ था.

लेकिन ऐसा मज़ा कहीं नहीं है।फिर मैंने उसे मेरा लंड चूसने को बोला लेकिन उसने मना कर दिया, मैंने भी फोर्स नहीं किया।मैंने सोचा अब तो मौका हाथ में आ ही गया है. मगर सिमरन को पहली नज़र में देखते ही उसकी प्यारी सी सूरत मेरे दिल में घर कर गई।मगर उसको अपने प्यार का इज़हार करने की मेरी हिम्मत नहीं होती थी।मुझे डर था कि कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए।मैं सुबह दस बजे काम पर निकल जाता था और शाम को 7 बजे ही घर आता था।जून का महीना होने के कारण अँधेरा भी लगभग 8 बजे तक ही होता था. डर नहीं लगेगा तेरे को?मैंने कहा- रह जाऊँगा।तब मम्मी बोलीं- कामना की मम्मी से कह दूँगी आज रात वो यहाँ पर रुक जाएँगी।मैंने कहा- ठीक है।शाम हो गई.

तो वह खड़ा था। मैंने अभी अण्डरवियर भी नहीं पहनी थी, सिर्फ़ तौलिया लपेटा हुआ था।वह अपनी सलवार सिलने के लिए आई थी। उस समय मेरा कोई मन नहीं था. फिर एक चुप्पी सी खामोशी छा गई। कोई कुछ नहीं बोल रहा था।हम दोनों एक-दूसरे की दिल की बात जानते थे. दूध ऐसे थोड़ी ही आता है।मैं- तो कैसे आता है?भारती भाभी- अरे वो तो बच्चा पैदा होने के बाद आता है।मुझे यह मालूम नहीं था, सोचा आज यह नया जानने को मिला।मैं- तो आप भी माँ बन जाओ न।भारती भाभी- मैं तो तैयार ही हूँ.

आगे तो और मजा आएगा।मैंने पीछे हाथ डाल कर उनकी ब्रा को खोल दिया और उनके दोनों कबूतरों को जोर-जोर से दबाने लगा।भाभी अब और जोश में आ गईं. पर मैं चाहता था कि वो आज रात मेरे साथ ही रहे।तब तक मेरे मन में उसे चोदने का कोई ख्याल नहीं था.

मज़ा आया अपना ही जूस चख के?आपी ने भी मुस्कुरा के मुझे देखा और कहा- तुम खुद तो गंदे हो ही.

मगर फिर भी मैं और भैया पसीने से लथपथ हो गए थे।आज करीब दो अढ़ाई साल के बाद मैंने किसी के साथ यौन सम्बन्ध बनाया था. इंदौर की लड़की की सेक्सी वीडियोअपना लण्ड निकाल लो।तभी मैं उसे बोला- तनु तुम्हारी चूत कम चुदी है न. हंसिका मोटवानीxxxमैं अपनी पढ़ाई करके शाम को खाना खाने के बाद सोने की तैयारी कर रहा था।तभी करीना आ गई और मुझसे बोली- आज शनिवार है और टीवी पर आज फिल्म आ रही होगी. मैं खामखाँ का रिस्क नहीं लूँगी समझे??मैंने आपी की बात को अनसुनी करते हुए मासूम बनते हुए कहा- चलें छोड़ें.

मेरी प्यारी बहन हो या नहीं?‘बहन क्या इसी काम के लिए है?’ आपी ने कहा और दबी सी मुस्कुराहट चेहरे पर आ गई।मैंने कहा- चलो ना यार.

’कहते हुए उसने मेरे चूचों के निपल चुटकी में मसल दिए और मेरी गर्दन पर चूमने लगा।धीरे अब उसने लंड को आगे पीछे धकेलना शुरु किया. तो उन्होंने मेरे सीने पर हाथ रख कर पीछे ढकेल दिया और रोते हुए कहा- ये. और चाची को पकड़ कर जबरदस्ती उनका ब्लाउज फाड़ दिया और ब्रा को नोंच कर बाहर निकाल लिया।अब मैं अपने रूम की तरफ भागा।चाची भी मेरे पीछे दौड़ पड़ीं। वो भी ऊपर से नंगी थीं.

चलो खेलते हैं।वो ताश के पत्ते लाईं और हम खेलते हुए बात करने लगे।मैं- भाभी ये तो खेल है. रंडी सिर्फ़ एक औरत की तरह चुदवाती हैं। मर्द से पूरा मज़ा लेती हैं और मर्द को पूरा मज़ा देती हैं।‘अच्छा और क्या करती है रंडियां?’‘बोलो मौसी चोदूँ तुम्हें रंडी की तरह?’‘एयाया. आप मेरे बालों को रबड़ से बांध दीजिए प्लीज़।मैंने तुरंत पास ही चारपाई पर रखा रबड़ उठाया और मंजू के पीछे जाकर उसकी गाण्ड के छेद के पास से बाल पकड़ लिए, इसी बहाने मैंने धीरे से उसके चूतड़ छू लिए.

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ब्लड के और दिन में आपने उसकी सलवार भी देखी ही थी।आपी ने मेरी गुद्दी पर एक चपत रसीद की और कहा- मेनसिस तो उससे 3 साल पहले से हो रहे हैं. उनके घुटने ऊँचे करके उनकी चूत की कोमल फांकों से अपनी जीभ भिड़ा दी।भाभी ‘आह. मगर कुछ भी हो मुझे तो बहुत मजा आ रहा था।अब तो उत्तेजना से मैं पागल हो रहा था।एक बार फ़िर से भाभी ने ‘आह.

दूसरे हाथ से उसने मुझको कस के पकड़ रखा था।हम दोनों काफी देर तक चुम्बन करते रहे, फिर मैंने अपने हाथ को उसकी चूची पर रख दिया।आअह्ह्ह क्या अहसास था.

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उसकी गर्म जीभ जब मेरे निप्पलों पर तैर रही थी तो मैं आनन्द के सागर में डूबने लगा.

तो मैंने अपना लण्ड उनके मुँह में डाल दिया और उन्होंने मेरा सारा वीर्य पी लिया।उसके बाद हम रोज भैया के ऑफिस जाने के बाद चुदाई करते।अब वो फिर से प्रेगनेंट हो गई हैं और उन्होंने बताया कि वो बच्चा मेरा है. उन्होंने अपने दोनों उभारों को दबा कर मेरे लण्ड को उनके दरमियान भींच लिया।मैंने दिखावे का गुस्सा दिखाते हुए कहा- आप सही जगह तो डालने देती नहीं हो. इसलिए फिर से मुझे मुठ मारकर ही काम चलाना पड़ा।मैं हँस दी।फिर रोहन बोला- थैंक्स मम्मा.

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कैसे नहीं करने देगी? माँ की लौड़ी तुझे करना ही पड़ेगा।इतना कहकर मैंने उसके बाल पकड़कर उसे घोड़ी बना दिया और फिर उसके बाल खींचकर उसके चूतड़ों पर स्केल से मारने लगा और बोलने लगा- ले माँ की लौड़ी आज तो तेरी गाण्ड फाड़ कर ही रहूँगा. जोर-जोर से चाट रहा था।पायल के बाँहें मेरे चारों तरफ लिपटी थीं, वो कस के कभी मेरी नग्न पीठ सहलाती. दोनों साइड्स तकरीबन 8-8 इंच लंबा और उसकी मोटाई दो इंच के डायामीटर की थी और सेंटर में एक इंच की चौकोर बेस था.

उसकी शादी इस साल होने वाली है। लेकिन हमारा ये प्रोग्राम चलता ही रहता है और आगे भी चलेगा।दोस्तो, बताना कैसी लगी मेरी आपबीती।[emailprotected]. इसलिए मैंने बाथरूम में जाकर अपनी योनि और जाँघों को साफ करके अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गई।अब मुझे पछतावा हो रहा था कि मैंने ये क्या कर दिया? मुझे भैया को कैसे भी करके रोकना चाहिए था।यही सब सोचते-सोचते ही मुझे नींद आ गई।सुबह जब मैं उठी तो मेरा पूरा बदन दर्द कर रहा था।मित्रो, यह कहानी कैसी लगी. इस पर उसने धक्के रोक दिए और अपना लण्ड बाहर खींच लिया। फ़िर अपनी हथेली में ढेर सारा थूक लेकर अपने लण्ड पर लगाया। वापस मेरी चूत के मुँह पर रख कर एक धक्का दिया।इस बार लण्ड कुछ ज्यादा अन्दर चला गया, थोड़ा दर्द तो हुआ पर राजू हल्के-हल्के से धक्के लगाने लगा।मुझे दर्द तो हुआ.

मैं और मंजू तुरंत मस्ती से जागे और थोड़े सामान्य हुए। फिर मंजू ने रोहन को दूध गर्म करके दिया.

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मेरा लण्ड टेबल तोड़ने को कर रहा था।वो धीरे-धीरे मेरी जाँघों के बीच में तेल लगाए जा रही थी और मैं कामोत्तेजना से तड़प रहा था।पैरों की मालिश के बाद अब पीठ की बारी थी. और मेरा घर बड़ा था। मेरे घर में किराए पर एक बंगाली परिवार रहता था। उनके परिवार में तीन लोग थे। भैया भाभी और उनका एक 5 साल का लड़का।भाभी की उम्र कोई ज्यादा नहीं थी. जिससे मैंने अपनी चूत को साफ किया था।मैंने उठकर देखा तो वो पैंटी वहाँ नहीं थी। मैं उसे इधर-उधर ढूंढने लगी.

और हौले से उसे चूसने लगा।मेरी एक उंगली भग्नासे के दाने पर चल रही थी, भाभी मस्ती में अपनी आँखें बंद किए हुए थीं।तुरंत उन्होंने दूसरा चूचुक मेरे मुँह में धकेल दिया और कहने लगीं- संतोष जी अच्छे से चूसो.

मगर मेरा अभी नहीं छूटा था तो मैं उसको मिशनरी पोजीशन में लेटा कर पेलने लगा।वो बोली- प्लीज निकाल लो. और हम दोनों ही मुस्कुरा दिए।फिर आपी अपनी पीठ आईने की तरफ करके अपनी गर्दन घुमा कर अपनी गाण्ड को देखने लगीं. कि मैं क्या देख रहा हूँ।उनमें से एक मीडियम साइज की 26 साल की औरत ने मुझे बोला- क्यों रे तूने आज तक कभी बोबा नहीं देखा.