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तो कैसे समझता कि उसने पहनी ही थी।फिर वो मेरे पास आकर खड़ी हुई और मेरी चड्डी देते हुए बोली- लो और अब कभी भी ऐसी खुश्बू की जरुरत हो. शिल्पी राज का viral mms videoमैं समझ गया कि आंटी की चूत से चूतरस निकल रहा है, मैं अपना मुँह वहाँ ले गया और चूत चाटने लगा।आंटी मेरे बाल पकड़ कर सर को अन्दर धकेल रही थीं।मैं समझ गया कि आंटी फुल फॉर्म में हैं, मैं उनकी चूत को ज़ोर-ज़ोर से चाटने लगा। मैं अपनी जीभ आंटी के चूत के अन्दर डालने लगा, आंटी जम कर मेरा सर दबाने लगी.

तो इक़रा तड़फने लगी।मैंने इसी दौरान अपनी पूरी ताक़त से उसकी चूत में धक्का मारा और मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत के अन्दर चला गया।वो किसी बिन पानी की मछली की तरह तड़फने लगी।सना उसे चुम्बन कर रही थी और मैं उसके मम्मों को चूस रहा था। मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और फिर एक ज़ोर का धक्का मारातो इक़रा बुरी तरह तड़फने लगी और साथ ही एकदम बेजान सी हो गई।मुझे लगा कि जैसे वो मर गई हो. शोला और शबनमउधर से लौट कर आने के बाद शौकत बहुत उत्तेजित थे।उस दिन उनका लंड भी चुदाई की उत्तेजना से फनफना रहा था।मेरे पूछने पर शौकत ने बताया- मुंबई में अचानक मेरी मुलाकात सैम से हो गई है। करीब 20 साल बाद हम दोनों दोस्त मिले थे.

इसके जैसा शायद किसी के पास नहीं होगा।भिखारी एकदम घबरा गया और झटके से उठ गया।इसी हड़बड़ाहट में तौलिया खुल कर उसके पैरों में गिर गया और फनफनाता हुआ उसका विशाल लौड़ा आज़ाद हो गया।भिखारी- न.आदिवासी हिंदी सेक्सी बीएफ: तब ऐसा ही लगा था कि यह बहुत चालू माल होगी… खूब चुदाई करवाती होगी।परन्तु जरा सी ही देर में ही वो ऐसी हो गई…फ़ुद्दी में घुसा लौड़ा भी निकाल दिया और अब कितना शर्मा रही है जैसे पहली बार मर्द का लिंग देखा हो।किशोरी- भैया, मुझे तो बहुत शरम आ रही है।मैं- ऐसा क्यों पागल.

अब हमको चिंता होने लगी कि अब बिना पैसों के कैसे रहेंगे।लेकिन अभी भी हमारी पास राजेश्वरी की माँ के ज़ेवर थे.अब उसके दिमाग़ में प्रिया घूम रही थी।तो दोस्तो, आज सोमवार आ गया जिसका आपको बड़ी बेसब्री से इन्तजार था यानि कहानी अपने चरम पर आ गई.

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अभी तुम्हारी तबियत भी ठीक नहीं है।तो उसने मुँह बनाते हुए बोला- ज्यादा हमदर्दी दिखाने की कोशिश मत करो.उस वक्त मेरी उम्र 19 साल की थी।हम लोग अपने नए घर में रहने चले गए थे।वहाँ मेरी मुलाकात एक लड़की से हुई.

ठीक है।मैं- हाँ और अगर नहीं मिली तो?भाभी- तब की तब सोचेंगे।मैं- ठीक है मैं आप को 30 दिनों की मोहलत देता हूँ।भाभी- ठीक है।हम फ़िर सोने जा ही रहे थे कि फोन आया कि भैया का एक्सिडेंट हुआ है और वे हस्पताल में भर्ती हैं।मैं तुरन्त भाभी को लेकर हस्पताल गया. आदिवासी हिंदी सेक्सी बीएफ बाबा जानती हूँ।रजनीश बोला- लेकिन भाभी…बीच में ही उसको टोकते हुए विभा बोली- अरे भई कितनी बार मुझे भाभी बोलेगा.

पूरा हफ्ता हम दोनों घर में नंगे ही रहेंगे।मैं चलते-फिरते कभी भी उसके दूध दबा देता था।उसकी गान्ड पर थपकी करता.

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देखो कैसे झांक रही है झरोखे से…मैंने नलिनी भाभी को बाँहों में कसकर उनके लाल होंठों को चूमते हुए कहा।और उन्होंने…कहानी जारी रहेगी।. लेकिन एक बार अचानक मैं उनके कमरे में गया तो वो सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में थीं और साड़ी पहन रही थीं।लेकिन जब मैंने उन्हें देखा तो देखता ही रह गया. जिसके कारण मेरा लौड़ा दुबारा तन कर खड़ा हो गया।अब राधिका ने कहा- पंकज तुम भी मेरी चूत को चाटो।मैं राधिका की चूत को चाटने लगा.

लेकिन शायद अब भी कुछ-कुछ शर्मा रहे थे।शौकत ने फिर पलट कर अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख कर चूमते हुए कहा- ज़रीना मेरी जान. कहकर मैंने फटाफट खाना ख़त्म किया। इतने में चाची ने भी अपना काम खत्म किया और मेरी ओर देख कर मुस्कराईं. तो फिर घबरा गई। मेरी आँखें भय से खुली की खुली रह गईं…दरवाजे पर वही बगल वाले दादा जी अपने उन्हीं हमउम्र साथी के साथ खड़े थे।तीन बुड्डों ने मेरी चूत की सील तोड़ी-1जिन्होंने उस दिन हम लोगों को पकड़ा था और उनके साथ एक बुजुर्गवार और थे.

मैंने अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया क्योंकि अब भी किसी के आने का खतरा था और सोनम की सिसकारियाँ हर लगते धक्के के साथ और तेज हो रही थीं।उस वक़्त भी सोनम के मुँह से ‘गूँ. उसकी चूत को चूसने ओर चाटने लगा।मुझे उसकी गुदगुदी चूत चाटने में बड़ा मज़ा आ रहा था। उसकी चूत से निकलता हुआ रस. और तुम मेरी चूत के अन्दर ही अपना मॉल निकाल दो।मैंने और ज़ोर से धक्के मारना शुरू कर दिए। कुछ 10-12 धक्के और लगा कर मैंने सारा माल उसकी चूत में निकाल दिया इसके साथ ही वो भी छूट चुकी थी।फिर उसने और मैंने कपड़े पहने और मैंने उसको पैसे उधार दिए। उसने मुझे गले लगा कर चुम्बन किया और कहा- जब भी मौका मिलेगा.

मैंने अब उसकी आखिरी झिझक को दूर करना ही उचित समझा और उसका एक हाथ पकड़ कर उसे सीधे अपने ‘नवाब साब’ पर रख दिया।मेरे लिए किसी लड़की या स्त्री का मेरे लंड को छूना कोई पहली बार नहीं था लेकिन फिर भी लंड तो लंड ही होता है… जब भी कोई नया हाथ उसे दुलार करे तो वो ठुनक कर उसका स्वागत जरूर करता है… मेरे लंड ने भी वंदना के हाथ पड़ते ही ठुनक कर उसका स्वागत किया. भाभी मुस्कुरा उठीं, बोली- अरे वाह्… त्युम भी सविता भाभी कार्टून के शौकीन हो?और बैठ कर उन्होंने मेरा लवड़ा पकड़ लिया।कुछ देर लौड़े को हाथ से सहलाने के बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा और अपने मुँह में ‘गप्प’ से सुपारे को दबा लिया।‘आह्ह.

मेरा पेट खराब है, तू चली जा।उसके जाते ही मैंने दरवाजा बंद कर दिए और अपने कपड़े उतार कर बाथरूम में घुस गई।बाथरूम में वो अब भी लंड सहला रहा था।सर्दी के मौसम में भी मैंने फुव्वारा चला कर उसे अपने आगोश में ले लिया और उसने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया।वासना की आंधी फव्वारे की बारिश में चलने लगी।मेरे सन्तरे उसने अपने मुँह में भर लिए.

वो मुझे पागलों की तरह चूमने लगी।मैं भी जोश में आ गया और ज़ोर से होंठों को काट लिया।वो मुझे धक्का देकर बोली- अह.

अकेले में मैंने सोनम से पूछा तो वो बोली- मैंने तुम्हारी इच्छा पूरी कर दी है…मैं बोला- कौन सी?तो वो बोली- तुम्हें पूनम का दूध जो पीना था. मजा आ रहा है।पर मेरा उसे स्पेंक करने का मन नहीं किया और मैं उसे चोदता रहा।वो फिर से चिल्लाई और एक बार फिर झड़ गई।उसके चूतरस की वजह से मेरा लंड बाहर आ गया और उसके उसके सफ़ेद पानी से मेरा पूरा लंड में रस में भिड़ा हुआ था।वो बोली- बस करो. क्या सोच रहे हो? क्या तुम अब भी उस बात को लेकर परेशान हो? देखो मैंने सामने वाली आंटी से अभी बात की है और उन्हें समझा दिया है.

उसका बदन किसी साँचे में ढली मूरत क़ी तरह था।मैं उसके स्तनों को चूसने लगा और फिर उसकी नाभि के पास अपनी गरम सांसों को छोड़ते हुए दुबारा उसके होंठों को चूमने लगा।इस ठंडे मौसम में हम दोनों को एक-दूसरे के बदन की गर्मी स्वर्ग जैसा सुख दे रही थी।मैं जब-जब अपनी गरम सांसों को उसकी गर्दन के पास छोड़ता था. जब तक आखिरी बूँद धरती पर ना टपक गई।तभी हंसने की आवाज सुनकर मुड़ कर देखा तो कविता की मौसी की दोनों लड़कियाँ अपनी दीवार से देख रही थीं।मैं उन दोनों को हँसता देखने लगा।तो पलक. लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी।मैं आनन्द के बारे में सोच रही थी… पता नहीं लेकिन मुझे बार-बार उसका लंड याद आने लगा।लेकिन एक मन कह रहा था कि यह आनन्द अच्छा इंसान नहीं है.

क्लास से निकलते ही में सिगरेट लेने पान की दुकान पर चली गई।सिगरेट लेते ही जब जलाने को माचिस मांगी तो वही लड़का लाइटर जलाकर खड़ा हो गया।मैं हंस पड़ी और सिगरेट पीते-पीते हम चलने लगे बात होने लगी।बातों-बातों में उसने बताया आज उसका बर्थ-डे था.

पूरी दोपहर बैठ कर थक गए हैं।दोनों कमरे में जाकर लेट जाते हैं। अनुजा विकास की पैन्ट का हुक खोलने लगती है।विकास- क्या बात है. वही रात की ‘आहें’ आज सुबह चीखों में बदल गई थीं।करीब 15 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद हम दोनों बिस्तर पर पड़े एक-दूसरे की आँखों में आँखें डाले वक़्त बिता रहे थे।फिर अगले 3 महीने तक नीता और मैं एक गहरी और जिस्मानी रिश्ते में रहे।आगे की कहानी चलती रहेगी। अपने विचार मेल पर भेजिएगा।. जिससे वह बहुत जोर-जोर से ‘आहें’ भरने लगी। वह अपना सिर बार-बार इधर-उधर कर रही थी।मैंने 5 मिनट तक वहाँ उसे बहुत रफ़्तार से रगड़ा और जैसे ही उसे आगे चूत के छेद के पास पहुँचा.

दीपाली के सामने खड़ा होकर विकास उसके कपड़े निकालने लगा। तभी पर्दे के पीछे से प्रिया ने झाँक कर अपनी मौजूदगी उसे बता दी कि मैं यहाँ हूँ।विकास ने इशारे से उसे वहीं रहने को कहा और दीपाली को नंगा करने में लग गया।विकास- जान मैंने कहा था ना. गाड़ी हिला के बता देते है कि गाड़ी में पेट्रोल कितना है?***आज तक समझ में नहीं आया किOK की जगह KऔरGOOD MORNING की जगह GM लिखने वाले जीवन के 2 सेकंड बचा के क्या तीर मार लेते हैं?और यह hmmm… वालों ने तो नाक में दम कर रखा है,लगता है कि साला भैंस से बात कर रहा हूँ !***माता पिता अपनी बिटिया के लिए सुयोग्य वर खोजते समय दो बातों का ख्याल रखते हैं…एक तो लड़का खाते-पीते घर का हो…. मेरा नाम सुशांत है, मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ।मेरी शादी हो चुकी है और यह कहानी मेरे शादी के बाद हुई सच्ची घटना पर आधारित है।मुझे एक बार व्यावसायिक सिलसिले में जयपुर जाना था, वहाँ मेरी मौसी की बेटी इंजीनियरिंग पढ़ रही थी, उसका नाम दीपिका है।मैंने दीपिका को फ़ोन करके मेरे आने की खबर बताया, तो वो बहुत खुश हुई और बोली- मेरे फ्लैट पर ही आना.

पैसे भी बन जाते हैं और चूत की प्यास भी बुझ जाती है।’मैं ये सुन कर दंग रह गया, बुआ और कॉल-गर्ल? अब तो खुल कर मज़ा लूटना है.

असली मजा लेने का तरीका कल समझाऊँगी।वो बोला- अब अपना स्वाद चखाइए।मैं बिस्तर पर अपनी सलवार खोल कर चित्त लेट गई और अपने घुटने पेट की ओर मोड़ लिए।उसने मेरी बाल रहित बुर के होंठ से अपने होंठ भिड़ा दिए और चूत की पुत्तीयों को अपने मुँह में भरकर बुरी तरह चूसने लगा।उसके चूसने के ढंग से उसके अनाड़ीपन झलक रहा था. एक लड़की का नीचे वाला हिस्सा यानी उसकी चूत चाट रहा था और लड़की मस्ती में ‘आह उस्स्स्ष’ कर रही थी।एक बात मैं बता दूँ कि अभी तक मुझे सेक्स के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

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मैं सब ठीक कर दूँगा।ऐसा बोल कर मैंने भाभी को चुम्बन करना शुरू कर दिया…तकरीबन मैं दस मिनट तक उसे चूमता रहा और ब्लाउज के ऊपर से मम्मे सहलाता रहा. मैं दोपहर को 2 घंटे सोती रही।इसके बाद मैं वहाँ कई दिन रही और मौका लगते ही हम चुदाई करते रहे। बाद में उसने मुझे मेडिकल-स्टोर से गोली लाकर दी. चूसो उफ़ मज़ा आ गया आहह…प्रिया ने दीपाली के मुँह से लौड़ा निकाल कर अपने मुँह में डाल लिया। दीपाली ने उसकी गोटियाँ पूरी मुँह में ले लीं और ज़बरदस्त चुसाई शुरू कर दी।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !दीपक- आहह.

वो बहुत मस्त लगती थी।लेकिन उस दिन के बाद वो मुझे अपने जिस्म से हाथ भी नहीं लगाने देती थी।इस घटना के बाद मैंने उसे बहुत बार बाहर चलने को और सेक्स करने को कहा.

दस मिनट तक वो मेरी चूत चूसते रहे और मेरा पानी भी निकाल दिया।अब दस बज गए थे और अंकल फिर से मेरी चूत मारने को तैयार थे।उन्होंने मेरी दोनों टाँगें जितनी फैला सकते थे. क्योंकि सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी ही पहननी थी।फिर भी वो अन्दर गईं और जब वो बाहर आई तो इतनी सेक्सी लग रही थीं. शर्म देखना चाहती थीं।उस पीड़ा से बचने की वजह से मुझे आँखें भी खोलनी पड़ीं और मैं छत की तरफ देखता रह गया।मेरी कानों में उन सबके ज़ोर-ज़ोर से हँसने की और ‘कम ऑन तानिया.

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पर अभी आगे भी मैंने कई चुदाईयाँ की हैं।वो आगे की कहानियों में बताऊँगा।धन्यवाद।मुझे उम्मीद है कि आप सबको कहानी पसंद आई होगी. मैं कुछ पल ऐसे ही रुका रहा और उसके मम्मों को सहलाते हुए उसकी कमर पर चुम्मियाँ करता रहा। जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए.

वो सब यही है आगे और भी कुछ ऐसे सीन आएँगे जो अनुजा ने बताए कि कैसे सब करना है।दीपक अपने आप से कहने लगा- साले बोल दे. लेकिन सौम्य तरीके से कान के चारों ओर जीभ घुमाना भी उनमें उत्तेजना का संचार करता है।किसी महिला के लिए एक बड़ा ही टर्निंग प्वांइट होता है. तो वो किसी खरबूजे से कम नहीं लग रहे थे।उसके मम्मों का साइज़ 36 इंच का रहा होगा उसके जिस्म का उतार-चढ़ाव 36-30-38 का रहा होगा।जब वो जरा घूमी.

उम्म्म स्स्स्स्स्श्ह्ह’ के साथ अपनी कमर बिस्तर पर पटकने लगी।सबसे ताज्जुब वाली बात तो यह थी कि उसकी चूत में इतनी गर्मी थी कि जल्द बर्फ का दम घुट गया और रिस कर बाहर बह गई.

फिर हाथ से रगड़ने लगी। उसके बाद साबुन लगाकर चूत को रगड़ते हुए अपनी ऊँगली बुर में अन्दर-बाहर करने लगी।इसी के साथ मेरा हाथ भी लंड पर तेजी से चलने लगा और कुछ ही पलों में मेरा वीर्य दीवार पर गिरा।अक्सर वो इसी तरह नहाती और मैं आँखें सेंकता. मैं काम नहीं करूंगा।इस पर उन्होंने फ़ोन लगाया और कहा- लो बात कर लो।मैं बोला- शाम को कैम पर बात कर लूँगा. आज मैं इससे अपनी चूत की प्यास बुझवाऊँगी।अब हम दोनों पागलों की तरह एक-दूसरे को चुम्बन करने लगे।मैं एक हाथ उसकी चूत पर ले गया तो देखा.

विकास पागलों की तरह उसके मुँह को चोदने लगा।काफ़ी देर बाद विकास ने लौड़ा मुँह से बाहर निकाला।विकास- चल अब घोड़ी बन जा बस अब तेरी गाण्ड में ही झडूंगा. वो लोग चले गए।अब मैं और रमशा अकेले बैठे थे तब उसने पूछा- आपको भूख लगी है?मैंने बोला- हाँ।बोली- मैं कुछ बनाती हूँ।यह कहकर वो घर में चली गई.

निकाल दिए…अब वो मेरे अंडरवियर को देख कर बोली- तुम अपना पप्पू दिखाओ ना…मैंने अपना लवड़ा बाहर निकाला- देख लो. कितनी गर्म औरत और चुदक्कड़ माल हूँ।सैम ने कहा- मैं तो अगले हफ्ते ही तीन दिन के लिए दिल्ली आ रहा हूँ।शौकत ने सैम को हमारे घर पर ही रुकने का निमंत्रण दे दिया. ’ करके झड़ गई।मैंने उसकी चूत का सारा पानी पी लिया और चूत को चाटता रहा।मेरे चाटने से थोड़ी ही देर में वो फिर से गरम होने लगी थी।अब मैं उठा और अपना लण्ड उसके मुँह पर रख दिया।उसने मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। वो एक हाथ से अपनी चूत को सहलाने लगी।अब मेरे मुँह से मादक आवाजें निकलने लगी- आअहह…अह.

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फिर हम दोनों ने कोल्ड ड्रिंक पी। उसके बाद मैं उसे अपने कमरे में ले आया।वहाँ हम दोनों 15 मिनट तक एक-दूसरे से चिपके रहे.

ताकि मैं गर्भवती ना हो जाऊँ।मैंने उसको अपने स्कूल का पता दे दिया और पड़ोस का फोन नम्बर भी दे दिया।25 जून 2008 को मुझे लेने मेरा भाई आ गया. वरना एक बार में ही पेट से हो जाएगी और आगे ठुकवाने का मौका गायब हो जाएगा।उनकी बातों से आपको मालूम हो गया होगा कि हमारे परिवार में सब खुली विचारधारा के हैं।सास भी बोली- भाई, मैं तो चली अपने कमरे में. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मैं अन्तर्वासना को तकरीबन आठ साल से पढ़ रहा हूँ।अब तक मैं कितनों के साथ सोया हूँ.

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लेकिन हम दोनों में से कोई भी झड़ने का नाम नहीं ले रहा था।दोस्तो, आप सोच रहे होंगे कि मैं क्या बकवास कर रहा हूँ. जो मैंने उसे दे दी। अगले दिन उसका फिर एक मेल आया था। जिसमें उसने लिखा था कि उसे अपने घर में बॉडी-स्पा करानी है. लेकिन मन ही मन मैं ये सोच रहा था कि अब क्या करूँ? कैसे बात की जाए?फिर दो दिन बाद मेरे दोस्त ने बोला कि उसे भी वो लड़की बहुत पसन्द है.

क्योंकि वो दोनों भी बहुत सुंदर और जवान थीं।एक अप्सरा 440 वोल्ट की थी तो दूसरी परी 230 वोल्ट की थी।पूनम मुझसे बड़ी थी और सोनम मुझसे छोटी थी।दोनों ही एकदम गोरी और सेक्सी थीं।पूनम बहुत ही भरे हुए जिस्म की थी. ’उसकी मस्त आवाज़ें निकल रही थीं।मैं उसे 25 मिनट तक इसी तरह चोदता रहा।फिर मैंने सना को कहा- तू बिस्तर पर लेट जा. वो और उसकी बीवी ही रहते थे। उनको कोई बच्चा नहीं था।मेरा घर अच्छा बना हुआ था और चौकीदार का घर मेरे घर के पीछे था।चौकीदार की बीवी ही.

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मैंने अपने बचपन से आज तक इतनी सुन्दर लड़की नहीं देखी…मैं मुस्करा दी और अपनी आँखें खोल दीं।तो दादा जी बोले- नहीं. पैसे भी बन जाते हैं और चूत की प्यास भी बुझ जाती है।’मैं ये सुन कर दंग रह गया, बुआ और कॉल-गर्ल? अब तो खुल कर मज़ा लूटना है. सब हँसने लगे।फिर हम बाकी के रिश्तेदारों से मिले और ऐसे ही रात हो गई। हम सब काफ़ी थके हुए थे तो हमें नींद आ रही थी और हम रात का डिनर करके सो गए।अगली सुबह मे 9 बजे उठी देखा कि सब तैयारियों में लगे हुए हैं।फिर मैं नहाने चली गई। मैं बाथरूम में गई.

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उसने बीए करने के बाद बीटीसी करने के लिए फार्म भरा और मेरे शहर में परीक्षा देने के लिए सेंटर चुना।अब वो मेरे घर पर रह कर पढ़ाई करने लगी।मैं भी आरआरबी और एसएससी की तैयारी करने लगा।मेरा पढ़ाई का कमरा ऊपर था. लगातार रगड़े और मसले जा रहा था।अब उसने मेरी ब्रा निकाल दी और मेरे कबूतरों को एक हाथ से दबाने लगा और दूसरे मम्मे को चूसने लगा।मैंने अपनी जीन्स का बटन खोल कर हाथ अन्दर कर लिया और अपनी चूत सहलाने लगी।उसने ये देखा तो बोला- जानू ये काम तुम्हारा नहीं. मैंने भी उसके कूल्हों को जोर से पकड़ कर एक तेज झटका मारा और मेरा पूरा लंड उसकी लपलपाती चूत के अन्दर चला गया।हम दोनों ने मिशनरी पोजीशन में लगभग दस मिनट तक चुदाई की। वो चुदाई से मस्त हो गई थी और इस बात को लगातार कह रही थी- ओह्ह.

मैं घर जाने के लिए बस की टिकट लेने गया।कोलकाता से गुजरात के लिए स्लीपर बस चलती हैं।छुट्टियों की वजह से ट्रेन में तो टिकट ही नहीं मिल रहा था।बस में भी बड़ी कम सीटें बची थीं।स्लीपर बस में एक तरफ सिंगल और दूसरी तरफ दो आदमियों के लिए स्लीपर होते हैं।जब मैंने बस वाले से एक सिंगल के लिए कहा. मेरा मन कर रहा था कि अभी अन्दर जाकर उसकी गान्ड में लन्ड डाल दूँ।मेरी चारू की गान्ड कितनी सुन्दर और गोरी थी।इतना देखते ही वहाँ से चला गया और उसके नाम की मुठ मारने लगा।उसके बाद मेरा माल चड्डी में ही गिर गया।जब वो जब नहाने के बाद बाहर निकली तो उसने पूछा- भाई तू क्या खाना चाहते हो?मैंने कहा- जो तू बनाना चाहती हो. घोडा घोडी सेक्स’ ऐसे करती रहीं।फिर मैंने उनकी सलवार का नाड़ा धीरे से खोला और उसे नीचे कर दिया।चाची ने धीरे से मेरे कान में बोलीं- बहुत शैतान हो गया है तू अब.

बाहर खड़ा मेरा नौकर बाहर सब देख रहा था।उसे देख मेरे होश उड़ गए।मैंने तुरंत कपड़े पहने और बाहर आ गया। मैंने उसे अपने जेब से 100 का नोट देते हुए किसी को नहीं बोलने को कहा।उसने झट से पैसे रख लिए और बोला- ये तो मालिक को नहीं बताने का टिप है परंतु मैं भी`चोदूँगा।अब मैं हतप्रभ था.

पर यहाँ तो खुद रूचि ही मुझे रुकने के लिए बोल रही है। ये मैं कैसे हाथ से जाने दूँ।इतने में रूचि बोली- अब क्या सोच रहे हो. मैंने भी अपने लंड पर थोड़ी क्रीम मल ली और फिर मैंने अपना लंड हिलाते हुए उसकी गांड के छेद पर टिकाया।मेरा मोटा सुपारा लगते ही वो बोली- धीरे से अन्दर डालो.

तो मैंने सहारा दिया।भाभी की चूत सूज गई थी और खून भी निकला था।हम बाथरूम में गए और उन्होंने मुझे साफ़ किया. उनकी सफाचट चिकनी चूत को देख कर लगा कि मैं बेहोश ही हो जाऊँगा…भाभी की चूत मेरे सपनों से भी ज्यादा खूबसूरत थी, एकदम गोरी. लेकिन घर जाके मैं सारी रात ये ही सोचता रहा कि क्या ऐसा करना सही रहेगा।अब मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ.

राधिका की गाण्ड मेरे लौड़े के बिल्कुल नजदीक होने से और चिपकने के कारण मेरे लौड़े में एक अजब सा तनाव पैदा हो गया.

मुझे मेरी ईमेल आईडी पर मेल करें साथ ही इसी आईडी से फेसबुक पर भी मुझे सर्च कर सकते हैं।[emailprotected]. पैसे भी बन जाते हैं और चूत की प्यास भी बुझ जाती है।’मैं ये सुन कर दंग रह गया, बुआ और कॉल-गर्ल? अब तो खुल कर मज़ा लूटना है. तो मैंने कहा- मैं शाम तक आ पाऊँगा।शाम को जब मैं उसके कमरे पर पहुँचा तो वो मेरा ही इन्तजार कर रही थी।उसने बताया- मेरे पति काम से बाहर गए हैं।जब मैंने उससे पूछा- क्या बात है.

सेक्सी वीडियो देहाती गानाजैसे ही मेरे लंड ने उसके पेट पे दस्तक दी वैसे ही वंदना ने अपनी आँखें मेरी आँखों में डाल दिन और आश्चर्य से मेरी तरफ देखने लगी।मैंने मुस्कुराकर आँखों ही आँखों में उसे बता दिया कि वो कौन है जो उनसे मिलने को बेताब हुआ जा रहा था. फिर मैडम और मेरे बीच में कॉलेज के दोस्तों की तरह फ्रेंडशिप हो गई।उस दिन हम दोनों हॉलीवुड पिक्चर देख रहे थे और चाय पी रहे थे।मैडम ने गाउन पहना हुआ था और मैडम को देख कर मेरा लण्ड खड़ा होने लगा।मैडम को पता ना चल जाए इसके लिए मैंने लौड़े के उठान पर अपना बैग रख लिया और फिर नर्वस होकर बोला- मैडम मैं चलता हूँ.

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और जोश में आ चुकी थी, उसके मुँह से बहुत सेक्सी आवाज़ निकल रही थी, उसकी साँसें मेरी सांसों से टकरा रही थीं. एक बार…भिखारी को उस पर रहम आ गया और एक झटके से लौड़ा चूत से बाहर खींच लिया।‘सर्ररर’ की आवाज़ के साथ लौड़ा बाहर आ गया. उसको सीधा कर दिया और मेरा खड़ा लवड़ा उसकी चुदासी चूत में घुस गया।अब मैं उसको खड़े-खड़े ही चोद रहा था। थोड़ी देर के बाद मैं उसको बिस्तर के पास लाया और उसको लिटा कर पूरी ताकत से उसकी चूत में धक्के लगा रहा था।जहाँ पिछली रात उसकी सिसकारियाँ और ‘आहें’ सुन रहा था.

सासू माँ भी ऐसा ही कहती हैं जबकि तुम्हारे भैया का खड़ा ही नहीं होता… अब उसमें मेरी क्या गलती है?मैं- भाभी आप रो मत. आज एक बिस्तर में ही सो जाते हैं।तो हम दोनों एक बिस्तर में ही लेट गए।भैया को कपड़े निकाल कर सोने की आदत है. क्या बात करनी है?वो बोली- मैं गायत्री बोल रही हूँ जो आपको घाट पर मिली थी।इस तरह हम दोनों खुलते गए और फिर हम बातें करने लगे।उसने बताया- वो एक तलाक़शुदा औरत है।मैंने पूछा- तुम्हारा तलाक़ कैसे हुआ?उसने बताया कि उसके पति के पास सिर्फ़ पैसा था.

हमारी जीभ से जीभ टकराने लगी। वो भी मेरा साथ दे रही थी। मैं एक हाथ से उसकी चूचियों को दबा रहा था।अब वो अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले गई और उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया। वो मेरे लौड़े को अपनी चूत के छेद पर लगाने लगी. ऐसा बोल कर नीता मेरे पास आई और उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और मुझे चुम्बन करने लगी।मैंने भी उसी की तरह चुम्बन करना शुरू किया. क्योंकि दिसम्बर का महीना था ठंडी जोरों पर थी।जब वो दरवाजा खोलने आईं तो बस एक बॉडी वॉर्मर पहने हुई थीं.

मुझे वो सब गन्दा लग्ता है।इस तरह मैंने उसकी राय जान ली।बाद में रात के खाने के बाद हम लोग टीवी देखने लगे।तभी मैंने फ़्रिज में से आइसक्रीम निकाली और दीदी के कप पर वो दवा मिला दी।वो पाउडर जैसी थी।बाद में मैंने उसे वो दवाई वाला कप उसे दे दिया. और मैं उनके पास से गुजर रही थी।जब मैं गुजर रही थी तो मैंने चाचा को तिरछी नज़रों से देखा और ब्रा की तरफ इशारा करके मुस्करा दी।मित्रो, मेरी चूत में फिर से पानी आ गया है.

और मेरे लण्ड पर बैठ गई।एकदम से हुए इस घटनाक्रम में पहली बार मुझे सम्भलने का वक़्त नहीं मिला। जब तक मैं कुछ करता.

उसने मेरी ओर देखा और मुस्कुरा कर बाथरूम में चला गया।मैंने उसके कपड़े उठाकर अलमारी में रख दिए और काम करने रसोई में जा ही रही थी. ऑडियो स्टोरी हिंदीमैंने कहा- आंटी भूख लगी है।आंटी ने खाना लगाया और हम दोनों ने जल्दी-जल्दी खाना खाया।फिर डीवीडी पर फ़िल्म देखने लगे।कुछ देर बाद हम मेरा मन चुदाई करने को होने लगा, मैंने आंटी की कमीज़ में हाथ डाला और मम्मों को दबाने लगा। मैं उनके मम्मों को दबाता रहा. व्रत खोलने का समयनहीं तो खराब हो जाएंगे।उसने अपने कपड़े बदल लिए। फिर उसने गंदे कपड़े धोने के लिए डाल दिए और साफ़-सफ़ाई कर दी।फिर मैंने उससे कहा- मुझे भूख लगी है. मैं तुम्हारा हमेशा इन्तजार करूँगी।मैंने उसको करीब दो महीने तक चोदा, तब ज़ाकर अब पेट से हुई है।अभी उसको 3 महीने का गर्भ है। वो यही कहती है- ये औलाद तुम्हारी है.

ज़ोर से गाण्ड मारो आह मैडी तेज झटके मारो मेरी आईईइ चूत आईईइ उयाया गई…मैडी के लौड़े ने पानी छोड़ दिया और उसके अहसास से ही दीपाली की चूत भी झड़ गई।इधर दीपक ने अपनी रफ्तार तेज कर ली थी.

’रूपा ने उसके मुँह के नीचे से तकिया हटाया और अपनी चूत पर मुँह रख कर लेट गई और एक हाथ से उसके सिर को चूत पर दबोचने लगी।कुछ देर बाद मैंने धीरे-धीरे नीलम की गाण्ड में लंड पेलना शुरू कर दिया।कस कर फँसा होने के बाद भी मक्खन के कारण लंड फिसल कर गहराई में इंच-इंच करके जा रहा था।जैसे ही वो छटपटाती तो मैं रुक जाता… फिर लंड पीछे खींच कर पेल देता. लण्ड चूत को फाड़ते हुए अन्दर घुस गया।मेरे तेज धक्के से उसकी जोरदार चीख निकल गई।उसकी चीख सुनकर नीचे से माँ की आवाज़ आई- क्या हुआ बेटी?तो उसने कहा- कुछ नहीं. ये निकी की चूत का रस मैं पियूंगा…अब जॉन्सन अंकल ने मेरी चूत में अपना मुँह लगा कर उसके किनारों को चाटते हुए.

जो कुछ ज्यादा ही फूली हुई थी। तब अमन और उसकी गैंग नीचे खड़ी थी। राज ने शायद नीचे से मेरी टाँगों और पैन्टी के दर्शन कर लिए थे।मेरी टाँगों पर कुछ ज्यादा बाल हैं. मेरी चीख निकलते-निकलते रह गई। मैंने मुँह में तकिया को दांतों तले दबा लिया और किसी तरह चीख निकलने नहीं दी. आप सब अपने होश खो देंगे।मेरे घर के सामने सामने एक जैक्सन जॉन्सन नाम का लड़का रहता था। वो मुझे रोज देखता था.

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तो पूछने लगे- क्या हुआ निकी?मैंने कहा- कुछ नहीं…इतनी देर में दूसरे वाले अंकल ने भी मेरे एक मम्मे को पकड़ा और वे भी चाटने लगे और मेरे चूचुक में अपनी जीभ फेरने लगे।मुझे क्या पता था कि इन्हें वो सब पता है कि लड़की को कैसे मदमस्त करते हैं।अब दोनों अंकल ने मेरा एक-एक चूचा मुँह में भर लिया और चूसने लगे।मैं बस ‘उहह. लड़की और स्त्री के बारे में ही सोचने लगा और मेरे दिमाग़ ने मुझे सेक्स का सुपर हीरो बना दिया और इस सोच में मेरा सबसे पसन्दीदा आइटम रहा है वो है लड़की के स्तन…मेरी उमर जैसे-जैसे बढ़ रही थी मेरी नज़र हर जगह औरत को अपनी कमसिन नज़र से ढूँढती रहती थी।मुझे टीवी. तो मैंने सोचा कि पता नहीं कौन है। मैं फिर अपने काम में लग गया और फिर कोई दस मिनट बाद फिर से ‘मिस कॉल’ आया।मैंने फिर वापस कॉल किया.

मैं तो कब से इसी पल का इन्तजार कर रही थी।मैंने उसके लंड को हाथ में लिया और उसके सुपारे को चूम लिया। उसने ‘आह’ किया.

मेरा रंग गोरा और कद 170 सेंटीमीटर का है। मेरा लण्ड काफी लंबा और 3 इंच मोटा है। मुझे सेक्स की बहुत भूख है.

वो बस एक प्यारी-सी परी की तरह मुझे बच्चों जैसी हरकतें करते हुए देख रही थी।फ़िर मैंने चॉकलेट का एक सिरा अपने मुँह में रखा और दूसरा बाहर रहने दिया ताकि वो समझ जाए।वो समझ गई और दूसरा सिरा अपने मुँह में रख कर खाने लगी।हम धीरे-धीरे खाते हुए एक-दूसरे के होंठों की तरफ बढ़ने लगे और फिर जल्द ही चॉकलेट की लंबाई खत्म होने लगी. उसने मुझसे बोला- तुम भी अपना ‘टूल’ दिखाओ।मैंने कहा- अभी तो मैं परिवार के बीच हूँ रात में सब दिखा दूँगा।वो बोली- थोड़ी झलक तो दिखा. होली का पक्का रंग कैसे उतारेइस बार पीटर ने बोला- ओये कन्ज़रो… ए मेज उत्ते स्याई डोल के एदी माँ किन्ने चोद्दी या?अब विलियम खुश हुआ- हां इसे कहते हैं पंजाबी…***सन्ता के घर नवजोत सिंह सिद्धू की तस्वीर लगी हुई थी.

लेकिन एक बात मेरी समझ में नहीं आ रही थी कि मैंने इतना खुल कर कहा था कि चाची मैं आपको फैंटेसी में लेकर मुठ्ठ मारता हूँ. बस सुधीर मान गया और उसने आज चाभी दे दी।अब आप ये सोच रहे होंगे कि कौन दोस्त तो आपको बता दूँ दीपाली के मन में मैडी का ख्याल आया था कि शायद कभी उसको अपनी चूत का मज़ा दे दूँ तो जगह तो चाहिए ना. क्या लन्ड पाया है।यह कह कर वो मेरे लण्ड को मुँह में लेने लगी।थोड़ी देर उसने मुँह में पूरा लवड़ा ले लिया बाद में बोली- चलो अब असली खेल पर आते हैं।अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे… फ़िर मैंने लन्ड को उसकी चूत में डाल दिया और उसको चोदने लगा। चुदाई के साथ-साथ मैं उसके मम्मों भी दबा रहा था।वो भी ‘आह्ह्ह्ह.

तो पूरा कमरा सजाया हुआ था और भाभी दुल्हन के जोड़े में बैठी थीं।फ़िर मैं भाभी के पास गया और घूंघट उठाया. मैंने उसको घुमा कर सीधा किया और उसकी टांगों को खोल दिया। फिर अपने लंड को उसकी चूत पर लगा दिया और अपने हाथ से निशाना लगाकर लंड को चूत पर रगड़ने लगा। लण्ड लगते ही वो बिस्तर पर मचलने लगी थी और मस्ती में इठला रही थी।मैंने उसकी तरफ मुस्कुराते हुए.

तो मैंने राजेश्वरी को फ़ोन किया और उसे घर से भागने का विचार बताया तो पहले तो उसने भी मना कर दिया फिर इस बारे में दूसरे दिन बताने को कहा।फिर हम दोनों ने फोन पर बातचीत खत्म की.

इसे पकड़ वरना तेरे मुँह में लण्ड ठूंस दूँगा।मैं डर गई और उसके लण्ड को पकड़ कर आगे-पीछे करने लगी।फिर हसन ने मुझे कहा- मेरा लण्ड अपने मुँह में डाल छिनाल…मैंने कहा- नहीं. बाहर खड़ा मेरा नौकर बाहर सब देख रहा था।उसे देख मेरे होश उड़ गए।मैंने तुरंत कपड़े पहने और बाहर आ गया। मैंने उसे अपने जेब से 100 का नोट देते हुए किसी को नहीं बोलने को कहा।उसने झट से पैसे रख लिए और बोला- ये तो मालिक को नहीं बताने का टिप है परंतु मैं भी`चोदूँगा।अब मैं हतप्रभ था. पर मुझे अभी घर जाना ही होगा। फिर शाम तक आ जाऊँगा।मैं मन में सोचने लगा कि मैंने तो सोचा था कि अब आना ही कम हो जाएगा.

राठी सेक्सी इस दौरान 2 घंटे तक हमने चुदाई के खूब मजे किए।उसके बाद मैंने पूछा- मज़ा आया?तो बोली- हाँ बहुत ज़्यादा. करीब 10 मिनट रगड़ने के बाद पीठ वाला स्वास्तिक निकल गया और मैं पीछे से हट गया।तब उनके चेहरे पर अजीब सा भाव दिख रहा था.

मेरा गुलाबी रंग का सुपारा उस पर यौन रस आने से चमक रहा था।मैंने ज़्यादा समय ना लेते उसे बिस्तर पर लिटाया और अपना गर्म रॉड डालने के लिए उस पर सवार हो गया।दोनों के भी पहले अनुभव के कारण लंड अन्दर डालने में बहुत तकलीफ़ हुई। हमने चुदाई तो की लेकिन दोनों को भी बहुत दर्द हुआ।दूसरे दिन मेरा शातिर दिमाग़ इस बात पर सोचने लगा कि सोनम को कैसे खुश किया जाए. सेक्स के दौरान वो खुल कर अपने प्रेमी का नाम ले ले कर सिसकारियाँ भरती है, उसके साथ किये गए सेक्स का जिक्र करती है. जो कि बाद में सारे जीवन तुमको याद रहने वाला है।मैं ये सब कहते हुए उसके मम्मों को सहलाता जा रहा था और उसकी चूत के दाने पर अपने अंगूठे से छेड़खानी भी कर रहा था।उसका दर्द अब कम हो चला था क्योंकि अब लण्ड ने ठोकर मारना बंद कर दी थी.

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वो भी विवाहित, जिन्हें मैं पूनम दीदी कहता हूँ। अब घर में मैं और चाचा-चाची ही रहते हैं।चाची को मैं कई बार अपने सपनों में चोद चुका हूँ. जो मेरे साथ पहले कभी नहीं हुआ था।अब मेरा लौड़ा पूरा खड़ा हो चुका था। शायद जिसका अहसास राधिका को भी हो रहा था. तो पाया कि माया बालों को खोले और बहुत ही सरीके से साड़ी पहने हुए खाना पकाने में जुटी थी।गर्दन से लेकर कमर तक का उसका हिस्सा खुला था.

door pe knock kiyaYou: ??Stranger: kaise hoStranger: main saree mein hunStranger: main gumke andhar jaati hun room meinStranger: door kholti hunStranger: hiiiYou: hmm. आह्ह… आईई… आईई… आह्ह्ह… करते हुए धीरे धीरे अपनी चूत को लण्ड पर रगड़ते हुए झड़ रही थी और बुरी तरह हांफ रही थी और निढाल होकर मुझसे चिपट गई।मैं भी हांफते हुए एक बेल की तरह मैडम से चिपट गया।थोड़ी देर के बाद जब हम नार्मल हुए तो मैडम बोली- मनु इतना मज़ा मुझे मेरी लाइफ में आज पहली बार आया है आज से मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ, कभी भी आकर तुम मुझे चोद सकते हो।मैं बोला- ठीक है मैडम।सुबह के 4.

उनकी चूत में जा रहा है।अब मैं धीरे-धीरे उस सुन्दर चेहरे को देखते हुए अपना लौड़ा रोशनी भाभी के मुँह में अन्दर-बाहर करने लगा। बड़ा मजा आ रहा था.

उसकी गांड भी हिल रही थी और वो मस्ती में कामुक आवाजें निकाल रही थी।चुदाई के धक्के तेज होने लगे और उसने बिस्तर को कस कर पकड़ लिया और मैंने उसकी टांगों को. तो पूछने लगे- क्या हुआ निकी?मैंने कहा- कुछ नहीं…इतनी देर में दूसरे वाले अंकल ने भी मेरे एक मम्मे को पकड़ा और वे भी चाटने लगे और मेरे चूचुक में अपनी जीभ फेरने लगे।मुझे क्या पता था कि इन्हें वो सब पता है कि लड़की को कैसे मदमस्त करते हैं।अब दोनों अंकल ने मेरा एक-एक चूचा मुँह में भर लिया और चूसने लगे।मैं बस ‘उहह. फिर जब तू कहेगी तेरी हर तमन्ना खुशी से पूरी कर दूँगा।तो वो उसे मुँह में भरकर कुछ देर चूसने के बाद बोली- ले अब मार ले बाजी.

रमशा की अनचुदी कुंवारी बुर को चोदने के बाद मैं बहुत खुश था। मैं अपने आपको बहुत खुशनसीब मानता हूँ कि रमशा जैसी खूबसूरत लड़की को पहली बार चोदने का मौका मुझे मिला था।चुदाई के बाद मुझे मालूम हुआ कि मेरे नौकर ने हमारी चुदाई को देख लिया था।हैलो दोस्तो, मेरा नाम राजीव कुमार है मैंने इससे पहले मेरी पहली कहानीरमशा की पहली चुदाई-1लिखा था. मुझे इतना मजा कभी नहीं आया था। तभी मेरे लंड ने जोर से पिचकारी छोड़ दी।अब मुझे जब भी बीवी की चुदाई देखने का मन करता है. तू रंडी नहीं बनेगी तो क्या मेरी बीवी बनने का इरादा है?प्रिया- हाँ भाई हम कहीं भाग जाते हैं वहाँ शादी कर लेंगे.

पर एक अजीब सा करेंट दोनों के शरीर में दौड़ गया।खाना अदि खाने के बाद माया ने बिल पे किया जो कि करीब 4200 के आस-पास था और 100 रूपए माया ने वेटर को टिप भी दी।फिर हम दोनों लिफ्ट से नीचे आए और मैं उसे वहीं एंट्री-गेट पर छोड़ कर कार लेने चला गया.

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फ़िर हम लोग घर पहुँच गए।भाभी ने खाना बनाया फ़िर खाना खाने के बाद मैंने कहा- अब सुहागरात मनाते हैं।भाभी ने कहा- थोड़ी देर इंतजार करो।मैंने कहा- ठीक है।भाभी ने कहा- जब तक तुम बाहर हो आओ।फ़िर जब मैं थोड़ी देर बाद कमरे में गया. मैं किसी को नहीं बताऊँगी कि अपना राज अब जवान हो चुका है।मैंने उसे ‘थैंक्स’ बोला और चाय ख़तम करके तुरन्त वापस जाने लगा।भाभी ने मुझे रुकने के लिए कहा. उसके जिस्म में एक अलग ही चमक आ गई।उसका रंग साफ था और लौड़ा भी किसी दूध की कुल्फी जैसा सफेद था।भिखारी ने तौलिए से बदन साफ किया और उसे अपने जिस्म पर लपेट लिया।भिखारी- बेटी कहाँ हो.

तो एक दिन मैंने अपने चौकीदार को बुलाया और उससे छत की सफाई करवाने लगा।चौकीदार छत की सफाई करके चला गया और मैं कुछ देर के लिए वहीं रुक गया। जब मैं छत पर पीछे गया.

तो मैंने कहा- मैं शाम तक आ पाऊँगा।शाम को जब मैं उसके कमरे पर पहुँचा तो वो मेरा ही इन्तजार कर रही थी।उसने बताया- मेरे पति काम से बाहर गए हैं।जब मैंने उससे पूछा- क्या बात है. आह्ह… मेरी चूत का भोसड़ा तो बना दिया आह्ह… अब क्या इरादा है आह्ह… उठो भी…दीपक ने लौड़ा चूत से निकाला तो प्रिया कराह उठी।दीपक एक तरफ लेट गया।दीपाली ने जल्दी से प्रिया की चूत को देखा… कोई खून नहीं था वहाँ हाँ दीपक के लौड़े पर जरा सा लाल सा कुछ लगा था।दीपाली- अरे ये क्या. मैं अपने कमरे में आकर सो गया।अगले दिन मैंने आंटी से पूछा- कल मना क्यों किया था?तो उन्होंने कहा- मैं निधि को पहले तड़पाना चाहती थी.