बीएफ सील टूटती हुई

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मैं पूरे मज़े लेकर उसकी चूत में जीभ डाल कर उसका पूरा रस निचोड़ लेना चाहता था. मौसी ने मेरा हाथ अपने पेट पर रख दिया, मैं भी मौसी का इशारा समझ गया. तब उसने कहा- नहीं … जब वो बिना पिये आता है, तब पूरा अन्दर पेल चोद लेता है, पर उसका लंड तुम्हारी तरह नहीं है तुमने सच कहा है कि उसकी लुल्ली है.

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मैंने भी देर करना ठीक नहीं समझा और मौसी को मैंने मेज़ पर बैठने का इशारा किया. नम्रता थोड़ा पीछे हटते हुए बोली- ऐसे क्या देख रहे हो?मैं- कुछ नहीं यार, तुम्हारी चूत को चोदने और गांड मारने में इस कदर खो गया कि इस सेक्सी जिस्म को ध्यान से देख ही नहीं पाया.

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मैंने उसके लंड को पूरा मुँह में ले लिया और जोर जोर से उसके लंड को चूसने लगी. एक दिन जब मैं क्रिकेट खेलने के लिए जा रहा था तो रास्ते में मुझे एक लड़की दिखाई दी. फिर उसने एक और झटका मारा, जिससे मेरी चूत में उसका लंड अन्दर चला गया.

इसी के साथ नम्रता ने अपने एक हाथ का प्रयोग अपनी चूत पर करना शुरू कर दिया. मैं बार बार लंड को सहला कर उससे कहता कि सो जा यार, लगता है साला रो कर ही सोएगा. दस मिनट तक मैंने उसकी बुर में लंड को अंदर बाहर करते हुए उसकी बुर को चोदा और मेरे लंड ने भी पानी छोड़ दिया.

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फिर मैं फ्रेश हुई और एक शॉर्ट गाउन निकाल कर उससे बोली- वंश मैं ये पहन लूँ?वंश बोला- मम्मी, आप तो लेडी की जगह गर्ल बन के रहने लगी हो. लिफ्ट की तरफ बढ़ते वक़्त मैं उसके पीछे पीछे चल रहा था और उसकी माँसल गांड को देख कर ऊपर वाले का शुक्रिया कर रहा था. करीब आधा घण्टे बाद पापा का पानी मेरी चूत में निकला और मैं करीब करीब बेहोश हो चुकी थी.

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मेरी चूत को चोदते हुए भैया के मुंह से आह्ह् … ओह्ह जैसी आवाजें निकल रही थीं.

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अंकल उसे देख रहे हैं ये देखकर मैं और भी शर्मा गयी- अंकल, ये क्या कर रहे हो … मेरी … पैं. अब आगे:दोस्तो, आप लोगों को जैसा कि मैंने पहले ही बताया था कि मेरे यहां पर नया मकान बन रहा था तो जगह की बहुत प्रॉब्लम थी, परिवार के हम सारे लोग एक ही कमरे में सोते थे. फिर मैंने निहारिका से कहा- जब रात को तेरा पति तेरी चुदाई करे, तो मेरे फोन से कॉल मिला कर यूं ही रख देना.

मैंने खूब जोरों से माँ की चुत का रसपान किया और इसके बाद लंड पेल कर माँ को चोद दिया. मैं डर रहा था कि कहीं ये मामी को मनीषा और मेरी चुदाई के बारे में बता न दे.

तभी अंकल जी ने मेरी कचौरी जैसी फूली चूत अपनी मुट्ठी में भर ली और उसे हौले हौले मसलने लगे, सहलाने लगे जिससे उसके भीतर का गीलापन बाहर तक बहने लगा और मेरी सलवार भीगने लगी. मुझे उनको तड़पाने में बहुत मजा आता था इसलिए मैं जान-बूझ कर इस तरह से अपने आप तैयार करती थी कि सबकी नजर मुझ पर जाये बिना रह ही न पाये. रानी के चूचों का उतार चढ़ाव, उसकी दूध सी गोरी बाल रहित बग़लें, गुलाबी सी नाभि, उसके बिखरे हुए केश और मस्त चुदाई के बाद चेहरे पर छाये संतुष्टि के हाव भाव देख कर कामोत्तेजना से मेरा दिमाग झन्ना उठा.

थोड़ी ही देर बाद एक-दूसरे के जिस्म की गर्मी ने एक हल्की लौ जलने लगी, जो हाथ अभी तक मेरी पीठ को अहिस्ता-अहिस्ता सहला रहे थे, वो ही हाथ अब मेरी पीठ को भींचने लगे थे.

आह ओह की आवाज के साथ वो थाप पर थाप मिलाये जा रही थी कि तभी उसके फोन की घंटी बजी. मैंने गुस्सा होकर कहा- इतनी रात को आप घर नहीं जाइएगा, चोर बदमाश सब घूमते हैं. मगर इसी के साथ मेरे मन की इच्छा भी पूरी हो जाती थी कि मुझे पड़ोस के और लोग भी देखें.

मगर अंतर्वासना पर पाठकों के साथ अपनी उलझनें और अपने जीवन की घटनाएँ आसानी से शेयर की जा सकती हैं इसलिए यह मेरी पसंदीदा साइट है. अब इस कहानी को मैं यहीं थोड़ा विराम दे कर उस लड़की और परिवार के बारे में आपको बता दूं.

मगर मैं फिर भी उनके लंड को आगे-पीछे करती रही यही सोच कर कि जीजा जी अभी शायद स्तनपान में व्यस्त हैं. मैंने सोचा भाभी तो चुद कर थक गई हैं, इसलिए मैंने धीरे से भाभी के ऊपर हाथ फेरना चालू किया. मैंने सारा से कहा- दिलिया के ऊपर नीचे के ओंठ बारी बारी चूसो और जीभ भी चूसो!मैंने उसे कहा- जब मैं एक कहूँ तो निचला होंठ … दो कहूँ तो ऊपर का ओंठ … और तीन कहूँ तो जीभ चूसो.

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गांव से जब हम स्टेशन के लिए निकले तो हम लोग चौराहे पर खड़े होकर ट्रैकर जीप का इंतजार कर रहे थे.

अब तक इस सेक्स कहानी में आपने पढ़ा कि नम्रता और मैं, हम दोनों अपने अपने पार्टनर के साथ रात को चुदाई कर चुके थे. नम्रता- अच्छा तुम बताओ अपनी खुशी का राज?उसके हाथ को अपने हाथ में लेते हुए मैं बोला- जान, मेरी खुशी में तुम्हारी खुशी छिपी है. वह ब़ड़े प्यार से अंडों को सहला रही थी और तेज़ तेज़ सिर को आगे पीछे करती हुई लंड को अंदर बाहर कर रही थी.

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वो मेरा कमीज उतारने लगा, तो मैंने उसे रोक कर बेडरूम की ओर इशारा किया. इसी धक्का-मुक्की में मेरे हाथ की उंगलियों के पोरू वसुन्धरा की जलती-धधकती योनि से रगड़ खा गए. मौसी के चुचे बड़े थे, जो मेरी मुट्ठी में समा नहीं रहा था, फिर भी जितना ज्यादा हो सकता था.

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मौसी ने अपनी आंखें बंद की हुई थीं और वे सांसों को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थीं. कुछ देर में वो फिर से मेरे ऊपर चढ़ गया और मुझे उल्टा करके मेरी गांड मारने लगा. आअह्ह ह्ह चोद दे बेबी … जोर जोर से चोद माय स्वीट बेबी … फ़क मी आअह उफ्फ!”वंश मुझे धकापेल चोद रहा था और मेरे होंठों में किस भी कर रहा था.

सुमन जोर से चिल्लाई- उम्म्ह… अहह… हय… याह… मम्मीईई ईईईई नहीईई ईई! नहीं … मत करो … मर जाऊंगी. ये सुनकर मैंने शरमाते हुए भार्गव को हाथ पर एक चपेट लगाई और हम सब हंसी मज़ाक करने लगे. मुझे रोटी देते समय मां को कुछ ज्यादा ही झुकना पड़ रहा था, तो मुझे उनके गोरे, कड़क स्तन दिख रहे थे.

मैं डॉली को इस बात के लिए राजी कर सकती थी कि वो मेरे पापा से मिल उन्हें समझा कर इस बात के लिए मना ले कि मेरी पढ़ाई का सारा खर्चा वो मुझे उधार देगी. जैसे ही पहला दिन ख़त्म होने को आया, तब क्लास खत्म होने के बाद दीपाली ने मुझसे मेरा नाम पूछा. अब तक उसके दोनों हाथ में पाना पकड़ा हुआ था अब उसने एक हाथ का पाना रख दिया और मेरी कमर पर ले आया और धीरे-धीरे कमर और मेरे नंगे हिप्स पर घुमाने लगा.

मैंने भी उनको तड़पाने की सोची- अंकल आपका कहना है कि मैंने अन्दर कुछ भी नहीं पहना?मुझे नहीं पता?. धीरे-धीरे सुमन भी सेक्स कहानी पढ़ने लगी, पर खुशी पढ़ती थी या नहीं … ये पता ही नहीं चला.

उन्होंने ने पीछे से मेरी चूत पर अपना लंड लगा दिया और मुझे घोड़ी बनाकर चोदने लगे.

मैं सीट पर लेटी हुई सी हो गई थी … और वो मेरे सामने अपना लंड अपने हाथ से हिलाने लगा था. डॉटर फादर सेक्स वीडियोवाह! क्या अहसास था वह … वो काफी देर तक मेरे लंड को मजे लेकर चूसती रही और मुझे भी मजे देती रही. मां बेटी सेक्सी फिल्मउन्होंने कहा- ये किस लिए?मैंने कहा- देखती जाओ!मैंने उन्हें ऊपर नीचे लिटाया और आधी लौकी चाची के और आधी कंचन के चुत में घुसा दी। फिर उनसे कहा- अब चुदाई करो!दोनों अपने चूतड़ ऊपर नीचे करने लगी. मेरी बात पर हीना ने कहा- तो क्या हुआ सर … आप मेरे अन्दर ही समा जाइए न … बाकी मैं संभाल लूंगी.

वो बोली- अर्पित मुझे बारिश देखना बहुत अच्छा लगता है, देखो आज बादल भी धरती पे ऐसे बरस रहा है, जैसे ये दोनों एक दूसरे से मिलने के लिए जन्मों के प्यासे हों, जैसे हम तुम.

रितेश भी मौके की नज़ाकत देख कर तेज़ी से धक्के लगाने लगा और करीब 10-15 मिनट की चुदाई के बाद दोनों झड़ गए. वसुन्धरा! आज तुम बहुत ऊपर उठ गयी, मैं तो किंचित शूद्र प्राणी मात्र हूँ लेकिन तेरी ज़ुस्तजू ने एक ज़र्रे को आफ़ताब बना दिया, एक अदना को आला कर दिया. उसके लिए आप सबका बहुत धन्यवाद दोस्तो!अन्तर्वासना का सच्चे दिल से आभार व्यक्त करता हूं जिनकी वजह से हमें लंड हिलाने और चूत में अंगुली करने को मिलता और ऐसी रोचक कहानियां एक दूसरे के सामने पेश कर पाते हैं.

अब मैं भी जोश में आ गया था, तो मैंने भी उनके बाल पकड़ कर जोर जोर से लंड को भाभी के मुँह में अन्दर बाहर करना चालू कर दिया. उसकी आवाज़ काफी ऊंचे स्वर में निकल रही थी, लेकिन आस पास किसी के होने का कोई डर नहीं था. जिस बुर में अभी अभी बाल आने शुरू ही हुए थे, उसमें मेरा मोटा लंड अन्दर तक घुस कर सवारी कर रहा था.

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कुछ देर तक ऐसे ही मेरे लंड से सारा वीर्य चूसने के बाद मोनी की कराहें अब हल्की होती चली गयीं और उसका बदन ढीला पड़ गया। तब तक मैंने भी अपना सारा ज्वार उस कॉन्डोम में उगल दिया था इसलिये एक दो धक्के लगाकर अब मैं भी शाँत हो गया और धीरे से अपने लंड को मोनी की चूत से बाहर निकाल लिया।मेरी खामोशी भरी सेक्सी कहानी अगले भाग में जारी रहेगी. तभी उधर से आवाज आयी- मैं यहां से तुम्हारी गांड में लंड कैसे डाल सकता हूं. उन्होंने अपनी दो उंगलियों से अपनी चुत को थोड़ा खोला और धीरे धीरे करके मेरे लंड पर अपनी चुत सटा दी और खुद ही अपने आप जोर देकर लंड चुत के अंदर लेने लगी और मुझसे कहा- थोड़ा धक्का तुम भी लगाओ.

मैंने उसने अपनी तरफ खींचा और उसको बांहों में कसते हुए उसके नंगे बदन से लिपट गया.

कभी मेरी चूत को होंठों से चूमने लगे और कभी जीभ अंदर देकर उसको चूसने चाटने लगते.

मैं खुशी खुशी पलंग पर पहुँच गया और भाभी अपनी चारपाई पर उठ कर बैठ गईं. ये कहते हुए उसने मेरे हाथ से मोबाइल ले लिया और उसे आगे की सीट पर मोबाइल चार्जिंग के लिए लगा कर रख दिया. रब हस्ता हुआ रखे तुमकोअब उस आदमी ने अपना लंड भाभी से चुसवाया और इसके बाद सीधे होकर उनकी बुर में लंड पेल दिया.

कुछ ही देर के इस मदमस्त युद्ध में हीना अब मदहोशी के शिखर पर पहुंच चुकी थी. सुबह मेरी आंख खुली तो पाया कि पापा और मैं एक दूसरे नंगे चिपके पड़े हैं. अब कमरे में सिर्फ़ आ … आ … आ … की आवाज़ें ही आ रही थीं। फिर उसने झट से मुझे साइड किया और मुझे सोफ़े पर बैठा लिया.

मैं भी उसके पीछे पीछे बाथरूम में हो लिया।शुभ्रा वॉश बेसिन में झुकी हुई थी और मेरी बहन की गोल-गोल गांड का उभार मेरी तरफ था और उसकी गांड मुझे आकर्षित कर रही थी। मेरे हाथ बिना किसी देरी के शुभ्रा के कूल्हों को मसलने लगे. तू तो जानती ही है कि एक मदहोश औरत की चुदाई में चूत सहलाना … मतलब आग में पेट्रोल डालने के बराबर होता है.

अगर मैं उसकी गांड पर लंड रगड़ने में थोड़ा सा भी शिथिल पड़ता तो शुभ्रा अपनी गांड हिला-हिलाकर मेरे लंड से रगड़ने लगती.

उसे पता था कि मैं पहले किसी से चुदी नहीं हूँ तो वो जल्दबाज़ी नहीं कर रहा था. अंकल अब मेरे शरीर पर झुके और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख कर मुझे किस करने लगे. उस दिन हम दोनों ने बस एक बार ही सेक्स किया, बाकी टाइम में किस ही करते रहे.

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थोड़ी ही देर में मैं पूनम के पास पहुंच गया और दरवाज़े के अंदर जाते ही मैं उसे किस करना शुरू हो गया. मैं खुद को काम-कौशल में सिद्धहस्त मानता था और अगर नियति ने चाहा तो, अगर ये लम्हें भविष्य में कभी मेरे और वसुन्धरा के बीच में होने वाले अविश्वसनीय प्रेम-द्वन्द की आधारशिला बने तो यक़ीनन मेरी बहुत ही कड़ी परीक्षा होने वाली थी. मैंने एक टेबल बुक कर ली थी। वहां से मैं उसे सीधे उस रेस्टोरेंट में ले गया जहाँ हमारी डेट थी.

तभी वो अपनी सहेली से बोली- तू बाहर रुक जा … यदि कोई आता है, तो बता देना. उधर से दिलिया ने भी मेरे शरीर को सहलाना शुरू कर दिया और मेरे निप्पल से खेलने लगी.

साथ ही सीमा नितिन के मुँह पर अपनी चूत को रगड़ने लगीं, उसका सिर पकड़ कर अपनी चूत पर पूरी ताकत से दबाने लगीं.

इसलिए यह सोचकर मैंने खुद को वहीं पर रोकने का फैसला कर लिया और आगे नहीं बढ़ा. रेखा बड़ी मासूमियत से बोली, लेकिन मैंने भी उसे झेलाने के लिए बोला- क्या डाल दूं. नम्रता की बुद्धिमानी देखकर मैं दंग रह गया, मेरे इशारे को समझ गयी थी.

मैं भी लंड सहलाता हुआ बोला- ठीक है मेरी जाने बहार … आपका हुकुम मेरे सर माथे. वो नजदीक के शहर में कोई कोचिंग ले रही थी, जिस वजह से हम दोनों मिलने लगे थे. रमेश ने फिर अपना लण्ड रिया की गांड पर रखा और पूछा- क्यों रे रंडी की बच्ची, लण्ड चाहिए?रिया- हहम्म, हां चाहिए मुझे डैडी.

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तो वो बोली- भाई तू मुझसे क्या चाहता है?मैंने न जाने किस झोंक में कह दिया- देख मैं नहीं जानता कि ये सब क्या है लेकिन मैं तुझे चोदना चाहता हूं. मेरी इस हरकत पर मोनी कुछ नहीं बोली किंतु अपने अंदाज में मुझे आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास जरूर कर रही थी. जो लोग होते हैं वो भी किसी से मतलब नहीं रखते। मैंने उसके साथ यहां भी मजे किये थे।इत्तेफाक से यह वही सीट थी जहाँ हम पिछली बार बैठे थे। सीट पर बैठते ही हम दोनों ने एक दूसरे को देखा.

वो बोली- कैसे?मैंने कहा- जो उसको चुदाई के समय बोलना चाहती थी, पर डर से बोल नहीं पाती थी, वो सब आज बोलना.

शर्मा सर ने बड़े आराम से मेरा नग्न शरीर को बेड पर लिटाया और तेजी से मेरी जांघों के बीच बैठ गए. जैसे ही मैं धक्का ठोकता तो दोनों फर्श पर फिसलकर दूर वाली दीवार से जा लगते. जब एक बार वीर्य निकालने के बाद भी लंड शांत नहीं हुआ तो दूसरी बार लगातार मुट्ठ मारी तब जाकर मुझे नींद आई.